अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يَرْجِعُ إِلَيْهِمْ قَوْلًا – उनसे बात करना, उन्हें उत्तर देना
- يَمْلِكُ – सामर्थ्य रखना, अधिकार रखना
- ضَرًّا – हानि पहुँचाना
- نَفْعًا – लाभ पहुँचाना
तफ़सीर:
इस आयत में अल्लाह तआला उन लोगों की नादानी पर अफ़सोस जताते हुए फ़रमाता है कि जिन लोगों ने बछड़े (सामरी के बनाए हुए) की पूजा की, क्या वे देखते नहीं कि वह बछड़ा न तो उनसे बात कर सकता है, न उनके सवालों का जवाब दे सकता है, और न ही उसमें यह शक्ति है कि वह उन्हें कोई नुक़सान पहुँचाए या कोई फ़ायदा पहुँचा सके।
यानी वह बछड़ा एक बेजान मूर्ति है, न उसमें बोलने की क्षमता है, न सुनने की, न समझने की, और न ही उसके पास किसी प्रकार की कोई ताक़त है। फिर भला ऐसी बेजान और लाचार चीज़ की पूजा कैसे की जा सकती है? यह तो सरासर अज्ञानता और मूर्खता है।
अल्लाह तआला इस आयत के माध्यम से हमें यह सबक़ सिखाते हैं कि इंसान को चाहिए कि वह केवल उसी की इबादत करे जो सुनने, देखने, बोलने और हर चीज़ पर क़ुदरत रखने वाला हो। वही अल्लाह है जो अपने बंदों की हर पुकार सुनता है, हर दुआ का जवाब देता है, और अपनी रहमत से उन्हें नुक़सान से बचाता है और फ़ायदा पहुँचाता है।
यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह के सिवा किसी और से उम्मीद रखना या किसी और से डरना बिल्कुल बेकार है, क्योंकि अल्लाह के सिवा कोई भी न तो नुक़सान पहुँचा सकता है और न ही फ़ायदा। इसलिए हमें अपनी सारी उम्मीदें और भरोसा सिर्फ़ अल्लाह पर रखना चाहिए, और उसी की इबादत करनी चाहिए। यही सच्ची मुसलमानी है और यही हमारी कामयाबी का रास्ता है।
📜 आयत 87-91 — ताहा
अनुवाद — ताहा 89
सूरा ताहा आयत 89 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : भला इनको इतनी भी न सूझी कि ये बछड़ा न…सूरा आयत 89/135 — ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ताहा सुनें, ताहा अनुवाद, ताहा mp3, ताहा pdf. आयत 87–91. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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