अल-अंबिया · 111/112
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अंबिया
وَإِنْ أَدْرِي لَعَلَّهُ فِتْنَةٌ لَّكُمْ وَمَتَاعٌ إِلَىٰ حِينٍ ۝١١١
Wa in adree la`allahoo fitnatul lakum wa mataa`un ilaaheen
📖 हिंदी अर्थ
और मैं ये भी नहीं जानता कि शायद ये (ताख़ीरे अज़ाब तुम्हारे) वास्ते इम्तिहान हो और एक मुअय्युन मुद्दत तक (तुम्हारे लिए) चैन हो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَإِنْ أَدْرِي: मैं नहीं जानता।
  • فِتْنَةٌ: परीक्षा, आज़माइश।
  • مَتَاعٌ: सांसारिक सुख-सुविधाएँ, लाभ उठाना।
  • إِلَى حِينٍ: एक निश्चित समय तक, अवधि के अंत तक।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को सिखा रहे हैं कि वे काफ़िरों से कहें: "मैं नहीं जानता कि जिस अज़ाब (यातना) की तुम जल्दी माँग कर रहे हो, उसका टलना और देर होना शायद तुम्हारे लिए एक परीक्षा है।" यानी, अल्लाह तआला तुम्हें मोहलत दे रहा है, ताकि देखा जाए कि तुम इस दौरान क्या करते हो — क्या तुम अपनी ज़िद और कुफ़्र पर क़ायम रहते हो या सुधर जाते हो। यह देरी तुम्हारे लिए एक इम्तिहान है, और साथ ही यह दुनिया का अस्थायी सुख-सामान है, जो तुम्हें एक निश्चित अवधि तक दिया गया है। जब वह अवधि पूरी होगी, तो अल्लाह का फ़ैसला आ जाएगा, और तुम्हें अपने कर्मों का पूरा बदला मिलेगा।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की ओर से मिलने वाली मोहलत (ढील) कभी-कभी उसकी रहमत होती है, और कभी वह सिर्फ़ एक इम्तिहान होता है। इंसान को चाहिए कि वह इस मोहलत को ग़नीमत समझे और अपनी ज़िंदगी को सुधार ले, क्योंकि अल्लाह का अज़ाब आने के बाद कोई पलटाव नहीं होता। यह आयत हमें यह भी बताती है कि दुनिया की चंद रोज़ा ज़िंदगी और उसके सुख-आराम किसी काम के नहीं, अगर इंसान अपने रब से ग़ाफ़िल रहे। अल्लाह तआला अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है — वह जल्दी सज़ा नहीं देता, ताकि बंदे तौबा कर लें और अपनी ग़लतियों से बाज़ आ जाएँ। इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह की इस मोहलत को अपने लिए बेहतरी का मौक़ा बनाएँ, न कि और ज़्यादा ग़लतियाँ करने का बहाना।



📜 आयत 109-112 — सूरा अल-अंबिया

109فَإِن تَوَلَّوْا فَقُلْ آذَنتُكُمْ عَلَىٰ سَوَاءٍ ۖ وَإِنْ أَدْرِي أَقَرِيبٌ أَم بَعِيدٌ مَّا تُوعَدُونَ
फिर अगर ये लोग (उस पर भी) मुँह फेरें तो तुम कह दो कि मैंने तुम सबको यकसाँ ख़बर कर दी है और मैं नहीं जानता कि जिस (अज़ाब) का तुमसे वायदा किया गया है क़रीब आ पहुँचा या (अभी) दूर है
110إِنَّهُ يَعْلَمُ الْجَهْرَ مِنَ الْقَوْلِ وَيَعْلَمُ مَا تَكْتُمُونَ
इसमें शक नहीं कि वह उस बात को भी जानता है जो पुकार कर कही जाती है और जिसे तुम लोग छिपाते हो उससे भी खूब वाक़िफ है
111وَإِنْ أَدْرِي لَعَلَّهُ فِتْنَةٌ لَّكُمْ وَمَتَاعٌ إِلَىٰ حِينٍ
और मैं ये भी नहीं जानता कि शायद ये (ताख़ीरे अज़ाब तुम्हारे) वास्ते इम्तिहान हो और एक मुअय्युन मुद्दत तक (तुम्हारे लिए) चैन हो
112قَالَ رَبِّ احْكُم بِالْحَقِّ ۗ وَرَبُّنَا الرَّحْمَٰنُ الْمُسْتَعَانُ عَلَىٰ مَا تَصِفُونَ
(आख़िर) रसूल ने दुआ की ऐ मेरे पालने वाले तू ठीक-ठीक मेरे और काफिरों के दरमियान फैसला कर दे और हमार परवरदिगार बड़ा मेहरबान है कि उसी से इन बातों में मदद माँगी जाती है जो तुम लोग बयान करते हो
अल-अंबियाकुरान सूची
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111आयत

अनुवाद — अल-अंबिया 111

सूरा अल-अंबिया आयत 111 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और मैं ये भी नहीं जानता कि शायद ये (ताख़ीरे…

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Saturday, October 3, 2026

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