Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- نُسَارِعُ لَهُمْ فِي الْخَيْرَاتِ: हम उनके लिए भलाइयों में जल्दी करते हैं, यानी उन्हें खूब नेमतें और सुख-सुविधाएँ देते हैं।
- بَل لَّا يَشْعُرُونَ: बल्कि वे महसूस नहीं करते कि यह उनके लिए परीक्षा और धीरे-धीरे पकड़ का ज़रिया है।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत उन काफिरों और ग़ाफिल लोगों के बारे में है जो दुनिया की नेमतों और ऐश-ओ-आराम को देखकर यह समझ बैठते हैं कि यह अल्लाह की उन पर मेहरबानी और उनकी अच्छाई का इनाम है। वे सोचते हैं कि जो कुछ उन्हें मिल रहा है—धन, संतान, सुख-सुविधाएँ—यह इस बात का सबूत है कि अल्लाह उनसे राज़ी है। लेकिन अल्लाह तआला फ़रमाता है: "नहीं, ऐसा नहीं है! हम उन्हें यह सब कुछ इसलिए दे रहे हैं ताकि उन्हें धीरे-धीरे पकड़ें और उनकी परीक्षा लें।" यह एक तरह का इस्तिदराज (استدراج) है, यानी अल्लाह उन्हें नेमतें देता रहता है, और वे गुमान में डूबे रहते हैं, यहाँ तक कि जब अज़ाब आता है तो वे अचानक पकड़ लिए जाते हैं।
वे लोग यह नहीं समझते कि यह दुनिया की चीज़ें उनके लिए रहमत नहीं, बल्कि उनकी सरकशी और ग़फलत की वजह से उन्हें मोहलत दी जा रही है। अगर वे अक्ल से काम लेते, तो समझ जाते कि यह सब कुछ उन्हें धोखे में डालने के लिए है, न कि उनकी इज़्ज़त के लिए।
दावती पहलू:
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें एक बहुत बड़ी हक़ीक़त से आगाह करती है। दुनिया की नेमतें और सुख-सुविधाएँ हमेशा अल्लाह की रज़ामंदी की निशानी नहीं होतीं। कई बार अल्लाह किसी को दुनिया देकर आख़िरत में उसके हिस्से की भलाई छीन लेता है। इसलिए हमें चाहिए कि हम नेमतों को देखकर अल्लाह के शुक्रगुज़ार बनें और उसकी इबादत में लगे रहें, न कि उन नेमतों पर इतराएँ और अल्लाह से दूर हो जाएँ। याद रखिए, अल्लाह की राह में खर्च करना, भलाई के कामों में जल्दी करना और उसकी रज़ा के लिए जीना ही असली कामयाबी है। दुनिया की चमक-दमक को अपने दिल में जगह न दें, क्योंकि यह एक इम्तिहान है, और जो लोग इस इम्तिहान में कामयाब हो जाते हैं, उनके लिए आख़िरत में ऐसी नेमतें हैं जो कभी ख़त्म नहीं होंगी। अल्लाह हमें सच्ची समझ और अमल की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 54-58 — सूरा अल-मोमिनुन
अनुवाद — अल-मोमिनुन 56
सूरा अल-मोमिनुन आयत 56 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐसा नहीं) बल्कि ये लोग समझते नहींसूरा आयत 56/118 — सूरा अल-मोमिनुन المؤمنون (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-मोमिनुन सुनें, सूरा अल-मोमिनुन अनुवाद, सूरा अल-मोमिनुन mp3, सूरा अल-मोमिनुन pdf. आयत 54–58. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-मोमिनुन
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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