ताहा · 109/135
अनुवाद उच्चारण — ताहा
يَوْمَئِذٍ لَّا تَنفَعُ الشَّفَاعَةُ إِلَّا مَنْ أَذِنَ لَهُ الرَّحْمَٰنُ وَرَضِيَ لَهُ قَوْلًا ۝١٠٩
Yawma `izil laa tanfa`ush shafaa`atu illaa man azina lahur Rahmaanu wa radiya lahoo qawlaa
📖 हिंदी अर्थ
उस दिन किसी की सिफ़ारिश काम न आएगी मगर जिसको खुदा ने इजाज़त दी हो और उसका बोलना पसन्द करे जो कुछ उन लोगों के सामने है और जो कुछ उनके पीछे है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَوْمَئِذٍ – उस दिन (यानी क़ियामत का दिन)
  • لَا تَنْفَعُ – कोई लाभ नहीं पहुँचाएगी, काम नहीं आएगी
  • الشَّفَاعَةُ – सिफ़ारिश (किसी के लिए विनती करना)
  • إِلَّا مَنْ أَذِنَ لَهُ – सिवाय उसके जिसे अनुमति दी गई हो
  • الرَّحْمَنُ – अल्लाह (जो अत्यंत दयालु है)
  • وَرَضِيَ لَهُ قَوْلًا – और उसके (सिफ़ारिश करने वाले या सिफ़ारिश किए जाने वाले) के कथन से प्रसन्न हो

विस्तृत तफ़सीर (व्याख्या):

उस महान दिन, जब सारा संसार अपने रब के सामने खड़ा होगा, वहाँ किसी की सिफ़ारिश किसी के काम नहीं आएगी। न कोई रिश्ता काम देगा, न कोई दुनियावी रुतबा, न कोई धन-दौलत। सिफ़ारिश का दरवाज़ा पूरी तरह बंद होगा, सिवाय उसके जिसे खुद अल्लाह तआला अपनी ओर से अनुमति दें। यानी सिफ़ारिश करने वाले को भी अल्लाह की इजाज़त चाहिए, और जिसके लिए सिफ़ारिश की जाए उसके बारे में भी अल्लाह की मर्ज़ी होनी चाहिए।

यह बात हमें सिखाती है कि उस दिन सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा और उसकी मर्ज़ी ही सब कुछ होगी। वही फ़ैसला करेगा कि किसे सिफ़ारिश का शरफ़ मिलेगा और किसके लिए सिफ़ारिश क़ुबूल होगी। यह सब कुछ सिर्फ़ उन्हीं लोगों के लिए होगा जो दुनिया में ईमान और अच्छे आमाल के साथ जिए, और जिन्होंने अपने दिल से "ला इलाहा इल्लल्लाह" (अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं) का कलमा पढ़ा हो और उस पर सच्चे दिल से ईमान रखते हुए अपनी ज़िंदगी गुज़ारी हो।

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह रहमान है, बहुत दयालु है, लेकिन उसकी दयालुता भी उसकी अपनी मर्ज़ी और हिकमत के तहत ही काम करती है। वह चाहता है कि उसके बंदे उसकी तरफ़ रुजू करें, उसकी इबादत करें, और उसके दिए हुए रास्ते पर चलें। जो लोग दुनिया में अल्लाह की इबादत करते हैं और उसके रसूल (ﷺ) की सुन्नत पर चलते हैं, उन्हीं के लिए उस दिन खुशखबरी है।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें अपनी ज़िंदगी में सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा को सामने रखना चाहिए। हमें अपने अमल (कर्म) को सुधारना चाहिए, अपनी ज़ुबान को सच्चाई और अच्छाई पर लगाना चाहिए, और अपने दिल को ईमान की रोशनी से रोशन करना चाहिए। क्योंकि उस दिन कोई दूसरा हमारी मदद नहीं कर सकता, सिवाय उसके जिसे अल्लाह खुद अनुमति दे। और अल्लाह की अनुमति उन्हीं को मिलेगी जो उसकी नज़र में पसंदीदा होंगे।

तो आओ, हम सब अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक ढालें, अपने दिलों को ईमान से भरें, और उस दिन की तैयारी करें जब सिर्फ़ अल्लाह की मर्ज़ी ही चलेगी। यही सच्ची कामयाबी है, और यही वह रास्ता है जो हमें उस महान दिन में सिफ़ारिश का हक़दार बना सकता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 107-111 — ताहा

107لَّا تَرَىٰ فِيهَا عِوَجًا وَلَا أَمْتًا
कि (ऐ शख्स) न तो उसमें मोड़ देखेगा और न ऊँच-नीच
108يَوْمَئِذٍ يَتَّبِعُونَ الدَّاعِيَ لَا عِوَجَ لَهُ ۖ وَخَشَعَتِ الْأَصْوَاتُ لِلرَّحْمَٰنِ فَلَا تَسْمَعُ إِلَّا هَمْسًا
उस दिन लोग एक पुकारने वाले इसराफ़ील की आवाज़ के पीछे (इस तरह सीधे) दौड़ पड़ेगे कि उसमें कुछ भी कज़ी न होगी और आवाज़े उस दिन खुदा के सामने (इस तरह) घिघियाएगें कि तू घुनघुनाहट के सिवा और कुछ न सुनेगा
109يَوْمَئِذٍ لَّا تَنفَعُ الشَّفَاعَةُ إِلَّا مَنْ أَذِنَ لَهُ الرَّحْمَٰنُ وَرَضِيَ لَهُ قَوْلًا
उस दिन किसी की सिफ़ारिश काम न आएगी मगर जिसको खुदा ने इजाज़त दी हो और उसका बोलना पसन्द करे जो कुछ उन लोगों के सामने है और जो कुछ उनके पीछे है
110يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ وَلَا يُحِيطُونَ بِهِ عِلْمًا
(ग़रज़ सब कुछ) वह जानता है और ये लोग अपने इल्म से उसपर हावी नहीं हो सकते
111۞ وَعَنَتِ الْوُجُوهُ لِلْحَيِّ الْقَيُّومِ ۖ وَقَدْ خَابَ مَنْ حَمَلَ ظُلْمًا
और (क़यामत में) सारी (खुदाई के) का मुँह ज़िन्दा और बाक़ी रहने वाले खुदा के सामने झुक जाएँगे और जिसने जुल्म का बोझ (अपने सर पर) उठाया वह यक़ीनन नाकाम रहा
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अनुवाद — ताहा 109

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Tuesday, August 18, 2026

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