Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- أَضَلَّ: पथभ्रष्ट किया, गुमराह किया
- فِرْعَوْنُ: फ़िरऔन (मिस्र का अत्याचारी शासक)
- قَوْمَهُ: अपनी जाति/अपनी क़ौम को
- وَمَا هَدَى: और उसने मार्गदर्शन नहीं किया
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत फ़िरऔन के उस घिनौने कर्म का वर्णन करती है जो उसने अपनी क़ौम के साथ किया। फ़िरऔन ने अपनी क़ौम को न केवल गुमराह किया, बल्कि उन्हें सत्य के मार्ग से पूरी तरह विचलित कर दिया। उसने अपनी जादूगरी, धोखे और झूठे वादों के माध्यम से उनके सामने कुफ़्र (अविश्वास) को सुंदर और आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया। उसने उन्हें यह विश्वास दिलाया कि वही उनका स्वामी और पालनहार है, और मूसा (अलैहिस्सलाम) का संदेश झूठ है।
फ़िरऔन ने अपनी क़ौम को इस कदर बहकाया कि वे हक़ (सत्य) को देखते हुए भी उसे अस्वीकार करते रहे। उसने उन्हें बताया कि वही उन्हें सही रास्ता दिखा रहा है, जबकि वास्तविकता यह थी कि वह स्वयं अंधा था और अपनी क़ौम को भी अंधा बना रहा था। यहाँ अल्लाह तआला स्पष्ट कर रहे हैं कि फ़िरऔन ने न केवल गुमराह किया, बल्कि उसने कभी भी उन्हें सत्य का मार्ग नहीं दिखाया। उसका दावा कि "मैं तुम्हें सीधा रास्ता दिखा रहा हूँ" (सूरा ग़ाफ़िर: 29) बिल्कुल झूठा था, क्योंकि उसने स्वयं सत्य को अस्वीकार किया और अपनी क़ौम को भी अस्वीकार करने पर मजबूर किया।
इस आयत से हमें यह शिक्षा मिलती है कि नेतृत्व और ज़िम्मेदारी बहुत बड़ी अमानत है। जो व्यक्ति दूसरों का नेता बनता है, उसे चाहिए कि वह उन्हें सत्य और नेकी की ओर बुलाए, न कि गुमराही की ओर। क़ियामत के दिन नेताओं को उनके अनुयायियों के साथ किए गए व्यवहार का हिसाब देना होगा। फ़िरऔन जैसे अत्याचारी शासकों का अंजाम हमेशा विनाश होता है, जबकि अल्लाह के सच्चे नबियों और नेक लोगों का अंजाम सफलता और मुक्ति है।
यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि सच्चा मार्गदर्शन केवल अल्लाह की ओर से आता है। जो व्यक्ति अल्लाह से दूर हो जाता है, वह न केवल स्वयं भटकता है, बल्कि दूसरों को भी भटकाने का कारण बनता है। इसलिए हमें हमेशा अल्लाह की किताब और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सुन्नत को अपना मार्गदर्शक बनाना चाहिए, और उन लोगों से सावधान रहना चाहिए जो हमें सत्य से दूर ले जाना चाहते हैं। अल्लाह हमें सीधे मार्ग पर चलने की तौफ़ीक़ दे और हमें फ़िरऔन जैसे गुमराह करने वालों के प्रभाव से बचाए। आमीन।
📜 आयत 77-81 — सूरा ताहा
अनुवाद — ताहा 79
सूरा ताहा आयत 79 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और फिरऔन ने अपनी क़ौम को गुमराह (करके हलाक) कर…सूरा आयत 79/135 — सूरा ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा ताहा सुनें, सूरा ताहा अनुवाद, सूरा ताहा mp3, सूरा ताहा pdf. आयत 77–81. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा ताहा
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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