Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لِبَشَرَيْنِ مِثْلِنَا: हमारे जैसे दो इंसानों पर (विशेष रूप से मूसा और हारून अलैहिस्सलाम पर)
- وَقَوْمُهُمَا: उन दोनों की क़ौम (बनी इसराईल)
- لَنَا عَابِدُونَ: हमारे लिए आज्ञाकारी, विनम्र और सेवकों की तरह झुके हुए
तफ़सीर:
यह आयत फ़िरऔन और उसकी क़ौम के उस घमंड भरे रवैये को बयान करती है जब अल्लाह ने हज़रत मूसा और हारून अलैहिस्सलाम को उनके पास पैग़म्बर बनाकर भेजा। फ़िरऔन और उसके सरदारों ने अहंकार और घमंड के साथ कहा: "क्या हम अपने जैसे दो इंसानों पर ईमान लाएँ? ये तो हमारी ही तरह इंसान हैं, इनमें कोई ऐसी ख़ास बात नहीं जो इन्हें हमसे बेहतर बनाए। और देखो, इनकी क़ौम (बनी इसराईल) तो हमारी ग़ुलाम हैं, हमारे आगे झुकी हुई हैं, हमारी आज्ञा मानती हैं। फिर ये कैसे हमारे पैग़म्बर बन सकते हैं?"
यह वही घमंड और अहंकार है जो हर ज़माने में सच्चाई को क़बूल करने से रोकता है। फ़िरऔनियों ने यह भूल दिखाई कि पैग़म्बरी का सम्बन्ध ख़ून, माल या दुनियावी रुतबे से नहीं, बल्कि अल्लाह की पसन्द और चुनाव से है। अल्लाह जिसे चाहता है, अपना पैग़म्बर बनाकर भेजता है, चाहे वह ग़रीब हो या अमीर, चाहे उसकी क़ौम कमज़ोर हो या ताक़तवर।
इस आयत से हमें सबक़ मिलता है कि हमें कभी भी लोगों को उनके दुनियावी रुतबे, जाति, रंग या माल की बिना पर नहीं आँकना चाहिए। सच्चाई की कसौटी यह नहीं है कि कहने वाला कौन है, बल्कि यह है कि वह क्या कह रहा है। अल्लाह के दीन की दावत को क़बूल करने में यह देखना कि दावत देने वाला हमारे बराबर का है या हमसे बड़ा है, शैतानी चाल है। हमें चाहिए कि हक़ को हक़ समझकर क़बूल करें, चाहे वह किसी भी इंसान के ज़रिये हम तक पहुँचे।
यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह की राह में आने वाली रुकावटों में सबसे बड़ी रुकावट घमंड है। घमंड इंसान को अंधा बना देता है और वह साफ़ सच्चाई को भी नहीं देख पाता। अल्लाह हमें घमंड से बचाए और हमारे दिलों में विनम्रता पैदा करे, ताकि हम हक़ को क़बूल करने में देर न करें। आमीन।
📜 आयत 45-49 — सूरा अल-मोमिनुन
अनुवाद — अल-मोमिनुन 47
सूरा अल-मोमिनुन आयत 47 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : आपस मे कहने लगे क्या हम अपने ही ऐसे दो…सूरा आयत 47/118 — सूरा अल-मोमिनुन المؤمنون (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-मोमिनुन सुनें, सूरा अल-मोमिनुन अनुवाद, सूरा अल-मोमिनुन mp3, सूरा अल-मोमिनुन pdf. आयत 45–49. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-मोमिनुन
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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