अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- إِنْ هِيَ إِلَّا – यह तो बस और कुछ नहीं
- حَيَاتُنَا الدُّنْيَا – हमारा यह सांसारिक जीवन
- نَمُوتُ وَنَحْيَا – हम मरते हैं और जीते हैं (एक पीढ़ी जाती है, दूसरी आती है)
- بِمَبْعُوثِينَ – दोबारा उठाए जाने वाले (क़ियामत के दिन जीवित किए जाने वाले)
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन काफ़िरों का कथन बयान कर रही है जिन्होंने आख़िरत (परलोक) को नकार दिया था। वे कहते थे: "जीवन केवल यही दुनिया है, जो हम देख रहे हैं। इसके अलावा कोई और जीवन नहीं। हममें से कुछ मरते हैं और कुछ पैदा होते हैं – यही जीवन का चक्र है। और हमें मरने के बाद दोबारा उठाया जाना कोरी कल्पना है, यह कभी नहीं होगा।"
यह उन लोगों का नज़रिया था जो केवल भौतिक दुनिया में डूबे हुए थे। उन्होंने अपनी समझ को सिर्फ़ इसी दुनिया तक सीमित कर लिया था और अल्लाह की क़ुदरत (शक्ति) को भूल गए थे। उन्हें यह अजीब लग रहा था कि मरने के बाद इंसान दोबारा ज़िंदा होगा, हालाँकि उन्होंने यह नहीं सोचा कि जिस अल्लाह ने पहली बार पैदा किया, वह दोबारा पैदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर (सक्षम) है।
यह आयत हमें सिखाती है कि यह दुनिया केवल एक मंज़िल है, अंत नहीं। जिस तरह एक किसान बीज बोता है और फिर फसल काटता है, उसी तरह यह दुनिया आख़िरत की खेती है। मौत अंत नहीं, बल्कि एक दरवाज़ा है जो हमें अगली ज़िंदगी की तरफ ले जाता है। जो लोग सिर्फ़ इसी दुनिया को ही सब कुछ मान लेते हैं, वे उस महान सच्चाई से ग़ाफ़िल (बेखबर) रहते हैं जो उनका इंतज़ार कर रही है।
प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क्या यह जीवन जो कुछ दिनों का है, क्या यही सब कुछ है? क्या हम सिर्फ़ खाने, पीने और मौज-मस्ती के लिए पैदा हुए हैं? नहीं! यह जीवन एक इम्तिहान (परीक्षा) है। जो लोग आख़िरत को नकारते हैं, वे अपनी ज़िंदगी को बेमक़सद (बिना उद्देश्य) समझ लेते हैं और फिर वे जो चाहें करते हैं। लेकिन मोमिन (ईमानवाला) जानता है कि उसे एक दिन अपने रब के सामने हाज़िर होना है और अपने हर अमल (कर्म) का हिसाब देना है। यही ईमान उसे नेकी की तरफ ले जाता है और बुराई से रोकता है।
अल्लाह तआला ने हमें यह दुनिया इसलिए दी है ताकि हम उसकी इबादत करें, उसके बताए रास्ते पर चलें और अच्छे कर्म करें। मौत के बाद हमें ज़िंदा किया जाएगा और हमारे अच्छे-बुरे कर्मों का हिसाब होगा। यही वह सच्चाई है जिसे क़ुरआन ने बयान किया है, और यही वह रास्ता है जो हमें कामयाबी की तरफ ले जाता है।
📜 आयत 35-39 — अल-मोमिनुन
अनुवाद — अल-मोमिनुन 37
सूरा अल-मोमिनुन आयत 37 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : कि हम मरते भी हैं और जीते भी हैं और…सूरा आयत 37/118 — अल-मोमिनुन المؤمنون (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मोमिनुन सुनें, अल-मोमिनुन अनुवाद, अल-मोमिनुन mp3, अल-मोमिनुन pdf. आयत 35–39. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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