अश-शुआरा · 19/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
وَفَعَلْتَ فَعْلَتَكَ الَّتِي فَعَلْتَ وَأَنتَ مِنَ الْكَافِرِينَ ۝١٩
Wa fa`alta fa`latakal latee fa`alta wa anta minal kaafireen
📖 हिंदी अर्थ
और तुम अपना वह काम (ख़ून क़िब्ती) जो कर गए और तुम (बड़े) नाशुक्रे हो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
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A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَعْلَتَكَ (तुम्हारा वह कार्य): यहाँ इससे मूसा (अलैहिस्सलाम) द्वारा किए गए उस क़िब्ती (मिस्री) व्यक्ति के मारे जाने की घटना की ओर इशारा है, जो उन्होंने एक इस्राईली (बनी इस्राईल) के व्यक्ति की मदद के लिए किया था।
  • مِنَ الْكَافِرِينَ (काफ़िरों में से): यहाँ इसका अर्थ है — नेमतों का इनकार करने वाला, यानी फ़िरऔन मूसा (अलैहिस्सलाम) पर यह आरोप लगा रहा था कि तुमने मेरी परवरिश और एहसान का इनकार किया।

तफ़सीर (व्याख्या):

फ़िरऔन ने मूसा (अलैहिस्सलाम) को याद दिलाते हुए कहा: “क्या हमने तुम्हें बचपन में अपने घर में नहीं पाला-पोसा? तुमने हमारे यहाँ अपनी ज़िंदगी के कई साल बिताए, और फिर तुमने वह काम किया जो तुमने किया — यानी तुमने हमारे एक आदमी (क़िब्ती) को मार डाला, जब तुमने उसे धक्का दिया और वह मर गया।” फ़िरऔन ने यह बात एहसान जताते हुए और मूसा (अलैहिस्सलाम) को डराने-धमकाने के अंदाज़ में कही, और उन पर यह आरोप लगाया कि “तुम मेरी नेमतों के इनकार करने वाले और मेरी रुबूबियत (हुकूमत) को न मानने वाले हो।”

यहाँ फ़िरऔन की बात में बड़ी बेइंसाफ़ी और झूठ था, क्योंकि मूसा (अलैहिस्सलाम) ने वह काम जानबूझकर नहीं किया था, बल्कि एक कमज़ोर इस्राईली की मदद करते हुए वह घटना घट गई थी, और वह भी उस वक़्त जब उन्हें नबुव्वत नहीं मिली थी। फ़िरऔन उस घटना को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा था ताकि मूसा (अलैहिस्सलाम) को उसके पैग़ाम से रोक सके।

दावती पहलू (इस्लामी दृष्टिकोण से सबक):

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि सत्य के दावेदारों को बहुत सी मुश्किलों और झूठे इल्ज़ामात का सामना करना पड़ता है। फ़िरऔन जैसे ज़ालिम हुक्मरान हक़ की आवाज़ को दबाने के लिए हर हथकंडा अपनाते हैं — कभी एहसान जताकर, कभी डराकर, कभी झूठे इल्ज़ाम लगाकर। लेकिन अल्लाह के नबी और उनके अनुयायी इन सब चुनौतियों का सामना सब्र और भरोसे के साथ करते हैं। यह हमारे लिए भी एक प्रेरणा है कि हम हक़ की राह पर क़ायम रहें, चाहे दुनिया की तरफ़ से कितनी भी मुख़ालिफ़त क्यों न हो। अल्लाह अपने नेक बंदों की मदद करता है और अंजाम में सच्चाई की ही जीत होती है।



📜 आयत 17-21 — सूरा अश-शुआरा

17أَنْ أَرْسِلْ مَعَنَا بَنِي إِسْرَائِيلَ
कि आप बनी इसराइल को हमारे साथ भेज दीजिए
18قَالَ أَلَمْ نُرَبِّكَ فِينَا وَلِيدًا وَلَبِثْتَ فِينَا مِنْ عُمُرِكَ سِنِينَ
(चुनान्चे मूसा गए और कहा) फिरऔन बोला (मूसा) क्या हमने तुम्हें यहाँ रख कर बचपने में तुम्हारी परवरिश नहीं की और तुम अपनी उम्र से बरसों हम मे रह सह चुके हो
19وَفَعَلْتَ فَعْلَتَكَ الَّتِي فَعَلْتَ وَأَنتَ مِنَ الْكَافِرِينَ
और तुम अपना वह काम (ख़ून क़िब्ती) जो कर गए और तुम (बड़े) नाशुक्रे हो
20قَالَ فَعَلْتُهَا إِذًا وَأَنَا مِنَ الضَّالِّينَ
मूसा ने कहा (हाँ) मैने उस वक्त उस काम को किया जब मै हालते ग़फलत में था
21فَفَرَرْتُ مِنكُمْ لَمَّا خِفْتُكُمْ فَوَهَبَ لِي رَبِّي حُكْمًا وَجَعَلَنِي مِنَ الْمُرْسَلِينَ
फिर जब मै आप लोगों से डरा तो भाग खड़ा हुआ फिर (कुछ अरसे के बाद) मेरे परवरदिगार ने मुझे नुबूवत अता फरमायी और मुझे भी एक पैग़म्बर बनाया
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
19आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 19

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Friday, October 2, 2026

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