अल-अंबिया · 93/112
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अंबिया
وَتَقَطَّعُوا أَمْرَهُم بَيْنَهُمْ ۖ كُلٌّ إِلَيْنَا رَاجِعُونَ ۝٩٣
Wa taqatta`ooo amrahum bainahum kullun ilainaaa raaji`oon
📖 हिंदी अर्थ
और लोगों ने बाहम (इख़तेलाफ़ करके) अपने दीन को टुकड़े -टुकड़े कर डाला (हालाँकि) वह सब के सब हिरफिर के हमारे ही पास आने वाले हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • تَقَطَّعُوا – टुकड़े-टुकड़े कर डाला, विभाजित कर लिया
  • أَمْرَهُم – अपना धर्म, अपना मामला
  • بَيْنَهُمْ – आपस में
  • رَاجِعُونَ – लौटने वाले, पलटकर आने वाले

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला ने उन लोगों की स्थिति बयान की है जिन्होंने अपने नबियों के आने के बाद भी सीधे रास्ते पर न चलकर अपने धर्म को टुकड़ों में बाँट लिया। यानी जब अल्लाह के रसूल उनके पास सत्य और एकता का संदेश लेकर आए, तो उन्होंने उसे स्वीकार करने के बजाय आपस में मतभेद पैदा कर लिए और अलग-अलग गुटों, फिरकों और संप्रदायों में बँट गए। कोई मूर्तिपूजक बन गया, कोई अपनी इच्छाओं को पूजने लगा, कोई काफ़िर हो गया और कोई मोमिन बना रहा। उन्होंने अल्लाह के दीन को एक रखने के बजाय उसे कई हिस्सों में विभाजित कर दिया।

यह आयत उन सभी लोगों के लिए एक गंभीर चेतावनी है जो आज भी इस्लाम के नाम पर फिरकों में बँटकर आपस में लड़ते हैं। अल्लाह ने हमें एक ही दीन दिया था, एक ही किताब दी थी और एक ही क़िबला दिया था, लेकिन हमने अपनी निजी राय, हठधर्मिता और सांसारिक स्वार्थों के कारण इस एकता को तोड़ दिया।

इसके बाद अल्लाह फ़रमाता है: "हर एक को हमारी ही ओर लौटना है।" यानी चाहे लोग कितने ही अलग-अलग गुटों में बँट जाएँ, चाहे वे कितनी ही अलग-अलग राहें अपना लें, अंत में सबको एक ही दिन एक ही जगह लौटकर आना है — अल्लाह के सामने। वहाँ न कोई सिफ़ारिश काम आएगी, न कोई गुट या फिरका बचा सकेगा। हर व्यक्ति से उसके अकेले के कर्मों का हिसाब लिया जाएगा। जिसने अच्छा किया उसे अच्छा बदला मिलेगा और जिसने बुरा किया उसे बुरा बदला।

यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपने धर्म में फूट डालने वाली बातों से बचना चाहिए। हमारा रास्ता वही है जो क़ुरआन और सुन्नत ने बताया है। हमें एक-दूसरे से प्रेम करना चाहिए, एक-दूसरे की भलाई चाहनी चाहिए और उस दिन की तैयारी करनी चाहिए जब हम सब अपने रब के सामने खड़े होंगे। याद रखिए, वह दिन बहुत करीब है — हर साँस हमें उस दिन के और नज़दीक ले जा रही है। आइए, हम अपने जीवन को इस तरह बनाएँ कि उस दिन हमारा हिसाब आसान हो और हम जन्नत की ओर ले जाने वाले रास्ते पर चलें।



📜 आयत 91-95 — सूरा अल-अंबिया

91وَالَّتِي أَحْصَنَتْ فَرْجَهَا فَنَفَخْنَا فِيهَا مِن رُّوحِنَا وَجَعَلْنَاهَا وَابْنَهَا آيَةً لِّلْعَالَمِينَ
और (ऐ रसूल) उस बीबी को (याद करो) जिसने अपनी अज़मत की हिफाज़त की तो हमने उन (के पेट) में अपनी तरफ से रूह फूँक दी और उनको और उनके बेटे (ईसा) को सारे जहाँन के वास्ते (अपनी क़ुदरत की) निशानी बनाया
92إِنَّ هَٰذِهِ أُمَّتُكُمْ أُمَّةً وَاحِدَةً وَأَنَا رَبُّكُمْ فَاعْبُدُونِ
बेशक ये तुम्हारा दीन (इस्लाम) एक ही दीन है और मैं तुम्हारा परवरदिगार हूँ तो मेरी ही इबादत करो
93وَتَقَطَّعُوا أَمْرَهُم بَيْنَهُمْ ۖ كُلٌّ إِلَيْنَا رَاجِعُونَ
और लोगों ने बाहम (इख़तेलाफ़ करके) अपने दीन को टुकड़े -टुकड़े कर डाला (हालाँकि) वह सब के सब हिरफिर के हमारे ही पास आने वाले हैं
94فَمَن يَعْمَلْ مِنَ الصَّالِحَاتِ وَهُوَ مُؤْمِنٌ فَلَا كُفْرَانَ لِسَعْيِهِ وَإِنَّا لَهُ كَاتِبُونَ
(उस वक्त फ़ैसला हो जाएगा कि) तो जो शख्स अच्छे-अच्छे काम करेगा और वह ईमानवाला भी हो तो उसकी कोशिश अकारत न की जाएगी और हम उसके आमाल लिखते जाते हैं
95وَحَرَامٌ عَلَىٰ قَرْيَةٍ أَهْلَكْنَاهَا أَنَّهُمْ لَا يَرْجِعُونَ
और जिस बस्ती को हमने तबाह कर डाला मुमकिन नहीं कि वह लोग क़यामत के दिन हिरफिर के से (हमारे पास) न लौटे
अल-अंबियाकुरान सूची
112आयत
मक्कीअवतरण स्थान
93आयत

अनुवाद — अल-अंबिया 93

सूरा अल-अंबिया आयत 93 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और लोगों ने बाहम (इख़तेलाफ़ करके) अपने दीन को टुकड़े…

सूरा आयत 93/112 — सूरा अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अंबिया सुनें, सूरा अल-अंबिया अनुवाद, सूरा अल-अंबिया mp3, सूरा अल-अंबिया pdf. आयत 91–95. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Saturday, October 3, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए