अल-मोमिनुन · 37/118
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मोमिनुन
إِنْ هِيَ إِلَّا حَيَاتُنَا الدُّنْيَا نَمُوتُ وَنَحْيَا وَمَا نَحْنُ بِمَبْعُوثِينَ ۝٣٧
In hiya illaa hayaatunad dunyaa namootu wa nahyaa wa maa nahnu bimab`ooseen
📖 हिंदी अर्थ
कि हम मरते भी हैं और जीते भी हैं और हम तो फिर (दुबारा) उठाए नहीं जाएँगे हो न हो ये (सालेह) वह शख्स है जिसने खुदा पर झूठ मूठ बोहतान बाँधा है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • إِنْ هِيَ إِلَّا – यह तो बस और कुछ नहीं
  • حَيَاتُنَا الدُّنْيَا – हमारा यह सांसारिक जीवन
  • نَمُوتُ وَنَحْيَا – हम मरते हैं और जीते हैं (एक पीढ़ी जाती है, दूसरी आती है)
  • بِمَبْعُوثِينَ – दोबारा उठाए जाने वाले (क़ियामत के दिन जीवित किए जाने वाले)

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन काफ़िरों का कथन बयान कर रही है जिन्होंने आख़िरत (परलोक) को नकार दिया था। वे कहते थे: "जीवन केवल यही दुनिया है, जो हम देख रहे हैं। इसके अलावा कोई और जीवन नहीं। हममें से कुछ मरते हैं और कुछ पैदा होते हैं – यही जीवन का चक्र है। और हमें मरने के बाद दोबारा उठाया जाना कोरी कल्पना है, यह कभी नहीं होगा।"

यह उन लोगों का नज़रिया था जो केवल भौतिक दुनिया में डूबे हुए थे। उन्होंने अपनी समझ को सिर्फ़ इसी दुनिया तक सीमित कर लिया था और अल्लाह की क़ुदरत (शक्ति) को भूल गए थे। उन्हें यह अजीब लग रहा था कि मरने के बाद इंसान दोबारा ज़िंदा होगा, हालाँकि उन्होंने यह नहीं सोचा कि जिस अल्लाह ने पहली बार पैदा किया, वह दोबारा पैदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर (सक्षम) है।

यह आयत हमें सिखाती है कि यह दुनिया केवल एक मंज़िल है, अंत नहीं। जिस तरह एक किसान बीज बोता है और फिर फसल काटता है, उसी तरह यह दुनिया आख़िरत की खेती है। मौत अंत नहीं, बल्कि एक दरवाज़ा है जो हमें अगली ज़िंदगी की तरफ ले जाता है। जो लोग सिर्फ़ इसी दुनिया को ही सब कुछ मान लेते हैं, वे उस महान सच्चाई से ग़ाफ़िल (बेखबर) रहते हैं जो उनका इंतज़ार कर रही है।

प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क्या यह जीवन जो कुछ दिनों का है, क्या यही सब कुछ है? क्या हम सिर्फ़ खाने, पीने और मौज-मस्ती के लिए पैदा हुए हैं? नहीं! यह जीवन एक इम्तिहान (परीक्षा) है। जो लोग आख़िरत को नकारते हैं, वे अपनी ज़िंदगी को बेमक़सद (बिना उद्देश्य) समझ लेते हैं और फिर वे जो चाहें करते हैं। लेकिन मोमिन (ईमानवाला) जानता है कि उसे एक दिन अपने रब के सामने हाज़िर होना है और अपने हर अमल (कर्म) का हिसाब देना है। यही ईमान उसे नेकी की तरफ ले जाता है और बुराई से रोकता है।

अल्लाह तआला ने हमें यह दुनिया इसलिए दी है ताकि हम उसकी इबादत करें, उसके बताए रास्ते पर चलें और अच्छे कर्म करें। मौत के बाद हमें ज़िंदा किया जाएगा और हमारे अच्छे-बुरे कर्मों का हिसाब होगा। यही वह सच्चाई है जिसे क़ुरआन ने बयान किया है, और यही वह रास्ता है जो हमें कामयाबी की तरफ ले जाता है।



📜 आयत 35-39 — सूरा अल-मोमिनुन

35أَيَعِدُكُمْ أَنَّكُمْ إِذَا مِتُّمْ وَكُنتُمْ تُرَابًا وَعِظَامًا أَنَّكُم مُّخْرَجُونَ
क्या ये शख्स तुमसे वायदा करता है कि जब तुम मर जाओगे और (मर कर) सिर्फ मिट्टी और हड्डियाँ (बनकर) रह जाओगे तो तुम दुबारा ज़िन्दा करके कब्रों से निकाले जाओगे (है है अरे) जिसका तुमसे वायदा किया जाता है
36۞ هَيْهَاتَ هَيْهَاتَ لِمَا تُوعَدُونَ
बिल्कुल (अक्ल से) दूर और क़यास से बईद है (दो बार ज़िन्दा होना कैसा) बस यही तुम्हारी दुनिया की ज़िन्दगी है
37إِنْ هِيَ إِلَّا حَيَاتُنَا الدُّنْيَا نَمُوتُ وَنَحْيَا وَمَا نَحْنُ بِمَبْعُوثِينَ
कि हम मरते भी हैं और जीते भी हैं और हम तो फिर (दुबारा) उठाए नहीं जाएँगे हो न हो ये (सालेह) वह शख्स है जिसने खुदा पर झूठ मूठ बोहतान बाँधा है
38إِنْ هُوَ إِلَّا رَجُلٌ افْتَرَىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا وَمَا نَحْنُ لَهُ بِمُؤْمِنِينَ
और हम तो कभी उस पर ईमान लाने वाले नहीं (ये हालत देखकर) सालेह ने दुआ की ऐ मेरे पालने वाले चूँकि इन लोगों ने मुझे झुठला दिया
39قَالَ رَبِّ انصُرْنِي بِمَا كَذَّبُونِ
तू मेरी मदद कर ख़ुदा ने फरमाया (एक ज़रा ठहर जाओ)
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीअवतरण स्थान
37आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 37

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Friday, October 2, 2026

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