अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- سَيَقُولُونَ – वे अवश्य कहेंगे
- لِلَّهِ – अल्लाह ही के लिए है
- قُلْ – आप कह दीजिए
- أَفَلَا تَذَكَّرُونَ – तो क्या तुम लोग नसीहत हासिल नहीं करते?
तफसीर:
जब इन मुशरिकीन से पूछा जाता है कि यह धरती और जो कुछ भी उसके ऊपर है, वह किसका है? तो वे अपनी फ़ितरत के तौर पर यही जवाब देंगे कि यह सब अल्लाह ही का है। वे इस बात का इनकार नहीं कर सकते, क्योंकि उनका दिल भी गवाही देता है कि इस कायनात का मालिक और ख़ालिक़ अल्लाह ही है।
अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को हुक्म देता है कि उनसे कहो: "तो क्या तुम लोग इतनी बड़ी हक़ीक़त से सबक़ नहीं लेते? क्या तुम्हें यह बात नहीं सोचनी चाहिए कि जिस अल्लाह के पास धरती और आसमानों की बादशाहत है, वही तुम्हें मौत के बाद दोबारा ज़िंदा करने पर भी पूरी क़ुदरत रखता है?"
यह एक ऐसी दलील है जो उनके अपने इक़रार से ली गई है। जब वे मानते हैं कि यह सब अल्लाह का है, तो फिर वे हश्र (क़यामत के दिन उठाए जाने) का इनकार क्यों करते हैं? जो ख़ालिक़ इतनी बड़ी कायनात को पैदा कर सकता है, उसके लिए मुर्दों को दोबारा ज़िंदा करना क्या मुश्किल है?
इस आयत में हमारे लिए बड़ी नसीहत है कि हम अपने आस-पास की मख़लूक़ात पर ग़ौर करें। जब हम धरती को देखते हैं कि वह बंजर होती है, फिर बारिश से हरी-भरी हो जाती है, तो यह भी उसी अल्लाह की क़ुदरत की निशानी है जो मुर्दों को ज़िंदा करेगा।
याद रखिए! जो इंसान अपनी फ़ितरत की आवाज़ सुनता है और अपने दिल की गवाही को क़ुबूल करता है, वह कभी गुमराह नहीं हो सकता। अल्लाह तआला ने हर इंसान के दिल में अपनी पहचान की फ़ितरत रख दी है। बस ज़रूरत है उस पर ग़ौर-ओ-फ़िक्र करने की और उस नसीहत को क़ुबूल करने की जो हमारे रब ने हमें दी है।
तो आओ, हम सब इस आयत से सबक़ लें और अपने रब की क़ुदरत पर ईमान लाएँ, क्योंकि यही हमारी कामयाबी की कुंजी है।
📜 आयत 83-87 — अल-मोमिनुन
अनुवाद — अल-मोमिनुन 85
सूरा अल-मोमिनुन आयत 85 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तुम कह दो कि तो क्या तुम अब भी ग़ौर…सूरा आयत 85/118 — अल-मोमिनुन المؤمنون (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मोमिनुन सुनें, अल-मोमिनुन अनुवाद, अल-मोमिनुन mp3, अल-मोमिनुन pdf. आयत 83–87. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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