अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- بَشَرٌ مِّثْلُنَا – हमारे जैसा इंसान
- فَأْتِ بِآيَةٍ – तो लाओ कोई निशानी (चमत्कार)
- مِنَ الصَّادِقِينَ – सच्चे लोगों में से
तफसीर:
क़ौमे समूद ने अपने नबी हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम से कहा: "तुम तो हमारे ही जैसे एक इंसान हो। तुम खाते-पीते हो, चलते-फिरते हो, और हमारी ही तरह जीवन गुज़ारते हो। तुममें कोई ऐसी खासियत नहीं जो तुम्हें हमसे अलग करे और तुम्हें रिसालत (पैग़म्बरी) का दर्जा दिलाए। अगर तुम सच में अल्लाह के भेजे हुए रसूल हो, तो हमारे सामने कोई ऐसा मोजिज़ा (चमत्कार) पेश करो जो तुम्हारे दावे की सच्चाई को साबित कर दे।"
यह बात उन्होंने अहंकार और जिद के साथ कही, क्योंकि उन्हें यकीन था कि एक इंसान के लिए अल्लाह की तरफ से रिसालत पाना नामुमकिन है। उनकी यह माँग दरअसल उनके दिलों की सख्ती और हक़ से मुँह मोड़ने की आदत को दिखाती है। वे यह भूल गए थे कि अल्लाह की कुदरत के आगे सब कुछ मुमकिन है, और उसने हमेशा अपने नबियों को इंसानों में से ही चुना है ताकि लोग उनसे सीख सकें और उनकी ज़िंदगी को देखकर रहनुमाई हासिल कर सकें।
इस आयत में हमारे लिए बड़ी सीख है कि हक़ की दावत को कभी भी सिर्फ इसलिए नकारना नहीं चाहिए कि दावत देने वाला हमारे जैसा इंसान है। अल्लाह के नबी और उनके नायब हमेशा इंसान ही होते हैं, और उनकी सच्चाई का सबूत उनका चरित्र, उनकी शिक्षाएँ और अल्लाह की तरफ से दिए गए मोजिज़े होते हैं। जो लोग सच्चाई को कबूल करने के लिए बहाने ढूँढते हैं, वे कभी हिदायत नहीं पाते। अल्लाह तआला ने हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम को वह मोजिज़ा अता किया जो उनकी क़ौम की माँग के मुताबिक था — ऊँटनी का पत्थर से निकलना — लेकिन उन्होंने फिर भी ईमान नहीं लाया और अल्लाह के अज़ाब का शिकार हुए।
यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि जब अल्लाह की तरफ से हिदायत आए, तो उसे खुले दिल से कबूल करना चाहिए। अल्लाह अपने बंदों पर बड़ा मेहरबान है, वह उन्हें सीधा रास्ता दिखाने के लिए नबी भेजता है, और जो लोग उनकी दावत को कबूल करते हैं, उनके लिए दुनिया और आख़िरत में बड़ी भलाई है।
📜 आयत 152-156 — अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 154
सूरा अश-शुआरा आयत 154 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तुम भी तो आख़िर हमारे ही ऐसे आदमी हो पस…सूरा आयत 154/227 — अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शुआरा सुनें, अश-शुआरा अनुवाद, अश-शुआरा mp3, अश-शुआरा pdf. आयत 152–156. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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