अल-अंबिया · 1/112
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अंबिया
اقْتَرَبَ لِلنَّاسِ حِسَابُهُمْ وَهُمْ فِي غَفْلَةٍ مُّعْرِضُونَ ۝١
Iqtaraba linnaasi hisaa buhum wa hum fee ghaflatim mu`ridoon
📖 हिंदी अर्थ
लोगों के पास उनका हिसाब (उसका वक्त) अा पहुँचा और वह है कि गफ़लत में पड़े मुँह मोड़े ही जाते हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abdurrahman As-Sudais ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اقْتَرَبَ: बहुत करीब आ गया।
  • حِسَابُهُمْ: उनका हिसाब (लेखा-जोखा)।
  • غَفْلَةٍ: लापरवाही, बेखबरी।
  • مُعْرِضُونَ: मुँह मोड़ने वाले, टालने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत मानवता के लिए एक गंभीर चेतावनी और जागृति का संदेश है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि लोगों के हिसाब का समय अत्यंत निकट आ चुका है। यानी क़यामत का दिन, जब हर व्यक्ति से उसके अमल का पूरा हिसाब लिया जाएगा, वह बहुत करीब है। यह कोई दूर की बात नहीं, बल्कि हर लम्हा वह घड़ी और नज़दीक आती जा रही है।

इसके बावजूद, ये लोग (विशेषकर काफ़िर और मुन्किर) अपनी ग़फ़लत में डूबे हुए हैं। वे इस अहम हक़ीक़त से बेखबर हैं और अपनी दुनियावी मशग़लियों, ख्वाहिशों और लज़्ज़तों में इतने खोए हुए हैं कि उन्हें आख़िरत की कोई फ़िक्र ही नहीं। वे न सिर्फ़ ग़ाफ़िल हैं, बल्कि हर नसीहत और हर चेतावनी से मुँह मोड़ रहे हैं। जब उन्हें सच्चाई बताई जाती है, तो वे उसे सुनने से इनकार कर देते हैं और अपनी ही धुन में मस्त रहते हैं।

यह आयत उन लोगों के लिए एक सख़्त तनबीह (चेतावनी) है जो क़यामत और हिसाब को मानने से इनकार करते हैं। हालाँकि यह ख़िताब उस वक़्त क़ुरैश के काफ़िरों से था, लेकिन इसका पैग़ाम हर ज़माने के इंसान के लिए है। यह हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम भी उन्हीं लोगों में से हैं जो आने वाले हिसाब से बेखबर अपनी ज़िंदगी गुज़ार रहे हैं?

दावती पहलू (नसीहत):

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें ज़िंदगी का असली मक़सद याद दिलाती है। हम सिर्फ़ खाने, पीने और दुनियावी चीज़ों के लिए नहीं बनाए गए। हमारा असली काम उस मालिक की इबादत करना है जिसने हमें पैदा किया, और उस दिन के लिए तैयारी करना है जब हमें अपने हर अमल का हिसाब देना होगा। यह दुनिया एक मंज़िल है, एक इम्तिहान की जगह है। जो लोग इस इम्तिहान को भूल जाते हैं और सिर्फ़ दुनिया की चकाचौंध में खो जाते हैं, वे सबसे बड़ा नुक़सान उठाते हैं।

अल्लाह तआला ने हमें रहमत और मेहरबानी से यह चेतावनी दी है ताकि हम सुधर जाएँ। आइए हम अपनी ग़फ़लत को दूर करें, अपने अमल की इस्लाह करें, और उस दिन की तैयारी करें जब कोई दौलत, कोई रिश्ता या कोई ओहदा काम नहीं आएगा, बल्कि सिर्फ़ हमारे नेक अमल और अल्लाह की रहमत ही काम आएगी। यही हमारी कामयाबी है, और यही हमारी नजात का ज़रिया है। अल्लाह हम सबको अमल की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 1-3 — सूरा अल-अंबिया

1اقْتَرَبَ لِلنَّاسِ حِسَابُهُمْ وَهُمْ فِي غَفْلَةٍ مُّعْرِضُونَ
लोगों के पास उनका हिसाब (उसका वक्त) अा पहुँचा और वह है कि गफ़लत में पड़े मुँह मोड़े ही जाते हैं
2مَا يَأْتِيهِم مِّن ذِكْرٍ مِّن رَّبِّهِم مُّحْدَثٍ إِلَّا اسْتَمَعُوهُ وَهُمْ يَلْعَبُونَ
जब उनके परवरदिगार की तरफ से उनके पास कोई नया हुक्म आता है तो उसे सिर्फ कान लगाकर सुन लेते हैं और (फिर उसका) हँसी खेल उड़ाते हैं
3لَاهِيَةً قُلُوبُهُمْ ۗ وَأَسَرُّوا النَّجْوَى الَّذِينَ ظَلَمُوا هَلْ هَٰذَا إِلَّا بَشَرٌ مِّثْلُكُمْ ۖ أَفَتَأْتُونَ السِّحْرَ وَأَنتُمْ تُبْصِرُونَ
उनके दिल (आख़िरत के ख्याल से) बिल्कुल बेख़बर हैं और ये ज़ालिम चुपके-चुपके कानाफूसी किया करते हैं कि ये शख्स (मोहम्मद कुछ भी नहीं) बस तुम्हारे ही सा आदमी है तो क्या तुम दीन व दानिस्ता जादू में फँसते हो
अल-अंबियाकुरान सूची
112आयत
मक्कीअवतरण स्थान
1आयत

अनुवाद — अल-अंबिया 1

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Saturday, October 3, 2026

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