अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- ख़श्यत (خشية): डर, जो अल्लाह की महानता और उसके अज़ाब के ख़ौफ़ से हो।
- मुश्फ़िक़ून (مشفقون): डरने वाले, काँपने वाले, सावधान रहने वाले।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन मोमिनों की विशेषता बयान करती है जो अल्लाह के सच्चे बंदे हैं। वे लोग जो अपने रब के ख़ौफ़ से काँपते हैं, उनके दिल अल्लाह के अज़ाब के डर से भरे रहते हैं। यह डर उन्हें गुनाहों से रोकता है और नेकियों की तरफ़ ले जाता है। वे अपने ईमान और अच्छे आमाल के बावजूद यह नहीं समझते कि वे अल्लाह के हक़ को पूरा कर चुके हैं, बल्कि हमेशा यह डर रखते हैं कि कहीं उनसे कोई कमी तो नहीं हुई। यही वह लोग हैं जो अल्लाह की रहमत और उसकी जन्नत के हक़दार बनते हैं।
यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चा ईमान सिर्फ़ ज़ुबान से कहना नहीं, बल्कि दिल का अल्लाह से जुड़ना है। जिस दिल में अल्लाह का ख़ौफ़ होता है, वह दिल कभी गुनाह की तरफ़ नहीं भटकता। यह ख़ौफ़ मोहब्बत के साथ होता है — बंदा अल्लाह से प्यार करता है और उसके अज़ाब से डरता है, इसलिए वह हर काम में अल्लाह की रज़ा को आगे रखता है।
दावती पहलू:
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह के नज़दीक वही लोग इज़्ज़त वाले हैं जो उससे डरते हैं। यह डर बुरा नहीं है, बल्कि यही वह चीज़ है जो इंसान को जन्नत की राह दिखाती है। जब हमारे दिल में अल्लाह का ख़ौफ़ होगा, तो हम अपनी ज़ुबान, अपनी आँखों, अपने कानों और अपने हाथों को गुनाह से बचाएँगे। यही ख़ौफ़ हमें नमाज़ में ख़ुशू, रोज़े में सब्र और दूसरों के साथ अच्छे बर्ताव की तरफ़ ले जाएगा। अल्लाह उन लोगों से मुहब्बत करता है जो उससे डरते हैं, और उन्हें ऐसी जगह देगा जहाँ न कोई डर होगा और न कोई ग़म। आइए, हम अपने दिलों में इस ख़ौफ़ को पैदा करें और अल्लाह के फ़रमाँबरदार बंदे बनें।
📜 आयत 55-59 — अल-मोमिनुन
अनुवाद — अल-मोमिनुन 57
सूरा अल-मोमिनुन आयत 57 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उसमें शक नहीं कि जो लोग अपने परवरदिगार की वहशत…सूरा आयत 57/118 — अल-मोमिनुन المؤمنون (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मोमिनुन सुनें, अल-मोमिनुन अनुवाद, अल-मोमिनुन mp3, अल-मोमिनुन pdf. आयत 55–59. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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