अल-बकरा · 98/286
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-बकरा
مَن كَانَ عَدُوًّا لِّلَّهِ وَمَلَائِكَتِهِ وَرُسُلِهِ وَجِبْرِيلَ وَمِيكَالَ فَإِنَّ اللَّهَ عَدُوٌّ لِّلْكَافِرِينَ ۝٩٨
Man kaana `aduwwal lillaahi wa malaaa`ikatihee wa Rusulihee wa Jibreela wa Meekaala fa innal laaha `aduwwul lilkaafireen
📖 हिंदी अर्थ
जो शख्स ख़ुदा और उसके फरिश्तों और उसके रसूलों और (ख़ासकर) जिबराईल व मीकाइल का दुशमन हो तो बेशक खुदा भी (ऐसे) काफ़िरों का दुश्मन है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • عَدُوًّا (अदुव्वन): शत्रु, दुश्मन
  • جِبْرِيلَ (जिब्रील): फ़रिश्ता जिब्रील (अलैहिस्सलाम), जो वह़ी (प्रकाशना) लाने के ज़िम्मेदार हैं
  • مِيكَالَ (मीकाल): फ़रिश्ता मीकाइल (अलैहिस्सलाम), जो बारिश और रिज़्क़ (आजीविका) के ज़िम्मेदार हैं

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के बारे में है जो अल्लाह, उसके फ़रिश्तों और उसके रसूलों से दुश्मनी रखते हैं। ख़ास तौर पर यहूदियों का ज़िक्र है, जिन्होंने कहा था कि जिब्रील (अलैहिस्सलाम) हमारे दुश्मन हैं और मीकाइल (अलैहिस्सलाम) हमारे दोस्त हैं। अल्लाह ने उन्हें जवाब दिया कि जो कोई अल्लाह, उसके फ़रिश्तों और उसके रसूलों में से किसी एक से भी दुश्मनी रखता है, वह दरअसल अल्लाह से दुश्मनी रखता है। जिब्रील और मीकाइल दोनों अल्लाह के नेक और मुक़र्रब (नज़दीकी) फ़रिश्ते हैं। जो इनमें से किसी एक से दुश्मनी रखे, वह दूसरे से भी दुश्मनी रखता है, और जो अल्लाह के फ़रिश्तों से दुश्मनी रखे, वह अल्लाह से दुश्मनी रखता है। फिर अल्लाह ने साफ़ कर दिया कि जो लोग काफ़िर हैं और अल्लाह की भेजी हुई चीज़ों का इनकार करते हैं, अल्लाह उनका दुश्मन है। और जिसका अल्लाह दुश्मन हो, उसका अंजाम सिर्फ़ जहन्नम (नरक) है।

फ़ायदे (लाभ):

  1. इस आयत से हमें सीख मिलती है कि अल्लाह के नेक बंदों और फ़रिश्तों से मुहब्बत रखना ईमान का हिस्सा है, और उनसे दुश्मनी रखना कुफ़्र की निशानी है।
  2. जिब्रील (अलैहिस्सलाम) और मीकाइल (अलैहिस्सलाम) जैसे मुक़र्रब फ़रिश्तों का सम्मान करना हमारा ईमानी फ़र्ज़ है, क्योंकि वे अल्लाह के भेजे हुए कामों में लगे हुए हैं।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने बंदों के साथ इंसाफ़ करता है — जो उससे दुश्मनी रखे, वह उसका दुश्मन है, और जो उससे मुहब्बत रखे, वह उसका दोस्त है। अल्लाह की दोस्ती ही असली कामयाबी है।
  4. मुसलमान को चाहिए कि वह अल्लाह के सभी फ़रिश्तों और रसूलों पर ईमान रखे, बिना किसी भेदभाव के, क्योंकि यही सच्चा ईमान है।


📜 आयत 96-100 — सूरा अल-बकरा

96وَلَتَجِدَنَّهُمْ أَحْرَصَ النَّاسِ عَلَىٰ حَيَاةٍ وَمِنَ الَّذِينَ أَشْرَكُوا ۚ يَوَدُّ أَحَدُهُمْ لَوْ يُعَمَّرُ أَلْفَ سَنَةٍ وَمَا هُوَ بِمُزَحْزِحِهِ مِنَ الْعَذَابِ أَن يُعَمَّرَ ۗ وَاللَّهُ بَصِيرٌ بِمَا يَعْمَلُونَ
और (ऐ रसूल) तुम उन ही को ज़िन्दगी का सबसे ज्यादा हरीस पाओगे और मुशरिक़ों में से हर एक शख्स चाहता है कि काश उसको हज़ार बरस की उम्र दी जाती हालाँकि अगर इतनी तूलानी उम्र भी दी जाए तो वह ख़ुदा के अज़ाब से छुटकारा देने वाली नहीं, और जो कुछ वह लोग करते हैं खुदा उसे देख रहा है
97قُلْ مَن كَانَ عَدُوًّا لِّجِبْرِيلَ فَإِنَّهُ نَزَّلَهُ عَلَىٰ قَلْبِكَ بِإِذْنِ اللَّهِ مُصَدِّقًا لِّمَا بَيْنَ يَدَيْهِ وَهُدًى وَبُشْرَىٰ لِلْمُؤْمِنِينَ
(ऐ रसूल उन लोगों से) कह दो कि जो जिबरील का दुशमन है (उसका खुदा दुशमन है) क्योंकि उस फ़रिश्ते ने खुदा के हुक्म से (इस कुरान को) तुम्हारे दिल पर डाला है और वह उन किताबों की भी तसदीक करता है जो (पहले नाज़िल हो चुकी हैं और सब) उसके सामने मौजूद हैं और ईमानदारों के वास्ते खुशख़बरी है
98مَن كَانَ عَدُوًّا لِّلَّهِ وَمَلَائِكَتِهِ وَرُسُلِهِ وَجِبْرِيلَ وَمِيكَالَ فَإِنَّ اللَّهَ عَدُوٌّ لِّلْكَافِرِينَ
जो शख्स ख़ुदा और उसके फरिश्तों और उसके रसूलों और (ख़ासकर) जिबराईल व मीकाइल का दुशमन हो तो बेशक खुदा भी (ऐसे) काफ़िरों का दुश्मन है
99وَلَقَدْ أَنزَلْنَا إِلَيْكَ آيَاتٍ بَيِّنَاتٍ ۖ وَمَا يَكْفُرُ بِهَا إِلَّا الْفَاسِقُونَ
और (ऐ रसूल) हमने तुम पर ऐसी निशानियाँ नाज़िल की हैं जो वाजेए और रौशन हैं और ऐसे नाफरमानों के सिवा उनका कोई इन्कार नहीं कर सकता
100أَوَكُلَّمَا عَاهَدُوا عَهْدًا نَّبَذَهُ فَرِيقٌ مِّنْهُم ۚ بَلْ أَكْثَرُهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ
और उनकी ये हालत है कि जब कभी कोई अहद किया तो उनमें से एक फरीक़ ने तोड़ डाला बल्कि उनमें से अक्सर तो ईमान ही नहीं रखते
अल-बकराकुरान सूची
286आयत
मदनीअवतरण स्थान
98आयत

अनुवाद — अल-बकरा 98

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Monday, September 28, 2026

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