अल-अंबिया · 56/112
अनुवाद उच्चारण — अल-अंबिया
قَالَ بَل رَّبُّكُمْ رَبُّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ الَّذِي فَطَرَهُنَّ وَأَنَا عَلَىٰ ذَٰلِكُم مِّنَ الشَّاهِدِينَ ۝٥٦
Qaala bar Rabbukum Rabbus samaawaati wal ardil lazee fatarahunna wa ana `alaa zaalikum minash shaahideen
📖 हिंदी अर्थ
इबराहीम ने कहा मज़ाक नहीं ठीक कहता हूँ कि तुम्हारे माबूद व बुत नहीं बल्कि तुम्हारा परवरदिगार आसमान व ज़मीन का मालिक है जिसने उनको पैदा किया और मैं खुद इस बात का तुम्हारे सामने गवाह हूँ
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَطَرَهُنَّ: उन्हें (आसमानों और ज़मीन को) बिना किसी पूर्व नमूने के पैदा किया।
  • الشَّاهِدِينَ: गवाही देने वालों में से।

तफ़सीर (व्याख्या):

हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम को जवाब देते हुए फ़रमाया: "मैं मज़ाक़ नहीं कर रहा हूँ, बल्कि मैं पूरी गंभीरता से सच्चाई पेश कर रहा हूँ। तुम्हारा असली रब (पालनहार) वही है जो आसमानों और ज़मीन का रब है, जिसने इन सबको बिना किसी सानी (मिसाल) के पैदा किया। वही इनका ख़ालिक़, मालिक और मुदब्बिर है। और मैं इस बात पर गवाही देने वालों में से हूँ कि उसी की इबादत करना हक़ है, और तुम्हारे ये बुत (मूर्तियाँ) जिन्हें तुम पूजते हो, इन सब चीज़ों को पैदा करने की कोई हैसियत नहीं रखते।"

यहाँ अल्लाह तआला ने मूर्तियों को ऐसे ज़िक्र किया है जैसे वे समझ रही हों, ताकि लोगों पर यह बात साफ़ हो जाए कि जब ये मूर्तियाँ ख़ुद मख़लूक़ हैं और इनमें कोई शक्ति नहीं, तो फिर इनकी पूजा कैसे जायज़ हो सकती है? क्या यह अक़्लमंदी की बात है कि इंसान ख़ालिक़ (रचने वाले) को छोड़कर मख़लूक़ (रचे हुए) की इबादत करे?

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि तौहीद (एकेश्वरवाद) ही असली दीन है। हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम के सामने बड़ी हिम्मत और साफ़गोई से हक़ बयान किया, चाहे उन्हें अकेले ही क्यों न खड़ा होना पड़ा हो। आज भी हमें चाहिए कि हम अपने जीवन में अल्लाह की इबादत को सबसे ऊपर रखें, उसी से मदद माँगें और उसी के आगे सिर झुकाएँ। जो इंसान अल्लाह की तौहीद पर क़ायम रहता है, अल्लाह उसे दुनिया और आख़िरत में इज़्ज़त देता है। हमें चाहिए कि हम अपने अंदर यह यक़ीन पैदा करें कि अल्लाह ही हमारा रब है, उसी ने हमें पैदा किया, और उसी की इबादत में ही हमारी कामयाबी है।

🎧 सुनें

📜 आयत 54-58 — अल-अंबिया

54قَالَ لَقَدْ كُنتُمْ أَنتُمْ وَآبَاؤُكُمْ فِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
इबराहीम ने कहा यक़ीनन तुम भी और तुम्हारे बुर्जुग़ भी खुली हुईगुमराही में पड़े हुए थे
55قَالُوا أَجِئْتَنَا بِالْحَقِّ أَمْ أَنتَ مِنَ اللَّاعِبِينَ
वह लोग कहने लगे तो क्या तुम हमारे पास हक़ बात लेकर आए हो या तुम भी (यूँ ही) दिल्लगी करते हो
56قَالَ بَل رَّبُّكُمْ رَبُّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ الَّذِي فَطَرَهُنَّ وَأَنَا عَلَىٰ ذَٰلِكُم مِّنَ الشَّاهِدِينَ
इबराहीम ने कहा मज़ाक नहीं ठीक कहता हूँ कि तुम्हारे माबूद व बुत नहीं बल्कि तुम्हारा परवरदिगार आसमान व ज़मीन का मालिक है जिसने उनको पैदा किया और मैं खुद इस बात का तुम्हारे सामने गवाह हूँ
57وَتَاللَّهِ لَأَكِيدَنَّ أَصْنَامَكُم بَعْدَ أَن تُوَلُّوا مُدْبِرِينَ
और अपने जी में कहा खुदा की क़सम तुम्हारे पीठ फेरने के बाद में तुम्हारे बुतों के साथ एक चाल चलूँगा
58فَجَعَلَهُمْ جُذَاذًا إِلَّا كَبِيرًا لَّهُمْ لَعَلَّهُمْ إِلَيْهِ يَرْجِعُونَ
चुनान्चे इबराहीम ने उन बुतों को (तोड़कर) चकनाचूर कर डाला मगर उनके बड़े बुत को (इसलिए रहने दिया) ताकि ये लोग ईद से पलटकर उसकी तरफ रूजू करें
अल-अंबियाकुरान सूची
112आयत
मक्कीRevelation
56आयत

अनुवाद — अल-अंबिया 56

सूरा अल-अंबिया आयत 56 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : इबराहीम ने कहा मज़ाक नहीं ठीक कहता हूँ कि तुम्हारे…

सूरा आयत 56/112 — अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंबिया सुनें, अल-अंबिया अनुवाद, अल-अंबिया mp3, अल-अंबिया pdf. आयत 54–58. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए