अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَوْمَئِذٍ – उस दिन (यानी क़ियामत का दिन)
- لَا تَنْفَعُ – कोई लाभ नहीं पहुँचाएगी, काम नहीं आएगी
- الشَّفَاعَةُ – सिफ़ारिश (किसी के लिए विनती करना)
- إِلَّا مَنْ أَذِنَ لَهُ – सिवाय उसके जिसे अनुमति दी गई हो
- الرَّحْمَنُ – अल्लाह (जो अत्यंत दयालु है)
- وَرَضِيَ لَهُ قَوْلًا – और उसके (सिफ़ारिश करने वाले या सिफ़ारिश किए जाने वाले) के कथन से प्रसन्न हो
विस्तृत तफ़सीर (व्याख्या):
उस महान दिन, जब सारा संसार अपने रब के सामने खड़ा होगा, वहाँ किसी की सिफ़ारिश किसी के काम नहीं आएगी। न कोई रिश्ता काम देगा, न कोई दुनियावी रुतबा, न कोई धन-दौलत। सिफ़ारिश का दरवाज़ा पूरी तरह बंद होगा, सिवाय उसके जिसे खुद अल्लाह तआला अपनी ओर से अनुमति दें। यानी सिफ़ारिश करने वाले को भी अल्लाह की इजाज़त चाहिए, और जिसके लिए सिफ़ारिश की जाए उसके बारे में भी अल्लाह की मर्ज़ी होनी चाहिए।
यह बात हमें सिखाती है कि उस दिन सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा और उसकी मर्ज़ी ही सब कुछ होगी। वही फ़ैसला करेगा कि किसे सिफ़ारिश का शरफ़ मिलेगा और किसके लिए सिफ़ारिश क़ुबूल होगी। यह सब कुछ सिर्फ़ उन्हीं लोगों के लिए होगा जो दुनिया में ईमान और अच्छे आमाल के साथ जिए, और जिन्होंने अपने दिल से "ला इलाहा इल्लल्लाह" (अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं) का कलमा पढ़ा हो और उस पर सच्चे दिल से ईमान रखते हुए अपनी ज़िंदगी गुज़ारी हो।
यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह रहमान है, बहुत दयालु है, लेकिन उसकी दयालुता भी उसकी अपनी मर्ज़ी और हिकमत के तहत ही काम करती है। वह चाहता है कि उसके बंदे उसकी तरफ़ रुजू करें, उसकी इबादत करें, और उसके दिए हुए रास्ते पर चलें। जो लोग दुनिया में अल्लाह की इबादत करते हैं और उसके रसूल (ﷺ) की सुन्नत पर चलते हैं, उन्हीं के लिए उस दिन खुशखबरी है।
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें अपनी ज़िंदगी में सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा को सामने रखना चाहिए। हमें अपने अमल (कर्म) को सुधारना चाहिए, अपनी ज़ुबान को सच्चाई और अच्छाई पर लगाना चाहिए, और अपने दिल को ईमान की रोशनी से रोशन करना चाहिए। क्योंकि उस दिन कोई दूसरा हमारी मदद नहीं कर सकता, सिवाय उसके जिसे अल्लाह खुद अनुमति दे। और अल्लाह की अनुमति उन्हीं को मिलेगी जो उसकी नज़र में पसंदीदा होंगे।
तो आओ, हम सब अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक ढालें, अपने दिलों को ईमान से भरें, और उस दिन की तैयारी करें जब सिर्फ़ अल्लाह की मर्ज़ी ही चलेगी। यही सच्ची कामयाबी है, और यही वह रास्ता है जो हमें उस महान दिन में सिफ़ारिश का हक़दार बना सकता है।
📜 आयत 107-111 — ताहा
अनुवाद — ताहा 109
सूरा ताहा आयत 109 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उस दिन किसी की सिफ़ारिश काम न आएगी मगर जिसको…सूरा आयत 109/135 — ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ताहा सुनें, ताहा अनुवाद, ताहा mp3, ताहा pdf. आयत 107–111. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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