अश-शुआरा · 11/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
قَوْمَ فِرْعَوْنَ ۚ أَلَا يَتَّقُونَ ۝١١
Qawma Fir`awn; alaa yattaqoon
📖 हिंदी अर्थ
क्या ये लोग (मेरे ग़ज़ब से) डरते नहीं है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abdurrahman As-Sudais ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • قَوْمَ فِرْعَوْنَ: फ़िरऔन की क़ौम (जाति) — यानी मिस्र के वे लोग जो फ़िरऔन की प्रजा थे और उसके आदेशों का पालन करते थे।
  • أَلَا يَتَّقُونَ: क्या वे अल्लाह से नहीं डरते? यानी क्या वे अल्लाह की यातना से बचने के लिए उसकी अवज्ञा से परहेज़ नहीं करते?

विस्तृत तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) को अपने दीन की दावत देने के लिए फ़िरऔन और उसकी क़ौम की ओर भेजा। यह वही फ़िरऔन था जो ख़ुद को ख़ुदा कहता था और बनी इसराईल पर अत्याचार करता था। अल्लाह ने मूसा (अलैहिस्सलाम) से कहा कि उन ज़ालिमों के पास जाओ और उनसे नरमी और नेकी के साथ कहो: "क्या तुम अल्लाह से नहीं डरते?"

यह एक बहुत ही प्यारा और प्रभावशाली सवाल है। इसमें दावत का वह तरीक़ा सिखाया गया है जो नरमी, मुहब्बत और हिकमत पर आधारित है। अल्लाह ने मूसा (अलैहिस्सलाम) को यह नहीं कहा कि जाकर फ़िरऔन को गाली दो या उस पर चीख़ो-चिल्लाओ, बल्कि यह सिखाया कि उससे प्यार से पूछो: "क्या तुम अल्लाह से नहीं डरते?" — यानी क्या तुम्हें उस अल्लाह का ख़ौफ़ नहीं जो सब कुछ देखता और सुनता है? क्या तुम उसकी यातना से बचने का रास्ता नहीं अपनाओगे?

इस आयत में हमारे लिए बहुत बड़ी सीख है। दावत-ए-दीन और अच्छाई की तरफ़ बुलाने का सबसे अच्छा तरीक़ा यही है कि लोगों को अल्लाह की याद दिलाई जाए, उसके ख़ौफ़ से डराया जाए और उनके दिलों में अल्लाह की मुहब्बत और उसकी पकड़ का एहसास पैदा किया जाए। जब इंसान के दिल में अल्लाह का डर पैदा हो जाता है, तो वह अपने आप ही गुनाहों से बचने लगता है और नेकियों की तरफ़ रुख़ करता है।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि चाहे सामने वाला कितना ही बड़ा ज़ालिम और सरकश क्यों न हो, हमें उसे अल्लाह की याद दिलानी चाहिए और उसकी भलाई की दुआ करनी चाहिए। शायद अल्लाह उसके दिल को हिदायत दे दे। फ़िरऔन जैसे ज़ालिम के सामने भी मूसा (अलैहिस्सलाम) को नरमी से बात करने का हुक्म दिया गया, तो हमें अपने समाज में फैली बुराइयों को दूर करने के लिए हिकमत और नरमी से काम लेना चाहिए।

अल्लाह हम सबको समझने की तौफ़ीक़ दे और हमारे दिलों में अपना ख़ौफ़ पैदा करे। आमीन।



📜 आयत 9-13 — सूरा अश-शुआरा

9وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ
और इसमें शक नहीं कि तेरा परवरदिगार यक़ीनन (हर चीज़ पर) ग़ालिब (और) मेहरबान है
10وَإِذْ نَادَىٰ رَبُّكَ مُوسَىٰ أَنِ ائْتِ الْقَوْمَ الظَّالِمِينَ
(ऐ रसूल वह वक्त याद करो) जब तुम्हारे परवरदिगार ने मूसा को आवाज़ दी कि (इन) ज़ालिमों फिरऔन की क़ौम के पास जाओ (हिदायत करो)
11قَوْمَ فِرْعَوْنَ ۚ أَلَا يَتَّقُونَ
क्या ये लोग (मेरे ग़ज़ब से) डरते नहीं है
12قَالَ رَبِّ إِنِّي أَخَافُ أَن يُكَذِّبُونِ
मूसा ने अर्ज़ कि परवरदिगार मैं डरता हूँ कि (मुबादा) वह लोग मुझे झुठला दे
13وَيَضِيقُ صَدْرِي وَلَا يَنطَلِقُ لِسَانِي فَأَرْسِلْ إِلَىٰ هَارُونَ
और (उनके झुठलाने से) मेरा दम रुक जाए और मेरी ज़बान (अच्छी तरह) न चले तो हारुन के पास पैग़ाम भेज दे (कि मेरा साथ दे)
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
11आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 11

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Saturday, October 3, 2026

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