ताहा · 108/135
अनुवाद उच्चारण — सूरा ताहा
يَوْمَئِذٍ يَتَّبِعُونَ الدَّاعِيَ لَا عِوَجَ لَهُ ۖ وَخَشَعَتِ الْأَصْوَاتُ لِلرَّحْمَٰنِ فَلَا تَسْمَعُ إِلَّا هَمْسًا ۝١٠٨
Yawma iziny yattabi`oonad daa`iya laa `iwaja lahoo wa khasha`atil aswaatu lir Rahmaani falaa tasma`u illaa hamsaa
📖 हिंदी अर्थ
उस दिन लोग एक पुकारने वाले इसराफ़ील की आवाज़ के पीछे (इस तरह सीधे) दौड़ पड़ेगे कि उसमें कुछ भी कज़ी न होगी और आवाज़े उस दिन खुदा के सामने (इस तरह) घिघियाएगें कि तू घुनघुनाहट के सिवा और कुछ न सुनेगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • الداعي: पुकारने वाला (हश्र के मैदान की ओर बुलाने वाला)।
  • لا عِوَجَ: कोई टेढ़ापन नहीं, कोई विचलन नहीं।
  • خَشَعَت: झुक गईं, दब गईं, विनम्र हो गईं।
  • هَمْسًا: बहुत हल्की आवाज़, पैरों की आहट या धीमी फुसफुसाहट।

तफसीर (व्याख्या):

उस दिन (क़ियामत के दिन) सभी लोग उस पुकारने वाले (इस्राफील अलैहिस्सलाम) के पीछे चलेंगे, जो उन्हें हश्र के मैदान की ओर बुलाएगा। उस पुकार से कोई भी विचलित नहीं हो सकेगा, न कोई उससे बच सकेगा और न ही उसके आगे झुकने में कोई टेढ़ापन या रुकावट होगी। यह पुकार सत्य और सर्वशक्तिमान अल्लाह की ओर से होगी, जिसका पालन करना हर प्राणी के लिए अनिवार्य होगा।

उस दिन सभी आवाज़ें रहमान (अल्लाह) के सामने दब जाएँगी, डर और सम्मान से सब खामोश हो जाएँगे। कोई बोलने की हिम्मत नहीं करेगा। वहाँ केवल हल्की-हल्की आहटें सुनाई देंगी — जैसे पैरों के चलने की धीमी आवाज़ या बहुत ही मद्धिम फुसफुसाहट। यह दृश्य अल्लाह की महानता और उसके सामने सभी के झुकने का प्रतीक होगा।

दावती पहलू (आध्यात्मिक संदेश):

यह आयत हमें उस महान दिन की याद दिलाती है जब सारी सृष्टि अल्लाह के सामने नतमस्तक होगी। यह हमारे लिए एक चेतावनी है कि हम अपने जीवन को इस तरह बनाएँ कि उस दिन हमारा हिसाब आसान हो। जो लोग आज अल्लाह के आगे झुकते हैं, उनकी आवाज़ें और दिल उसकी याद में विनम्र होते हैं, वे उस दिन की भयावहता से محفوظ रहेंगे। यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के सामने विनम्रता और खामोशी ही असली इज़्ज़त है। आइए, हम अपने दिलों को अल्लाह की याद से नरम करें और उसकी राह पर चलें, ताकि उस दिन हमारा चेहरा रोशन हो और हमारी आवाज़ें उसकी रहमत के साये में सुरक्षित रहें।



📜 आयत 106-110 — सूरा ताहा

106فَيَذَرُهَا قَاعًا صَفْصَفًا
तो तुम कह दो कि मेरा परवरदिगार बिल्कुल रेज़ा रेज़ा करके उड़ा डालेगा और ज़मीन को एक चटियल मैदान कर छोड़ेगा
107لَّا تَرَىٰ فِيهَا عِوَجًا وَلَا أَمْتًا
कि (ऐ शख्स) न तो उसमें मोड़ देखेगा और न ऊँच-नीच
108يَوْمَئِذٍ يَتَّبِعُونَ الدَّاعِيَ لَا عِوَجَ لَهُ ۖ وَخَشَعَتِ الْأَصْوَاتُ لِلرَّحْمَٰنِ فَلَا تَسْمَعُ إِلَّا هَمْسًا
उस दिन लोग एक पुकारने वाले इसराफ़ील की आवाज़ के पीछे (इस तरह सीधे) दौड़ पड़ेगे कि उसमें कुछ भी कज़ी न होगी और आवाज़े उस दिन खुदा के सामने (इस तरह) घिघियाएगें कि तू घुनघुनाहट के सिवा और कुछ न सुनेगा
109يَوْمَئِذٍ لَّا تَنفَعُ الشَّفَاعَةُ إِلَّا مَنْ أَذِنَ لَهُ الرَّحْمَٰنُ وَرَضِيَ لَهُ قَوْلًا
उस दिन किसी की सिफ़ारिश काम न आएगी मगर जिसको खुदा ने इजाज़त दी हो और उसका बोलना पसन्द करे जो कुछ उन लोगों के सामने है और जो कुछ उनके पीछे है
110يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ وَلَا يُحِيطُونَ بِهِ عِلْمًا
(ग़रज़ सब कुछ) वह जानता है और ये लोग अपने इल्म से उसपर हावी नहीं हो सकते
ताहाकुरान सूची
135आयत
मक्कीअवतरण स्थान
108आयत

अनुवाद — ताहा 108

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Saturday, October 3, 2026

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