अल-अंबिया · 110/112
अनुवाद उच्चारण — अल-अंबिया
إِنَّهُ يَعْلَمُ الْجَهْرَ مِنَ الْقَوْلِ وَيَعْلَمُ مَا تَكْتُمُونَ ۝١١٠
Innahoo ya`lamul jahra minal qawli wa ya`lamu maa taktumoon
📖 हिंदी अर्थ
इसमें शक नहीं कि वह उस बात को भी जानता है जो पुकार कर कही जाती है और जिसे तुम लोग छिपाते हो उससे भी खूब वाक़िफ है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • अल-जहर (الجهر): खुला, प्रकट, जो बोलकर सुना दिया जाए।
  • मिन अल-क़ौल (من القول): बातचीत में से, वाणी का वह हिस्सा जो ज़ाहिर किया जाए।
  • मा तकतुमून (ما تكتمون): जो तुम छिपाते हो, वह बात जो दिल में रखते हो या आहिस्ता से कहते हो।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में अपने इल्म की हदों को बयान कर रहा है कि उसका ज्ञान हर चीज़ को घेरे हुए है। वह उन बातों को जानता है जो तुम ज़ोर से बोलते हो, चाहे वह अच्छी हों या बुरी, और वह उन बातों को भी जानता है जिन्हें तुम अपने दिलों में छिपाते हो या चुपके-चुपके कहते हो। उसके इल्म से कोई भी बात, छोटी हो या बड़ी, प्रकट हो या गुप्त, छिपी नहीं है।

यह आयत एक तरफ़ जहाँ अल्लाह के इल्म की हर जगह व्याप्तता की याद दिलाती है, वहीं दूसरी तरफ़ उन लोगों के लिए एक सख़्त चेतावनी है जो यह समझते हैं कि उनके छिपे हुए काम, उनकी बुरी नीयतें और उनके दिल की बातें किसी को मालूम नहीं। उन्हें यक़ीन रखना चाहिए कि अल्लाह की नज़र में सब कुछ साफ़ है, और जिस दिन हिसाब होगा, उस दिन हर छिपी बात सामने आ जाएगी।

अल्लाह तआला अपने बंदों को इस आयत के ज़रिए यह सिखाना चाहता है कि वह हर पल हमारे साथ है, हमारी हर साँस से वाक़िफ़ है। जब हमें यह एहसास हो जाए कि अल्लाह सब कुछ देख और सुन रहा है, तो हमारे अंदर एक स्वाभाविक संयम पैदा होता है। हम अपनी ज़ुबान पर क़ाबू रखते हैं, अपने दिल को साफ़ रखते हैं, और जो कुछ भी करते हैं, उसमें अल्लाह की रज़ा का ख़याल रखते हैं।

यही वह नुक़्ता है जो एक मुसलमान को दूसरों से अलग करता है — वह जानता है कि उसका रब उसके दिल की गहराइयों तक देखता है। इसलिए वह अकेले में भी वही करता है जो अल्लाह को पसंद है, और ज़ाहिर में भी वही बोलता है जो सच और भला हो। जो लोग इस हक़ीक़त को भूल जाते हैं, वे दुनिया में भले ही अपनी चालाकी से बच निकलें, लेकिन अल्लाह के सामने उनकी हर छिपी बात खुल जाएगी, और वह उन्हें उनके कर्मों का पूरा बदला देगा।

इस आयत में मोमिनों के लिए एक बड़ी ख़ुशख़बरी भी है — जो लोग अल्लाह के डर से अपनी ज़ुबान और दिल को पाक रखते हैं, उनके लिए अल्लाह की रहमत और मग़फ़िरत है। वह उनके छिपे हुए नेक कामों को भी जानता है और उन्हें उसका अज्र देगा। अल्लाह का इल्म सिर्फ़ सज़ा के लिए नहीं, बल्कि इनाम के लिए भी है — वह हर अच्छी नीयत, हर छोटे नेक काम को देखता है और उसकी क़द्र करता है।

तो इस आयत से हमें सबक़ लेना चाहिए कि हम अपनी ज़ुबान को झूठ, ग़ीबत और बुराई से बचाएँ, और अपने दिल को कपट, ईर्ष्या और बुरे ख़यालात से साफ़ रखें। क्योंकि अल्लाह तो सब सुनता और जानता है — हमारा रब हमसे हमारी रग-ए-जाँ से भी ज़्यादा क़रीब है।

🎧 सुनें

📜 आयत 108-112 — अल-अंबिया

108قُلْ إِنَّمَا يُوحَىٰ إِلَيَّ أَنَّمَا إِلَٰهُكُمْ إِلَٰهٌ وَاحِدٌ ۖ فَهَلْ أَنتُم مُّسْلِمُونَ
तुम कह दो कि मेरे पास तो बस यही ''वही'' आई है कि तुम लोगों का माबूद बस यकता खुदा है तो क्या तुम (उसके) फरमाबरदार बन्दे बनते हो
109فَإِن تَوَلَّوْا فَقُلْ آذَنتُكُمْ عَلَىٰ سَوَاءٍ ۖ وَإِنْ أَدْرِي أَقَرِيبٌ أَم بَعِيدٌ مَّا تُوعَدُونَ
फिर अगर ये लोग (उस पर भी) मुँह फेरें तो तुम कह दो कि मैंने तुम सबको यकसाँ ख़बर कर दी है और मैं नहीं जानता कि जिस (अज़ाब) का तुमसे वायदा किया गया है क़रीब आ पहुँचा या (अभी) दूर है
110إِنَّهُ يَعْلَمُ الْجَهْرَ مِنَ الْقَوْلِ وَيَعْلَمُ مَا تَكْتُمُونَ
इसमें शक नहीं कि वह उस बात को भी जानता है जो पुकार कर कही जाती है और जिसे तुम लोग छिपाते हो उससे भी खूब वाक़िफ है
111وَإِنْ أَدْرِي لَعَلَّهُ فِتْنَةٌ لَّكُمْ وَمَتَاعٌ إِلَىٰ حِينٍ
और मैं ये भी नहीं जानता कि शायद ये (ताख़ीरे अज़ाब तुम्हारे) वास्ते इम्तिहान हो और एक मुअय्युन मुद्दत तक (तुम्हारे लिए) चैन हो
112قَالَ رَبِّ احْكُم بِالْحَقِّ ۗ وَرَبُّنَا الرَّحْمَٰنُ الْمُسْتَعَانُ عَلَىٰ مَا تَصِفُونَ
(आख़िर) रसूल ने दुआ की ऐ मेरे पालने वाले तू ठीक-ठीक मेरे और काफिरों के दरमियान फैसला कर दे और हमार परवरदिगार बड़ा मेहरबान है कि उसी से इन बातों में मदद माँगी जाती है जो तुम लोग बयान करते हो
अल-अंबियाकुरान सूची
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110आयत

अनुवाद — अल-अंबिया 110

सूरा अल-अंबिया आयत 110 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : इसमें शक नहीं कि वह उस बात को भी जानता…

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Tuesday, August 18, 2026

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