अल-मोमिनुन · 84/118
अनुवाद उच्चारण — अल-मोमिनुन
قُل لِّمَنِ الْأَرْضُ وَمَن فِيهَا إِن كُنتُمْ تَعْلَمُونَ ۝٨٤
Qul limanil ardu wa man feehaaa in kuntum ta`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि भला अगर तुम लोग कुछ जानते हो (तो बताओ) ये ज़मीन और जो लोग इसमें हैं किस के हैं वह फौरन जवाब देगें ख़ुदा के
📜

अनुवाद — Tafsir

(क़ुल) अर्थात आप कह दीजिए, (लिमनिल अर्दु) यानी यह धरती और (वमन फ़ीहा) जो कुछ भी इसमें है, वह किसका है? (इन कुन्तुम तअलमून) अगर तुम जानते हो।

इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को हुक्म देता है कि वे मक्का के काफ़िरों से, जो आख़िरत और दोबारा जी उठने का इनकार करते हैं, यह सवाल करें: "यह धरती और इसमें मौजूद सारी मख़लूक़ात — इंसान, जानवर, पेड़-पौधे, पहाड़, समुद्र — यह सब किसका है? अगर तुम्हें कुछ भी ज्ञान है तो बताओ।"

यह सवाल उनके दिलों पर चोट करने वाला है, क्योंकि वे ख़ुद भी जानते हैं और मानते हैं कि यह सब अल्लाह ही का है। वे किसी और को इसका मालिक नहीं कह सकते। इस तरह अल्लाह उन्हें उनके अपने ईमान की गवाही पर छोड़ देता है — कि जब वे मानते हैं कि यह सब अल्लाह का है, तो फिर वही उनका रब, उनका ख़ालिक़ और उनका मालिक है। और जो इन सबका मालिक है, वही इन सबका मालिक होने के साथ-साथ इन सबको दोबारा ज़िंदा करने पर भी क़ादिर है।

यह आयत हमें सिखाती है कि हमारे चारों ओर की हर चीज़ — यह विशाल धरती, यह नीला आसमान, यह चमकते सितारे, यह बहते दरिया — सब कुछ अल्लाह की कुदरत का नमूना है। जिसने इन्हें पैदा किया, वही इन्हें दोबारा भी पैदा कर सकता है। क़यामत का दिन आना कोई मुश्किल काम नहीं, क्योंकि जिसने पहली बार पैदा किया, उसके लिए दूसरी बार पैदा करना और भी आसान है।

और अगर हम सच्चे दिल से यह मान लें कि यह सब अल्लाह का है, तो फिर हमें अपनी ज़िंदगी भी उसी की बताई हुई तरह से गुज़ारनी चाहिए। जो चीज़ किसी की होती है, उसका हक़ होता है कि उसे उसी की मर्ज़ी के मुताबिक इस्तेमाल किया जाए। यही ईमान की असली माँग है — कि हम अपने रब की इबादत करें, उसके हुक्मों को मानें, और उसी से डरें। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया की भलाई और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 82-86 — अल-मोमिनुन

82قَالُوا أَإِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًا وَعِظَامًا أَإِنَّا لَمَبْعُوثُونَ
कि जब हम मर जाएँगें और (मरकर) मिट्टी (का ढ़ेर) और हड्डियाँ हो जाएँगें तो क्या हम फिर दोबारा (क्रबों से ज़िन्दा करके) निकाले जाएँगे
83لَقَدْ وُعِدْنَا نَحْنُ وَآبَاؤُنَا هَٰذَا مِن قَبْلُ إِنْ هَٰذَا إِلَّا أَسَاطِيرُ الْأَوَّلِينَ
इसका वायदा तो हमसे और हमसे पहले हमारे बाप दादाओं से भी (बार हा) किया जा चुका है ये तो बस सिर्फ अगले लोगों के ढकोसले हैं
84قُل لِّمَنِ الْأَرْضُ وَمَن فِيهَا إِن كُنتُمْ تَعْلَمُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि भला अगर तुम लोग कुछ जानते हो (तो बताओ) ये ज़मीन और जो लोग इसमें हैं किस के हैं वह फौरन जवाब देगें ख़ुदा के
85سَيَقُولُونَ لِلَّهِ ۚ قُلْ أَفَلَا تَذَكَّرُونَ
तुम कह दो कि तो क्या तुम अब भी ग़ौर न करोगे
86قُلْ مَن رَّبُّ السَّمَاوَاتِ السَّبْعِ وَرَبُّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ
(ऐ रसूल) तुम उनसे पूछो तो कि सातों आसमानों का मालिक और (इतने) बड़े अर्श का मालिक कौन है तो फौरन जवाब देगें कि (सब कुछ) खुदा ही का है
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीRevelation
84आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 84

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Tuesday, August 18, 2026

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