अल-अंबिया · 23/112
अनुवाद उच्चारण — अल-अंबिया
لَا يُسْأَلُ عَمَّا يَفْعَلُ وَهُمْ يُسْأَلُونَ ۝٢٣
Laa yus`alu `ammaa yaf`alu wa hum yus`aloon
📖 हिंदी अर्थ
जो कुछ वह करता है उसकी पूछगछ नहीं हो सकती
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لَا يُسْأَلُ – नहीं पूछा जाता
  • عَمَّا يَفْعَلُ – उस काम के बारे में जो वह करता है
  • وَهُمْ يُسْأَلُونَ – और वे (सब) पूछे जाएँगे

तफ़सीर:

अल्लाह तआला अपनी महानता, अपने इल्म और अपनी हिकमत में अकेला है। वह जो कुछ भी करता है, उस पर किसी का कोई सवाल नहीं उठता, न कोई उसे रोक सकता है और न उसके फ़ैसले पर कोई आपत्ति कर सकता है। क्योंकि वही सृष्टि का स्वामी है, वही पालनहार है, और उसका हर काम हिकमत, अदल और भलाई पर आधारित है। वह जो चाहता है, अपने मुल्क में करता है, और उसका हर फ़ैसला ठीक और सही होता है। उससे उसके कामों के बारे में पूछताछ नहीं हो सकती, क्योंकि वह सबसे ऊपर है, सबसे बुद्धिमान है, और उसकी मर्ज़ी ही सर्वोच्च है।

लेकिन उसके सभी बंदे—चाहे वे इंसान हों, फ़रिश्ते हों या जिन्न—हर एक से उसके कर्मों के बारे में पूछा जाएगा। क़ियामत के दिन हर आत्मा से उसके अमल का हिसाब लिया जाएगा। उनसे पूछा जाएगा कि उन्होंने अपनी ज़िंदगी कैसे बिताई, अपने अंगों का इस्तेमाल किस तरह किया, और अल्लाह की दी हुई नेमतों का शुक्र कैसे अदा किया। यह अल्लाह का पूरा इंसाफ़ है कि वह अपने बंदों से उनके कामों का हिसाब लेगा, क्योंकि वे कमज़ोर हैं, उनमें ख़ता और भूल की गुंजाइश है, और उनके कामों में अक्सर कमियाँ और ख़राबियाँ होती हैं।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की कुदरत और उसके फ़ैसलों पर पूरा भरोसा रखें। जब हमें कोई बात समझ न आए, कोई मुसीबत आए, या कोई तक़दीर का फ़ैसला हमारी समझ से परे लगे, तो हमें याद रखना चाहिए कि अल्लाह जो करता है, उसमें हिकमत होती है। हमें उस पर सवाल नहीं उठाना चाहिए, बल्कि सब्र और रज़ा (संतोष) के साथ उसे क़बूल करना चाहिए। और साथ ही, यह भी याद रखें कि हमें अपने हर काम का हिसाब देना है, इसलिए अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक बनाएँ, उसकी इबादत करें, और उसके बताए रास्ते पर चलें। यही हमारी कामयाबी है, और यही हमारी नजात का ज़रिया है।

🎧 सुनें

📜 आयत 21-25 — अल-अंबिया

21أَمِ اتَّخَذُوا آلِهَةً مِّنَ الْأَرْضِ هُمْ يُنشِرُونَ
उन लोगों जो माबूद ज़मीन में बना रखे हैं क्या वही (लोगों को) ज़िन्दा करेंगे
22لَوْ كَانَ فِيهِمَا آلِهَةٌ إِلَّا اللَّهُ لَفَسَدَتَا ۚ فَسُبْحَانَ اللَّهِ رَبِّ الْعَرْشِ عَمَّا يَصِفُونَ
अगर बफ़रने मुहाल) ज़मीन व आसमान में खुदा कि सिवा चन्द माबूद होते तो दोनों कब के बरबाद हो गए होते तो जो बातें ये लोग अपने जी से (उसके बारे में) बनाया करते हैं खुदा जो अर्श का मालिक है उन तमाम ऐबों से पाक व पाकीज़ा है
23لَا يُسْأَلُ عَمَّا يَفْعَلُ وَهُمْ يُسْأَلُونَ
जो कुछ वह करता है उसकी पूछगछ नहीं हो सकती
24أَمِ اتَّخَذُوا مِن دُونِهِ آلِهَةً ۖ قُلْ هَاتُوا بُرْهَانَكُمْ ۖ هَٰذَا ذِكْرُ مَن مَّعِيَ وَذِكْرُ مَن قَبْلِي ۗ بَلْ أَكْثَرُهُمْ لَا يَعْلَمُونَ الْحَقَّ ۖ فَهُم مُّعْرِضُونَ
(हाँ) और उन लोगों से बाज़पुर्स होगी क्या उन लोगों ने खुदा को छोड़कर कुछ और माबूद बना रखे हैं (ऐ रसूल) तुम कहो कि भला अपनी दलील तो पेश करो जो मेरे (ज़माने में) साथ है उनकी किताब (कुरान) और जो लोग मुझ से पहले थे उनकी किताबें (तौरेत वग़ैरह) ये (मौजूद) हैं (उनमें खुदा का शरीक बता दो) बल्कि उनमें से अक्सर तो हक़ (बात) को तो जानते ही नहीं
25وَمَا أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ مِن رَّسُولٍ إِلَّا نُوحِي إِلَيْهِ أَنَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنَا فَاعْبُدُونِ
तो (जब हक़ का ज़िक्र आता है) ये लोग मुँह फेर लेते हैं और (ऐ रसूल) हमने तुमसे पहले जब कभी कोई रसूल भेजा तो उसके पास ''वही'' भेजते रहे कि बस हमारे सिवा कोई माबूद क़ाबिले परसतिश नहीं तो मेरी इबादत किया करो
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अनुवाद — अल-अंबिया 23

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Tuesday, August 18, 2026

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