ताहा · 112/135
अनुवाद उच्चारण — ताहा
وَمَن يَعْمَلْ مِنَ الصَّالِحَاتِ وَهُوَ مُؤْمِنٌ فَلَا يَخَافُ ظُلْمًا وَلَا هَضْمًا ۝١١٢
Wa mai ya`mal minas saalihaati wa huwa mu`minun falaa yakhaafu zulmanw wa laa hadmaa
📖 हिंदी अर्थ
और जिसने अच्छे-अच्छे काम किए और वह मोमिन भी है तो उसको न किसी तरह की बेइन्साफ़ी का डर है और न किसी नुक़सान का
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ظُلْمًا: अत्याचार, यानी किसी के पापों को बढ़ा-चढ़ाकर उसे सज़ा देना।
  • هَضْمًا: कमी, यानी किसी के अच्छे कर्मों का बदला कम कर देना।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के लिए खुशखबरी है जो ईमान की रोशनी में नेक काम करते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जो कोई भी अच्छे कर्म करेगा—चाहे वह नमाज़ हो, रोज़ा हो, ज़कात हो, सच्चाई हो, या लोगों की मदद करना हो—और साथ ही वह अल्लाह और उसके रसूल पर पक्का ईमान रखता हो, तो उसे किसी भी तरह का डर नहीं होना चाहिए।

अल्लाह का वादा है कि वह किसी पर ज़ुल्म नहीं करेगा। यानी वह किसी को उसके गुनाहों से ज़्यादा सज़ा नहीं देगा, और न ही उसकी नेकियों का बदला कम करेगा। बल्कि अल्लाह की रहमत और इंसाफ़ का तक़ाज़ा यह है कि वह हर नेक काम का पूरा-पूरा अज्र देगा, और अपने बंदों के साथ बेहतरीन सलूक करेगा।

यह आयत मोमिनों के दिलों को सुकून देती है कि उनकी मेहनत और अच्छे काम रब के यहाँ बेकार नहीं जाएंगे। चाहे दुनिया में उन्हें कितनी भी मुश्किलें क्यों न आएं, आख़िरत में उनका इनाम पूरा मिलेगा। अल्लाह ने अपनी रहमत से यह वादा किया है कि वह किसी की मेहनत को ज़ाया नहीं करेगा।

तो ऐ इंसान! तू नेक काम करता रह, ईमान को अपने दिल में मज़बूत रख, और अल्लाह की रहमत पर भरोसा कर। क्योंकि अल्लाह का इंसाफ़ और उसकी रहमत दोनों तेरे हक़ में हैं। वह न तो तुझ पर ज़ुल्म करेगा और न तेरे अच्छे कामों को कम करके आंकेगा। यही अल्लाह का फ़ज़ल है, और यही मोमिन की कामयाबी है।

🎧 सुनें

📜 आयत 110-114 — ताहा

110يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ وَلَا يُحِيطُونَ بِهِ عِلْمًا
(ग़रज़ सब कुछ) वह जानता है और ये लोग अपने इल्म से उसपर हावी नहीं हो सकते
111۞ وَعَنَتِ الْوُجُوهُ لِلْحَيِّ الْقَيُّومِ ۖ وَقَدْ خَابَ مَنْ حَمَلَ ظُلْمًا
और (क़यामत में) सारी (खुदाई के) का मुँह ज़िन्दा और बाक़ी रहने वाले खुदा के सामने झुक जाएँगे और जिसने जुल्म का बोझ (अपने सर पर) उठाया वह यक़ीनन नाकाम रहा
112وَمَن يَعْمَلْ مِنَ الصَّالِحَاتِ وَهُوَ مُؤْمِنٌ فَلَا يَخَافُ ظُلْمًا وَلَا هَضْمًا
और जिसने अच्छे-अच्छे काम किए और वह मोमिन भी है तो उसको न किसी तरह की बेइन्साफ़ी का डर है और न किसी नुक़सान का
113وَكَذَٰلِكَ أَنزَلْنَاهُ قُرْآنًا عَرَبِيًّا وَصَرَّفْنَا فِيهِ مِنَ الْوَعِيدِ لَعَلَّهُمْ يَتَّقُونَ أَوْ يُحْدِثُ لَهُمْ ذِكْرًا
हमने उसको उसी तरह अरबी ज़बान का कुरान नाज़िल फ़रमाया और उसमें अज़ाब के तरह-तरह के वायदे बयान किए ताकि ये लोग परहेज़गार बनें या उनके मिजाज़ में इबरत पैदा कर दे
114فَتَعَالَى اللَّهُ الْمَلِكُ الْحَقُّ ۗ وَلَا تَعْجَلْ بِالْقُرْآنِ مِن قَبْلِ أَن يُقْضَىٰ إِلَيْكَ وَحْيُهُ ۖ وَقُل رَّبِّ زِدْنِي عِلْمًا
पस (दो जहाँ का) सच्चा बादशाह खुदा बरतर व आला है और (ऐ रसूल) कुरान के (पढ़ने) में उससे पहले कि तुम पर उसकी ''वही'' पूरी कर दी जाए जल्दी न करो और दुआ करो कि ऐ मेरे पालने वाले मेरे इल्म को और ज्यादा फ़रमा
ताहाकुरान सूची
135आयत
मक्कीRevelation
112आयत

अनुवाद — ताहा 112

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Tuesday, August 18, 2026

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