अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الصَّالِحَاتِ (अस-सालिहात): अच्छे कर्म, नेक कार्य
- كُفْرَان (कुफ़रान): इनकार करना, नष्ट करना, बेकार करना
- سَعْي (सई): प्रयास, मेहनत, किया गया कार्य
- كَاتِبُونَ (कातिबून): लिखने वाले, दर्ज करने वाले (फ़रिश्ते)
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत अल्लाह तआला की ओर से मोमिनों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी और प्रोत्साहन है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जो कोई भी व्यक्ति ईमान की हालत में नेक कर्म करता है—यानी वह अल्लाह और उसके रसूलों पर दिल से ईमान रखता है, आख़िरत के दिन पर यक़ीन रखता है, और फिर इस ईमान के साथ अच्छे काम करता है—तो उसकी मेहनत और प्रयास को कभी बेकार नहीं किया जाएगा। अल्लाह उसके किए हुए अच्छे कामों को न तो मिटाएगा और न ही उन्हें नष्ट करेगा।
अल्लाह तआला अपने बंदों के साथ बेहद कृपालु और दयालु है। वह अपने बंदे के छोटे से छोटे नेक काम को भी देखता है और उसे कई गुना बढ़ाकर उसका बदला देता है। यह अल्लाह का वादा है कि वह मोमिन बंदे के अच्छे कर्मों को स्वीकार करेगा और उन्हें अनेक गुना बढ़ाकर उसके पलड़े में डाल देगा।
इसके बाद अल्लाह तआला फ़रमाता है कि "हम उसके लिए लिखने वाले हैं"—यानी अल्लाह के फ़रिश्ते हर पल उसके हर अच्छे और बुरे काम को लिख रहे हैं। उसका कोई भी कर्म दर्ज होने से नहीं बचता। क़यामत के दिन जब वह उठेगा, तो उसे अपना पूरा रिकॉर्ड मिलेगा जिसमें उसके सारे नेक काम लिखे होंगे, और वह उन्हें देखकर खुश होगा। यह उसके लिए खुशी और संतोष का कारण होगा।
दावती पहलू:
यह आयत हर उस इंसान के लिए उम्मीद की किरण है जो अल्लाह पर ईमान रखता है और नेक काम करना चाहता है। अल्लाह तआला ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उसका दरवाज़ा हर उस व्यक्ति के लिए खुला है जो ईमान के साथ अच्छे कर्म करे। चाहे इंसान ने अतीत में कितनी भी गलतियाँ की हों, अगर वह ईमान ले आया और अच्छे काम करने लगा, तो अल्लाह उसके प्रयास को कभी बेकार नहीं करेगा।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह का दीन (इस्लाम) निराशा का दीन नहीं, बल्कि उम्मीद और रहमत का दीन है। अल्लाह तआला अपने बंदों के साथ इतना कृपालु है कि वह उनके छोटे-छोटे नेक कामों को भी बड़ा बना देता है और उन्हें कई गुना अज्र (इनाम) देता है। इसलिए हमें कभी यह नहीं सोचना चाहिए कि हमारे अच्छे काम बहुत कम हैं या बेकार हैं—अल्लाह के यहाँ कोई भी नेक काम बेकार नहीं जाता। हमें चाहिए कि हम ईमान को मज़बूत करें और जितना हो सके अच्छे कर्म करते रहें, क्योंकि अल्लाह हर चीज़ का हिसाब रखने वाला है और वह कभी किसी का हक़ नहीं मारता।
📜 आयत 92-96 — अल-अंबिया
अनुवाद — अल-अंबिया 94
सूरा अल-अंबिया आयत 94 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (उस वक्त फ़ैसला हो जाएगा कि) तो जो शख्स अच्छे-अच्छे…सूरा आयत 94/112 — अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंबिया सुनें, अल-अंबिया अनुवाद, अल-अंबिया mp3, अल-अंबिया pdf. आयत 92–96. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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