अल-मोमिनुन · 39/118
अनुवाद उच्चारण — अल-मोमिनुन
قَالَ رَبِّ انصُرْنِي بِمَا كَذَّبُونِ ۝٣٩
Qaala Rabbin surnee bimaa kazzaboon
📖 हिंदी अर्थ
तू मेरी मदद कर ख़ुदा ने फरमाया (एक ज़रा ठहर जाओ)

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • رَبِّ (मेरे पालनहार): अल्लाह तआला को संबोधित करते हुए, जो सृष्टि का पालनकर्ता और स्वामी है।
  • انصُرْنِي (मेरी सहायता कर): मुझे विजय प्रदान कर, मेरा समर्थन कर।
  • بِمَا كَذَّبُونِ (इसलिए कि उन्होंने मुझे झुठलाया): उनके झुठलाने और इनकार करने के कारण।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब नबी (अलैहिस्सलाम) की क़ौम ने उनकी दावत को ठुकरा दिया, उनकी नसीहत को मज़ाक़ समझा और उन्हें झुठलाने में हद से गुज़र गई, तो उन्होंने अपने रब की दरगाह में हाथ उठाए और यह दुआ की: "ऐ मेरे पालनहार! उनके इस झुठलाने और सरकशी के बदले में मेरी मदद कर और उनके मुक़ाबले में मुझे नुसरत अता फ़रमा।" यह दुआ किसी व्यक्तिगत बदले या दुनियावी ग़रज़ के लिए नहीं थी, बल्कि यह दीन की फ़तह और सच्चाई के इज़हार के लिए थी, ताकि लोगों पर हुज्जत पूरी हो जाए और ज़ुल्म करने वालों का अंजाम सामने आ जाए।

यह दुआ हमें सिखाती है कि जब इंसान हक़ की राह पर हो और उसे सताया जाए, तो उसे अल्लाह ही से मदद माँगनी चाहिए। अल्लाह अपने नबियों की दुआ ज़रूर सुनता है और उनकी मदद करता है। इस आयत में उन लोगों के लिए तसल्ली है जो अल्लाह की राह में मुश्किलों का सामना करते हैं — उन्हें यक़ीन रखना चाहिए कि अल्लाह की मदद ज़रूर आती है, चाहे वह देर से ही क्यों न आए। यह दुआ हमें यह भी सिखाती है कि मुसीबत के वक़्त अल्लाह से सीधे जुड़ना और उसी से फ़रियाद करना सबसे बड़ी ताक़त है। अल्लाह तआला अपने बंदों की पुकार सुनता है और उन्हें कभी निराश नहीं करता।



📜 आयत 37-41 — अल-मोमिनुन

37إِنْ هِيَ إِلَّا حَيَاتُنَا الدُّنْيَا نَمُوتُ وَنَحْيَا وَمَا نَحْنُ بِمَبْعُوثِينَ
कि हम मरते भी हैं और जीते भी हैं और हम तो फिर (दुबारा) उठाए नहीं जाएँगे हो न हो ये (सालेह) वह शख्स है जिसने खुदा पर झूठ मूठ बोहतान बाँधा है
38إِنْ هُوَ إِلَّا رَجُلٌ افْتَرَىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا وَمَا نَحْنُ لَهُ بِمُؤْمِنِينَ
और हम तो कभी उस पर ईमान लाने वाले नहीं (ये हालत देखकर) सालेह ने दुआ की ऐ मेरे पालने वाले चूँकि इन लोगों ने मुझे झुठला दिया
39قَالَ رَبِّ انصُرْنِي بِمَا كَذَّبُونِ
तू मेरी मदद कर ख़ुदा ने फरमाया (एक ज़रा ठहर जाओ)
40قَالَ عَمَّا قَلِيلٍ لَّيُصْبِحُنَّ نَادِمِينَ
अनक़रीब ही ये लोग नादिम व परेशान हो जाएँगे
41فَأَخَذَتْهُمُ الصَّيْحَةُ بِالْحَقِّ فَجَعَلْنَاهُمْ غُثَاءً ۚ فَبُعْدًا لِّلْقَوْمِ الظَّالِمِينَ
ग़रज़ उन्हें यक़ीनन एक सख्त चिंघाड़ ने ले डाला तो हमने उन्हें कूडे क़रकट (का ढेर) बना छोड़ा पस ज़ालिमों पर (खुदा की) लानत है
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीRevelation
39आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 39

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Tuesday, August 18, 2026

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