अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- إِنْ هُوَ إِلَّا رَجُلٌ – यह तो बस एक आदमी है।
- افْتَرَى عَلَى اللَّهِ كَذِبًا – उसने अल्लाह पर झूठ गढ़ा है।
- وَمَا نَحْنُ لَهُ بِمُؤْمِنِينَ – और हम उसे मानने वाले नहीं हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन काफ़िरों के कथन को बयान कर रही है, जिन्होंने अपने नबी (हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम) के पैग़ाम को ठुकराते हुए कहा था: "यह शख्स जो हमें ईमान की दावत देता है, कोई और नहीं बल्कि एक साधारण आदमी है जिसने अल्लाह पर झूठ गढ़ा है। उसका दावा कि वह अल्लाह का रसूल है, महज़ एक झूठ है। और हम तो उसकी किसी भी बात को सच नहीं मानते, न ही उस पर ईमान लाते हैं।"
यह वही अंधी सोच और हठधर्मिता है जो हर ज़माने के काफ़िरों ने अपने नबियों के साथ की। उन्होंने सच्चाई को सुनने और समझने की कोशिश ही नहीं की, बल्कि पहले से ही इनकार का फैसला कर लिया। उनका कहना था कि यह आदमी हमारी तरह ही इंसान है, फिर उसे नबूवत कैसे मिल सकती है? और उन्होंने उसके पैग़ाम को झूठ कहकर खारिज कर दिया, बिना किसी दलील के।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई को कभी भी इसलिए नकारना नहीं चाहिए कि वह किसी इंसान के ज़रिए आई है। नबियों की नबूवत का सबूत उनके चरित्र, उनकी शिक्षाओं और अल्लाह की तरफ से दिए गए चमत्कारों में होता है। जो लोग सच्चाई से मुँह मोड़ते हैं, वे अक्सर बहाने बनाते हैं और दूसरों पर झूठे इलज़ाम लगाते हैं। लेकिन अल्लाह का रास्ता साफ़ है — जो सच्चे दिल से तलाश करता है, उसे हिदायत ज़रूर मिलती है। हमें चाहिए कि हम अपने दिलों को अहंकार और पूर्वाग्रह से पाक रखें, और हर सच्ची दावत को खुले दिमाग़ से परखें। याद रखें, अल्लाह ने जिन्हें नबूवत दी, उनकी सच्चाई के निशान उनके अख़लाक़ और उनके पैग़ाम में साफ़ दिखते हैं। काश! ये लोग अपनी ज़िद छोड़कर सोचते, तो ईमान की नेमत उन्हें भी मिलती।
📜 आयत 36-40 — सूरा अल-मोमिनुन
अनुवाद — अल-मोमिनुन 38
सूरा अल-मोमिनुन आयत 38 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हम तो कभी उस पर ईमान लाने वाले नहीं…सूरा आयत 38/118 — सूरा अल-मोमिनुन المؤمنون (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-मोमिनुन सुनें, सूरा अल-मोमिनुन अनुवाद, सूरा अल-मोमिनुन mp3, सूरा अल-मोमिनुन pdf. आयत 36–40. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 8, 2026
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