अश-शुआरा · 155/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
قَالَ هَٰذِهِ نَاقَةٌ لَّهَا شِرْبٌ وَلَكُمْ شِرْبُ يَوْمٍ مَّعْلُومٍ ۝١٥٥
Qaala haazihee naaqatul lahaa shirbunw w alakum shirbu yawmim ma`loom
📖 हिंदी अर्थ
सालेह ने कहा- यही ऊँटनी (मौजिज़ा) है एक बारी इसके पानी पीने की है और एक मुक़र्रर दिन तुम्हारे पीने का
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • नाक़ा: ऊँटनी
  • शिर्ब: पानी का हिस्सा या बारी
  • यौमिन मा'लूम: निश्चित दिन

तफ़सीर:

जब हज़रत सालेह (अलैहिस्सलाम) की क़ौम समूद ने नबुव्वत का सबूत माँगा, तो अल्लाह तआला ने अपनी क़ुदरत से एक चट्टान से एक ऊँटनी निकाली, जो उनके लिए एक महान निशानी थी। यह ऊँटनी सिर्फ़ एक जानवर नहीं थी, बल्कि अल्लाह की क़ुदरत का ज़िंदा मु'जिज़ा थी। हज़रत सालेह (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम से कहा: "यह अल्लाह की ऊँटनी है, इसके लिए पानी का एक हिस्सा है और तुम्हारे लिए एक निश्चित दिन का पानी है।"

यानी पानी का बंटवारा इस तरह तय किया गया कि एक दिन पूरा पानी ऊँटनी पीती थी, और दूसरे दिन पूरा पानी क़ौम के लोग इस्तेमाल करते थे। यह एक इम्तिहान था — क्या वे अल्लाह के इस एहसान और निशानी का सम्मान करेंगे? हज़रत सालेह (अलैहिस्सलाम) ने उन्हें साफ़ चेतावनी दी कि इस ऊँटनी को किसी भी तरह का नुक़्सान न पहुँचाना, न मारना, न उसे सताना, वरना अल्लाह का अज़ाब आएगा।

यहाँ से हमें एक बहुत बड़ा सबक मिलता है — अल्लाह की निशानियों का सम्मान करना चाहिए। जब अल्लाह किसी को रिज़्क़ देता है, तो उसमें दूसरों का भी हक़ होता है। हमें अपने हिस्से पर क़नाअत करनी चाहिए और अल्लाह की दी हुई नेअमतों में दूसरों के हक़ को नहीं छीनना चाहिए। यह ऊँटनी उनके लिए रहमत थी, लेकिन उन्होंने इसे झुठलाया और नाफ़रमानी की, जिसका अंजाम बहुत बुरा हुआ।

प्यारे भाइयों और बहनों! हमें चाहिए कि अल्लाह की हर निशानी को क़द्र की नज़र से देखें। अल्लाह हमें हिदायत देता है, मौक़ा देता है, और फिर हमारे अमल को देखता है। जो लोग अल्लाह की निशानियों का सम्मान करते हैं, अल्लाह उन्हें दुनिया और आख़िरत में इज़्ज़त देता है। और जो लोग अल्लाह की निशानियों से मुँह मोड़ते हैं या उनका मज़ाक उड़ाते हैं, वे अपना ही नुक़्सान करते हैं। अल्लाह तआला हमें अपनी निशानियों को समझने और उन पर अमल करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 153-157 — अश-शुआरा

153قَالُوا إِنَّمَا أَنتَ مِنَ الْمُسَحَّرِينَ
वह लोग बोले कि तुम पर तो बस जादू कर दिया गया है (कि ऐसी बातें करते हो)
154مَا أَنتَ إِلَّا بَشَرٌ مِّثْلُنَا فَأْتِ بِآيَةٍ إِن كُنتَ مِنَ الصَّادِقِينَ
तुम भी तो आख़िर हमारे ही ऐसे आदमी हो पस अगर तुम सच्चे हो तो कोई मौजिज़ा हमारे पास ला (दिखाओ)
155قَالَ هَٰذِهِ نَاقَةٌ لَّهَا شِرْبٌ وَلَكُمْ شِرْبُ يَوْمٍ مَّعْلُومٍ
सालेह ने कहा- यही ऊँटनी (मौजिज़ा) है एक बारी इसके पानी पीने की है और एक मुक़र्रर दिन तुम्हारे पीने का
156وَلَا تَمَسُّوهَا بِسُوءٍ فَيَأْخُذَكُمْ عَذَابُ يَوْمٍ عَظِيمٍ
और इसको कोई तकलीफ़ न पहुँचाना वरना एक बड़े (सख्त) ज़ोर का अज़ाब तुम्हे ले डालेगा
157فَعَقَرُوهَا فَأَصْبَحُوا نَادِمِينَ
इस पर भी उन लोगों ने उसके पाँव काट डाले और (उसको मार डाला) फिर ख़़ुद पशेमान हुए
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीRevelation
155आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 155

सूरा अश-शुआरा आयत 155 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : सालेह ने कहा- यही ऊँटनी (मौजिज़ा) है एक बारी इसके…

सूरा आयत 155/227 — अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शुआरा सुनें, अश-शुआरा अनुवाद, अश-शुआरा mp3, अश-शुआरा pdf. आयत 153–157. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए