ताहा · 89/135
अनुवाद उच्चारण — ताहा
أَفَلَا يَرَوْنَ أَلَّا يَرْجِعُ إِلَيْهِمْ قَوْلًا وَلَا يَمْلِكُ لَهُمْ ضَرًّا وَلَا نَفْعًا ۝٨٩
Afalaa yarawna allaa yarji`u ilaihim qawlanw wa laa yamliku lahum darranw wa laa naf`aa
📖 हिंदी अर्थ
भला इनको इतनी भी न सूझी कि ये बछड़ा न तो उन लोगों को पलट कर उन की बात का जवाब ही देता है और न उनका ज़रर ही उस के हाथ में है और न नफ़ा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يَرْجِعُ إِلَيْهِمْ قَوْلًا – उनसे बात करना, उन्हें उत्तर देना
  • يَمْلِكُ – सामर्थ्य रखना, अधिकार रखना
  • ضَرًّا – हानि पहुँचाना
  • نَفْعًا – लाभ पहुँचाना

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला उन लोगों की नादानी पर अफ़सोस जताते हुए फ़रमाता है कि जिन लोगों ने बछड़े (सामरी के बनाए हुए) की पूजा की, क्या वे देखते नहीं कि वह बछड़ा न तो उनसे बात कर सकता है, न उनके सवालों का जवाब दे सकता है, और न ही उसमें यह शक्ति है कि वह उन्हें कोई नुक़सान पहुँचाए या कोई फ़ायदा पहुँचा सके।

यानी वह बछड़ा एक बेजान मूर्ति है, न उसमें बोलने की क्षमता है, न सुनने की, न समझने की, और न ही उसके पास किसी प्रकार की कोई ताक़त है। फिर भला ऐसी बेजान और लाचार चीज़ की पूजा कैसे की जा सकती है? यह तो सरासर अज्ञानता और मूर्खता है।

अल्लाह तआला इस आयत के माध्यम से हमें यह सबक़ सिखाते हैं कि इंसान को चाहिए कि वह केवल उसी की इबादत करे जो सुनने, देखने, बोलने और हर चीज़ पर क़ुदरत रखने वाला हो। वही अल्लाह है जो अपने बंदों की हर पुकार सुनता है, हर दुआ का जवाब देता है, और अपनी रहमत से उन्हें नुक़सान से बचाता है और फ़ायदा पहुँचाता है।

यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह के सिवा किसी और से उम्मीद रखना या किसी और से डरना बिल्कुल बेकार है, क्योंकि अल्लाह के सिवा कोई भी न तो नुक़सान पहुँचा सकता है और न ही फ़ायदा। इसलिए हमें अपनी सारी उम्मीदें और भरोसा सिर्फ़ अल्लाह पर रखना चाहिए, और उसी की इबादत करनी चाहिए। यही सच्ची मुसलमानी है और यही हमारी कामयाबी का रास्ता है।



📜 आयत 87-91 — ताहा

87قَالُوا مَا أَخْلَفْنَا مَوْعِدَكَ بِمَلْكِنَا وَلَٰكِنَّا حُمِّلْنَا أَوْزَارًا مِّن زِينَةِ الْقَوْمِ فَقَذَفْنَاهَا فَكَذَٰلِكَ أَلْقَى السَّامِرِيُّ
वह लोग कहने लगे हमने आपके वायदे के ख़िलाफ नहीं किया बल्कि (बात ये हुईकि फिरऔन की) क़ौम के ज़ेवर के बोझे जो (मिस्र से निकलते वक्त) हम पर लोग गए थे उनको हम लोगों ने (सामरी के कहने से आग में) डाल दिया फिर सामरी ने भी डाल दिया
88فَأَخْرَجَ لَهُمْ عِجْلًا جَسَدًا لَّهُ خُوَارٌ فَقَالُوا هَٰذَا إِلَٰهُكُمْ وَإِلَٰهُ مُوسَىٰ فَنَسِيَ
फिर सामरी ने उन लोगों के लिए (उसी जेवर से) एक बछड़े की मूरत बनाई जिसकी आवाज़ भी बछड़े की सी थी उस पर बाज़ लोग कहने लगे यही तुम्हारा (भी) माबूद और मूसा का (भी) माबूद है मगर वह भूल गया है
89أَفَلَا يَرَوْنَ أَلَّا يَرْجِعُ إِلَيْهِمْ قَوْلًا وَلَا يَمْلِكُ لَهُمْ ضَرًّا وَلَا نَفْعًا
भला इनको इतनी भी न सूझी कि ये बछड़ा न तो उन लोगों को पलट कर उन की बात का जवाब ही देता है और न उनका ज़रर ही उस के हाथ में है और न नफ़ा
90وَلَقَدْ قَالَ لَهُمْ هَارُونُ مِن قَبْلُ يَا قَوْمِ إِنَّمَا فُتِنتُم بِهِ ۖ وَإِنَّ رَبَّكُمُ الرَّحْمَٰنُ فَاتَّبِعُونِي وَأَطِيعُوا أَمْرِي
और हारून ने उनसे पहले कहा भी था कि ऐ मेरी क़ौम तुम्हारा सिर्फ़ इसके ज़रिये से इम्तिहान किया जा रहा है और इसमें शक नहीं कि तम्हारा परवरदिगार (बस खुदाए रहमान है) तो तुम मेरी पैरवी करो और मेरा कहा मानो
91قَالُوا لَن نَّبْرَحَ عَلَيْهِ عَاكِفِينَ حَتَّىٰ يَرْجِعَ إِلَيْنَا مُوسَىٰ
तो वह लोग कहने लगे जब तक मूसा हमारे पास पलट कर न आएँ हम तो बराबर इसकी परसतिश पर डटे बैठे रहेंगे
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अनुवाद — ताहा 89

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Tuesday, August 18, 2026

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