अल-मोमिनुन · 114/118
अनुवाद उच्चारण — अल-मोमिनुन
قَالَ إِن لَّبِثْتُمْ إِلَّا قَلِيلًا ۖ لَّوْ أَنَّكُمْ كُنتُمْ تَعْلَمُونَ ۝١١٤
Qaala il labistum illaa qaleelal law annakum kuntum ta`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
तो तुम शुमार करने वालों से पूछ लो ख़ुदा फरमाएगा बेशक तुम (ज़मीन में) बहुत ही कम ठहरे काश तुम (इतनी बात भी दुनिया में) समझे होते
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَبِثْتُمْ (लबिस्तुम): तुम रहे, तुमने समय बिताया।
  • قَلِيلًا (क़लीला): बहुत थोड़ा समय।
  • لَوْ أَنَّكُمْ كُنتُمْ تَعْلَمُونَ (लौ अन्नकुम कुन्तुम तअलमून): अगर तुम जानते होते।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला उन काफिरों और गुनाहगारों से फ़रमाएगा जो दोज़ख़ (नरक) में डाले जाने के बाद कहेंगे कि हम वहाँ कितने दिन रहे? तो अल्लाह उन्हें जवाब देगा: "तुम दुनिया में बहुत थोड़ा समय ही रहे हो।" यानी तुम्हारी दुनिया की ज़िंदगी, जो तुम्हें बहुत लंबी लगती थी, उसकी हक़ीक़त यह है कि वह बहुत थोड़ी थी — बस कुछ दिन, कुछ साल, जो गुज़र गए।

अल्लाह तआला फ़रमा रहे हैं: अगर तुम लोग यह जानते होते कि दुनिया की ज़िंदगी कितनी छोटी और आख़िरत की ज़िंदगी कितनी लंबी और हमेशा वाली है, तो तुम दुनिया में अल्लाह की इबादत और उसकी फरमाबरदारी में सब्र करते। तुम उन बुराइयों और गुनाहों से बचते जिनकी वजह से आज तुम इस अज़ाब में मुब्तला हो। दुनिया की मुहलत बहुत कम है, लेकिन आख़िरत का अज़ाब या इनाम हमेशा रहने वाला है।

यहाँ अल्लाह तआला हमें समझा रहे हैं कि दुनिया की ज़िंदगी आख़िरत के मुक़ाबले में बिल्कुल थोड़ी है। जो लोग दुनिया की ख्वाहिशों और लज़्ज़तों में डूबे रहे और अल्लाह के हुक्मों को भूल गए, वे क़यामत के दिन पछताएंगे और समझेंगे कि काश! हमने दुनिया में अल्लाह की राह में सब्र किया होता, तो आज हमें यह रुसवाई और अज़ाब न उठाना पड़ता।


दावत और नसीहत:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बहुत बड़ी सीख देती है। हमारी ज़िंदगी बहुत छोटी है — चाहे हम सौ साल भी जिएं, आख़िरत के मुक़ाबले में यह एक पल के बराबर है। अल्लाह तआला ने हमें यह दुनिया इसलिए दी है ताकि हम उसकी इबादत करें, उसके हुक्मों पर चलें और जन्नत कमाएं। जो लोग इस छोटी सी ज़िंदगी में अल्लाह की राह में सब्र करते हैं — नमाज़ पढ़ते हैं, रोज़ा रखते हैं, अच्छे काम करते हैं, बुराइयों से बचते हैं — वे क़यामत के दिन कामयाब होंगे और हमेशा की ज़िंदगी जन्नत में पाएंगे।

याद रखिए! दुनिया की मुश्किलें और इबादत में सब्र करना थोड़े दिनों की बात है, लेकिन उसका इनाम हमेशा के लिए है। अल्लाह तआला हम सबको समझ दे और हमें अपनी इबादत पर साबित क़दम रखने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 112-116 — अल-मोमिनुन

112قَالَ كَمْ لَبِثْتُمْ فِي الْأَرْضِ عَدَدَ سِنِينَ
(फिर उनसे) ख़ुदा पूछेगा कि (आख़िर) तुम ज़मीन पर कितने बरस रहे
113قَالُوا لَبِثْنَا يَوْمًا أَوْ بَعْضَ يَوْمٍ فَاسْأَلِ الْعَادِّينَ
वह कहेंगें (बरस कैसा) हम तो बस पूरा एक दिन रहे या एक दिन से भी कम
114قَالَ إِن لَّبِثْتُمْ إِلَّا قَلِيلًا ۖ لَّوْ أَنَّكُمْ كُنتُمْ تَعْلَمُونَ
तो तुम शुमार करने वालों से पूछ लो ख़ुदा फरमाएगा बेशक तुम (ज़मीन में) बहुत ही कम ठहरे काश तुम (इतनी बात भी दुनिया में) समझे होते
115أَفَحَسِبْتُمْ أَنَّمَا خَلَقْنَاكُمْ عَبَثًا وَأَنَّكُمْ إِلَيْنَا لَا تُرْجَعُونَ
तो क्या तुम ये ख्याल करते हो कि हमने तुमको (यूँ ही) बेकार पैदा किया और ये कि तुम हमारे हुज़ूर में लौटा कर न लाए जाओगे
116فَتَعَالَى اللَّهُ الْمَلِكُ الْحَقُّ ۖ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ رَبُّ الْعَرْشِ الْكَرِيمِ
तो ख़ुदा जो सच्चा बादशाह (हर चीज़ से) बरतर व आला है उसके सिवा कोई माबूद नहीं (वहीं) अर्श बुर्जुग़ का मालिक है
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीRevelation
114आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 114

सूरा अल-मोमिनुन आयत 114 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो तुम शुमार करने वालों से पूछ लो ख़ुदा फरमाएगा…

सूरा आयत 114/118 — अल-मोमिनुन المؤمنون (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मोमिनुन सुनें, अल-मोमिनुन अनुवाद, अल-मोमिनुन mp3, अल-मोमिनुन pdf. आयत 112–116. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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