अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَمَّا كَذَّبُوا الرُّسُلَ: जब उन्होंने रसूलों को झुठलाया (अर्थात नूह अलैहिस्सलाम को झुठलाकर उन्होंने सभी रसूलों को झुठलाया, क्योंकि एक रसूल को झुठलाना सभी रसूलों को झुठलाने के बराबर है)।
- أَغْرَقْنَاهُمْ: हमने उन्हें डुबोकर हलाक कर दिया।
- آيَةً: निशानी, सबक और सीख।
- أَعْتَدْنَا: हमने तैयार कर रखा है।
- عَذَابًا أَلِيمًا: दर्दनाक और बेहद तकलीफदेह अज़ाब।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने इस आयत में क़ौमे नूह (नूह की क़ौम) का ज़िक्र फ़रमाया है। जब उन्होंने हज़रत नूह अलैहिस्सलाम को झुठलाया, तो उन्होंने दरअसल सभी रसूलों को झुठलाया, क्योंकि सभी रसूल एक ही पैग़ाम (संदेश) लेकर आए थे—अल्लाह की इबादत और उसकी वहदानियत (एकता) का संदेश। जिसने एक रसूल को झुठलाया, उसने सारे रसूलों को झुठलाया।
अल्लाह ने उन्हें पानी में डुबोकर हलाक कर दिया और उनके इस अंजाम को आने वाली उम्मतों के लिए एक सबक और निशानी बना दिया, ताकि लोग देखें कि नबियों को झुठलाने वालों का अंजाम क्या होता है। यह घटना इतिहास के पन्नों में दर्ज है और आज भी उनके निशानात (निशानियाँ) मौजूद हैं, जो अल्लाह की क़ुदरत (शक्ति) और उसके अज़ाब का सबूत हैं।
इसके बाद अल्लाह फ़रमाता है कि हमने ज़ालिमों (अत्याचारियों) के लिए क़यामत के दिन एक दर्दनाक अज़ाब तैयार कर रखा है। यह अज़ाब सिर्फ़ क़ौमे नूह तक सीमित नहीं, बल्कि हर उस ज़ालिम के लिए है जो अल्लाह के रसूलों को झुठलाता है और उसकी आयतों से मुँह मोड़ता है। दुनिया में उन्हें जो सज़ा मिली, वह तो सिर्फ़ एक झलक थी, जबकि आख़िरत का अज़ाब उससे कहीं ज़्यादा सख्त और दर्दनाक है।
दावती पहलू (प्रचारात्मक पहलू):
यह आयत हमें अल्लाह की क़ुदरत और उसके इंसाफ़ की याद दिलाती है। अल्लाह ने क़ौमे नूह को उनके ज़ुल्म और सरकशी (अवज्ञा) की वजह से इस तरह हलाक किया कि उनका नामोनिशान मिट गया। यह हर उस इंसान के लिए चेतावनी है जो अल्लाह के पैग़ाम को झुठलाता है या उससे ग़ाफ़िल रहता है। लेकिन साथ ही यह रहमत का पैग़ाम भी है कि अल्लाह ने नूह अलैहिस्सलाम और उन पर ईमान लाने वालों को बचा लिया। यानी जो लोग अल्लाह की तरफ़ रुजू (रुख़) करते हैं और उसके रसूलों पर ईमान लाते हैं, वही कामयाब होते हैं।
आज भी अल्लाह का दरवाज़ा तौबा करने वालों के लिए खुला है। जो शख्स अपनी ग़लतियों से तौबा करके अल्लाह की तरफ़ लौटता है, अल्लाह उसे माफ़ कर देता है और उसे जहन्नुम के अज़ाब से बचा लेता है। यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपनी ज़िंदगी में नबियों के पैग़ाम को अपनाएँ, अल्लाह की इबादत करें और ज़ुल्म व सरकशी से बचें, ताकि हम दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब हों।
📜 आयत 35-39 — अल-फुरकान
अनुवाद — अल-फुरकान 37
सूरा अल-फुरकान आयत 37 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और नूह की क़ौम को जब उन लोगों ने (हमारे)…सूरा आयत 37/77 — अल-फुरकान الفرقان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-फुरकान सुनें, अल-फुरकान अनुवाद, अल-फुरकान mp3, अल-फुरकान pdf. आयत 35–39. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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