अल-मोमिनुन · 85/118
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मोमिनुन
سَيَقُولُونَ لِلَّهِ ۚ قُلْ أَفَلَا تَذَكَّرُونَ ۝٨٥
Sa-yaqooloona lillaah; qul afalaa tazakkkaroon
📖 हिंदी अर्थ
तुम कह दो कि तो क्या तुम अब भी ग़ौर न करोगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • سَيَقُولُونَ – वे अवश्य कहेंगे
  • لِلَّهِ – अल्लाह ही के लिए है
  • قُلْ – आप कह दीजिए
  • أَفَلَا تَذَكَّرُونَ – तो क्या तुम लोग नसीहत हासिल नहीं करते?

तफसीर:

जब इन मुशरिकीन से पूछा जाता है कि यह धरती और जो कुछ भी उसके ऊपर है, वह किसका है? तो वे अपनी फ़ितरत के तौर पर यही जवाब देंगे कि यह सब अल्लाह ही का है। वे इस बात का इनकार नहीं कर सकते, क्योंकि उनका दिल भी गवाही देता है कि इस कायनात का मालिक और ख़ालिक़ अल्लाह ही है।

अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को हुक्म देता है कि उनसे कहो: "तो क्या तुम लोग इतनी बड़ी हक़ीक़त से सबक़ नहीं लेते? क्या तुम्हें यह बात नहीं सोचनी चाहिए कि जिस अल्लाह के पास धरती और आसमानों की बादशाहत है, वही तुम्हें मौत के बाद दोबारा ज़िंदा करने पर भी पूरी क़ुदरत रखता है?"

यह एक ऐसी दलील है जो उनके अपने इक़रार से ली गई है। जब वे मानते हैं कि यह सब अल्लाह का है, तो फिर वे हश्र (क़यामत के दिन उठाए जाने) का इनकार क्यों करते हैं? जो ख़ालिक़ इतनी बड़ी कायनात को पैदा कर सकता है, उसके लिए मुर्दों को दोबारा ज़िंदा करना क्या मुश्किल है?

इस आयत में हमारे लिए बड़ी नसीहत है कि हम अपने आस-पास की मख़लूक़ात पर ग़ौर करें। जब हम धरती को देखते हैं कि वह बंजर होती है, फिर बारिश से हरी-भरी हो जाती है, तो यह भी उसी अल्लाह की क़ुदरत की निशानी है जो मुर्दों को ज़िंदा करेगा।

याद रखिए! जो इंसान अपनी फ़ितरत की आवाज़ सुनता है और अपने दिल की गवाही को क़ुबूल करता है, वह कभी गुमराह नहीं हो सकता। अल्लाह तआला ने हर इंसान के दिल में अपनी पहचान की फ़ितरत रख दी है। बस ज़रूरत है उस पर ग़ौर-ओ-फ़िक्र करने की और उस नसीहत को क़ुबूल करने की जो हमारे रब ने हमें दी है।

तो आओ, हम सब इस आयत से सबक़ लें और अपने रब की क़ुदरत पर ईमान लाएँ, क्योंकि यही हमारी कामयाबी की कुंजी है।



📜 आयत 83-87 — सूरा अल-मोमिनुन

83لَقَدْ وُعِدْنَا نَحْنُ وَآبَاؤُنَا هَٰذَا مِن قَبْلُ إِنْ هَٰذَا إِلَّا أَسَاطِيرُ الْأَوَّلِينَ
इसका वायदा तो हमसे और हमसे पहले हमारे बाप दादाओं से भी (बार हा) किया जा चुका है ये तो बस सिर्फ अगले लोगों के ढकोसले हैं
84قُل لِّمَنِ الْأَرْضُ وَمَن فِيهَا إِن كُنتُمْ تَعْلَمُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि भला अगर तुम लोग कुछ जानते हो (तो बताओ) ये ज़मीन और जो लोग इसमें हैं किस के हैं वह फौरन जवाब देगें ख़ुदा के
85سَيَقُولُونَ لِلَّهِ ۚ قُلْ أَفَلَا تَذَكَّرُونَ
तुम कह दो कि तो क्या तुम अब भी ग़ौर न करोगे
86قُلْ مَن رَّبُّ السَّمَاوَاتِ السَّبْعِ وَرَبُّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ
(ऐ रसूल) तुम उनसे पूछो तो कि सातों आसमानों का मालिक और (इतने) बड़े अर्श का मालिक कौन है तो फौरन जवाब देगें कि (सब कुछ) खुदा ही का है
87سَيَقُولُونَ لِلَّهِ ۚ قُلْ أَفَلَا تَتَّقُونَ
अब तुम कहो तो क्या तुम अब भी (उससे) नहीं डरोगे
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीअवतरण स्थान
85आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 85

सूरा अल-मोमिनुन आयत 85 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तुम कह दो कि तो क्या तुम अब भी ग़ौर…

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Thursday, October 1, 2026

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