अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَطَرَهُنَّ: उन्हें (आसमानों और ज़मीन को) बिना किसी पूर्व नमूने के पैदा किया।
- الشَّاهِدِينَ: गवाही देने वालों में से।
तफ़सीर (व्याख्या):
हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम को जवाब देते हुए फ़रमाया: "मैं मज़ाक़ नहीं कर रहा हूँ, बल्कि मैं पूरी गंभीरता से सच्चाई पेश कर रहा हूँ। तुम्हारा असली रब (पालनहार) वही है जो आसमानों और ज़मीन का रब है, जिसने इन सबको बिना किसी सानी (मिसाल) के पैदा किया। वही इनका ख़ालिक़, मालिक और मुदब्बिर है। और मैं इस बात पर गवाही देने वालों में से हूँ कि उसी की इबादत करना हक़ है, और तुम्हारे ये बुत (मूर्तियाँ) जिन्हें तुम पूजते हो, इन सब चीज़ों को पैदा करने की कोई हैसियत नहीं रखते।"
यहाँ अल्लाह तआला ने मूर्तियों को ऐसे ज़िक्र किया है जैसे वे समझ रही हों, ताकि लोगों पर यह बात साफ़ हो जाए कि जब ये मूर्तियाँ ख़ुद मख़लूक़ हैं और इनमें कोई शक्ति नहीं, तो फिर इनकी पूजा कैसे जायज़ हो सकती है? क्या यह अक़्लमंदी की बात है कि इंसान ख़ालिक़ (रचने वाले) को छोड़कर मख़लूक़ (रचे हुए) की इबादत करे?
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि तौहीद (एकेश्वरवाद) ही असली दीन है। हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम के सामने बड़ी हिम्मत और साफ़गोई से हक़ बयान किया, चाहे उन्हें अकेले ही क्यों न खड़ा होना पड़ा हो। आज भी हमें चाहिए कि हम अपने जीवन में अल्लाह की इबादत को सबसे ऊपर रखें, उसी से मदद माँगें और उसी के आगे सिर झुकाएँ। जो इंसान अल्लाह की तौहीद पर क़ायम रहता है, अल्लाह उसे दुनिया और आख़िरत में इज़्ज़त देता है। हमें चाहिए कि हम अपने अंदर यह यक़ीन पैदा करें कि अल्लाह ही हमारा रब है, उसी ने हमें पैदा किया, और उसी की इबादत में ही हमारी कामयाबी है।
📜 आयत 54-58 — अल-अंबिया
अनुवाद — अल-अंबिया 56
सूरा अल-अंबिया आयत 56 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : इबराहीम ने कहा मज़ाक नहीं ठीक कहता हूँ कि तुम्हारे…सूरा आयत 56/112 — अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंबिया सुनें, अल-अंबिया अनुवाद, अल-अंबिया mp3, अल-अंबिया pdf. आयत 54–58. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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