अश-शुआरा · 112/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
قَالَ وَمَا عِلْمِي بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ ۝١١٢
Qaala wa maa `ilmee bimaa kaanoo ya`maloon
📖 हिंदी अर्थ
नूह ने कहा ये लोग जो कुछ करते थे मुझे क्या ख़बर (और क्या ग़रज़)
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • مَا عِلْمِي: मुझे क्या जानकारी/मुझे क्या पता।
  • يَعْمَلُونَ: वे लोग करते थे (अर्थात उनके कर्म और आचरण)।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब नूह अलैहिस्सलाम की क़ौम के सरदारों और बड़े लोगों ने उनसे कहा कि हम तुम्हें क्यों मानें, जबकि तुम्हारे साथ केवल नीच और ग़रीब लोग हैं, जो हमारी नज़रों में कोई हैसियत नहीं रखते — तो नूह अलैहिस्सलाम ने उन्हें जवाब दिया कि "मुझे क्या पता कि वे लोग (पहले) क्या करते थे?" यानी मेरा काम उनके पिछले कर्मों की जाँच-पड़ताल करना नहीं है, न ही मैं उनके दिलों के भेद जानने वाला हूँ। मैं तो केवल उनके ईमान और उनके अल्लाह की तरफ़ रुख़ करने की बिना पर उन्हें अपने साथी बनाता हूँ।

अल्लाह तआला ने किसी नबी को लोगों के दिलों के राज़ जानने का हुक्म नहीं दिया, बल्कि उनका फ़र्ज़ सिर्फ़ दावत देना है। ईमान की कसौटी ज़ाहिरी इस्लाम है, और अंदरूनी हालात का इल्म सिर्फ़ अल्लाह को है। नूह अलैहिस्सलाम का यह जवाब उन लोगों के लिए एक बड़ी नसीहत है जो लोगों को उनके माल, रुत्बे, जात-पात या पेशे की बिना पर आँकते हैं। इस्लाम में किसी इंसान की इज़्ज़त उसके तक़वा और ईमान से है, न कि उसके दुनियावी मर्तबे से।

यह आयत हमें सिखाती है कि हमें लोगों के बारे में बुरा गुमान नहीं करना चाहिए और न ही उनके अंदरूनी हालात पर टिप्पणी करनी चाहिए। हमारा काम है अच्छाई की तरफ़ बुलाना और बुराई से रोकना, और दिलों के राज़ अल्लाह पर छोड़ देना। साथ ही यह भी सबक़ है कि दावत-ए-दीन में किसी को छोटा या बड़ा नहीं समझना चाहिए — जो भी ईमान लाए, वह हमारा भाई है, चाहे वह किसी भी ज़ात या पेशे से ताल्लुक़ रखता हो।

🎧 सुनें

📜 आयत 110-114 — अश-शुआरा

110فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ
तो ख़ुदा से डरो और मेरी इताअत करो वह लोग बोले जब कमीनो मज़दूरों वग़ैरह ने (लालच से) तुम्हारी पैरवी कर ली है
111۞ قَالُوا أَنُؤْمِنُ لَكَ وَاتَّبَعَكَ الْأَرْذَلُونَ
तो हम तुम पर क्या ईमान लाएं
112قَالَ وَمَا عِلْمِي بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
नूह ने कहा ये लोग जो कुछ करते थे मुझे क्या ख़बर (और क्या ग़रज़)
113إِنْ حِسَابُهُمْ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّي ۖ لَوْ تَشْعُرُونَ
इन लोगों का हिसाब तो मेरे परवरदिगार के ज़िम्मे है
114وَمَا أَنَا بِطَارِدِ الْمُؤْمِنِينَ
काश तुम (इतनी) समझ रखते और मै तो ईमानदारों को अपने पास से निकालने वाला नहीं
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अनुवाद — अश-शुआरा 112

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Tuesday, August 18, 2026

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