अल-अंबिया · 90/112
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अंबिया
فَاسْتَجَبْنَا لَهُ وَوَهَبْنَا لَهُ يَحْيَىٰ وَأَصْلَحْنَا لَهُ زَوْجَهُ ۚ إِنَّهُمْ كَانُوا يُسَارِعُونَ فِي الْخَيْرَاتِ وَيَدْعُونَنَا رَغَبًا وَرَهَبًا ۖ وَكَانُوا لَنَا خَاشِعِينَ ۝٩٠
Fastajabnaa lahoo wa wahabnaa lahoo Yahyaa Wa aslahnaa lahoo zawjah; innahum kaanoo yusaari`oona fil khairaati wa yad`oonanaa raghabanw wa rahabaa; wa kaanoo lanaa khaashi`een
📖 हिंदी अर्थ
तो हमने उनकी दुआ सुन ली और उन्हें यहया सा बेटा अता किया और हमने उनके लिए उनकी बीबी को अच्छी बता दिया इसमें शक नहीं कि ये सब नेक कामों में जल्दी करते थे और हमको बड़ी रग़बत और ख़ौफ के साथ पुकारा करते थे और हमारे आगे गिड़गिड़ाया करते थे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • رَغَبًا: रजा (अल्लाह की दया) की उम्मीद रखते हुए, लालच से नहीं बल्कि चाहत से।
  • رَهَبًا: डर और खौफ के साथ (अल्लाह के अज़ाब से)।
  • خَاشِعِينَ: अल्लाह के सामने झुकने वाले, विनम्र और नम्र होने वाले।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने अपने नबी ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) की दुआ को क़बूल किया, जब उन्होंने बुढ़ापे में औलाद की दुआ मांगी थी। अल्लाह ने उन्हें यह्या (अलैहिस्सलाम) जैसा बेटा अता किया, जो पाकीज़ा और नेक इंसान था। साथ ही, अल्लाह ने उनकी पत्नी को भी सुधार दिया—उसके अख़लाक़ (स्वभाव) को अच्छा किया और उसे औलाद पैदा करने की ताक़त दी, जबकि वह पहले बांझ (बच्चे पैदा न कर सकने वाली) थी। यह अल्लाह की क़ुदरत का नमूना है कि वह जब चाहता है, नामुमकिन को मुमकिन बना देता है।

फिर अल्लाह तआला ने ज़करिय्या, उनकी पत्नी और उनके बेटे यह्या (अलैहिमुस्सलाम) की तारीफ़ में फ़रमाया कि ये लोग नेकियों में जल्दी करते थे, यानी हर अच्छे काम को बिना देर किए करते थे। वे अल्लाह से दुआ करते थे—कभी उसकी रहमत की उम्मीद में (रग़ब) और कभी उसके अज़ाब के डर से (रहब)। यानी उनका दिल उम्मीद और खौफ के बीच रहता था, जो मोमिन की सबसे अच्छी हालत है। और वे अल्लाह के सामने पूरी तरह झुके हुए, विनम्र और नम्र रहते थे। उनका दिल अल्लाह की याद में धड़कता था और वे उसकी इबादत में पूरी तरह मशगूल रहते थे।

दावत और नसीहत:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह से दुआ करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि हम उससे उम्मीद (रग़ब) और डर (रहब) दोनों के साथ मांगें—उम्मीद कि वह हमारी दुआ क़बूल करेगा, और डर कि हम उसके अज़ाब से बचें। साथ ही, हमें नेक कामों में जल्दी करनी चाहिए, कल पर टालना नहीं चाहिए। जो लोग अल्लाह के सामने झुकते हैं और उसकी इबादत में विनम्र रहते हैं, अल्लाह उन्हें कभी निराश नहीं करता। ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) की दुआ क़बूल हुई, इसलिए हमें भी चाहिए कि अपनी दुआओं में सब्र और भरोसा रखें, क्योंकि अल्लाह हर दुआ का बेहतरीन वक़्त पर जवाब देता है। यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह के प्यारे बंदे वे हैं जो नेकी में सबसे आगे रहते हैं, और उनकी ज़िंदगी का हर पल अल्लाह की रज़ा के लिए होता है।



📜 आयत 88-92 — सूरा अल-अंबिया

88فَاسْتَجَبْنَا لَهُ وَنَجَّيْنَاهُ مِنَ الْغَمِّ ۚ وَكَذَٰلِكَ نُنجِي الْمُؤْمِنِينَ
तो हमने उनकी दुआ कुबूल की और उन्हें रंज से नजात दी और हम तो ईमानवालों को यूँ ही नजात दिया करते हैं
89وَزَكَرِيَّا إِذْ نَادَىٰ رَبَّهُ رَبِّ لَا تَذَرْنِي فَرْدًا وَأَنتَ خَيْرُ الْوَارِثِينَ
और ज़करिया (को याद करो) जब उन्होंने (मायूस की हालत में) अपने परवरदिगार से दुआ की ऐ मेरे पालने वाले मुझे तन्हा (बे औलाद) न छोड़ और तू तो सब वारिसों से बेहतर है
90فَاسْتَجَبْنَا لَهُ وَوَهَبْنَا لَهُ يَحْيَىٰ وَأَصْلَحْنَا لَهُ زَوْجَهُ ۚ إِنَّهُمْ كَانُوا يُسَارِعُونَ فِي الْخَيْرَاتِ وَيَدْعُونَنَا رَغَبًا وَرَهَبًا ۖ وَكَانُوا لَنَا خَاشِعِينَ
तो हमने उनकी दुआ सुन ली और उन्हें यहया सा बेटा अता किया और हमने उनके लिए उनकी बीबी को अच्छी बता दिया इसमें शक नहीं कि ये सब नेक कामों में जल्दी करते थे और हमको बड़ी रग़बत और ख़ौफ के साथ पुकारा करते थे और हमारे आगे गिड़गिड़ाया करते थे
91وَالَّتِي أَحْصَنَتْ فَرْجَهَا فَنَفَخْنَا فِيهَا مِن رُّوحِنَا وَجَعَلْنَاهَا وَابْنَهَا آيَةً لِّلْعَالَمِينَ
और (ऐ रसूल) उस बीबी को (याद करो) जिसने अपनी अज़मत की हिफाज़त की तो हमने उन (के पेट) में अपनी तरफ से रूह फूँक दी और उनको और उनके बेटे (ईसा) को सारे जहाँन के वास्ते (अपनी क़ुदरत की) निशानी बनाया
92إِنَّ هَٰذِهِ أُمَّتُكُمْ أُمَّةً وَاحِدَةً وَأَنَا رَبُّكُمْ فَاعْبُدُونِ
बेशक ये तुम्हारा दीन (इस्लाम) एक ही दीन है और मैं तुम्हारा परवरदिगार हूँ तो मेरी ही इबादत करो
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अनुवाद — अल-अंबिया 90

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Saturday, October 3, 2026

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