अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَمَدَّكُم (अमद्दकुम): उसने तुम्हें प्रदान किया, दिया।
- بِأَنْعَامٍ (बि-अन'आम): चौपाये जानवर, जैसे ऊँट, गाय, बकरी और भेड़।
- وَبَنِينَ (व बनीन): और बेटे (संतान)।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने हज़रत हूद अलैहिस्सलाम की क़ौम 'आद' का ज़िक्र करते हुए उन्हें नसीहत दिलाई कि उस रब से डरो जिसने तुम्हें ढेरों नेअमतें दी हैं। यह नेअमतें कोई छोटी चीज़ नहीं, बल्कि वह सब कुछ हैं जो तुम्हारी ज़िंदगी की बुनियाद हैं। अल्लाह ने तुम्हें चौपाये जानवर (ऊँट, गाय, बकरी, भेड़) अता किए हैं, जिनसे तुम्हें दूध, मांस, ऊन और सवारी मिलती है। और साथ ही तुम्हें बेटे दिए हैं, जो तुम्हारी नस्ल को आगे बढ़ाते हैं, तुम्हारी मदद करते हैं और तुम्हारी आँखों की ठंडक हैं।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की नेअमतों को पहचानो और उनका सही इस्तेमाल करो। जब अल्लाह ने हमें इतनी नेअमतें दी हैं, तो क्या हमें उसका शुक्र अदा नहीं करना चाहिए? क्या हमें उसकी इबादत नहीं करनी चाहिए? यह नेअमतें हमारे लिए इम्तिहान हैं — कि हम उन्हें देखकर अल्लाह के शुक्रगुज़ार बनते हैं या सरकशी करते हैं।
हज़रत हूद अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम को याद दिलाया कि यह सब कुछ अल्लाह का फज़ल है, और जो लोग इन नेअमतों को देखकर अल्लाह से मुँह मोड़ते हैं, वह बड़े नाइंशाफ़ हैं। अल्लाह ने उन्हें बाग़ात (बगीचे) और चश्मे (सोते) भी दिए थे, जैसा कि आगे की आयतों में ज़िक्र आता है, लेकिन यहाँ ख़ास तौर पर चौपायों और बेटों का ज़िक्र इसलिए किया गया कि ये दोनों चीज़ें इंसान की ज़िंदगी की सबसे बड़ी ज़रूरतें और सबसे प्यारी दौलत हैं।
इस आयत से हमें सबक लेना चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में जो भी नेअमतें देखते हैं — माल, औलाद, जानवर, ज़मीन, पानी — यह सब अल्लाह की देन हैं। हमें चाहिए कि इन नेअमतों का शुक्र अदा करें, अल्लाह की इबादत करें और उसके हुक्मों पर चलें। जो लोग अल्लाह की नेअमतों को भूलकर सिर्फ़ अपनी ताक़त और दौलत पर इतराते हैं, वह अल्लाह के अज़ाब का शिकार होते हैं, जैसा कि 'आद की क़ौम के साथ हुआ।
याद रखो, अल्लाह की नेअमतें हमें इसलिए दी गई हैं ताकि हम उसकी इबादत करें और उसका शुक्र अदा करें। नेअमतें हमारे लिए रहमत हैं, बशर्ते हम उन्हें अल्लाह की राह में इस्तेमाल करें और उसके नाफ़रमान न बनें। अल्लाह हमें शुक्रगुज़ार बंदे बनाए और हमें उन लोगों में शामिल करे जो उसकी नेअमतों को पहचानते हैं और उसकी इबादत पर क़ायम रहते हैं। आमीन।
📜 आयत 131-135 — अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 133
सूरा अश-शुआरा आयत 133 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : अच्छा सुनो उसने तुम्हारे चार पायों और लड़के बालों वग़ैरह…सूरा आयत 133/227 — अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शुआरा सुनें, अश-शुआरा अनुवाद, अश-शुआरा mp3, अश-शुआरा pdf. आयत 131–135. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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