अश-शुआरा · 190/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ ۝١٩٠
Inna fee zaalika la Aayah; wa maa kaana aksaruhum mu`mineen
📖 हिंदी अर्थ
इसमे भी शक नहीं कि इसमें (समझदारों के लिए) एक बड़ी इबरत है और उनमें के बहुतेरे ईमान लाने वाले ही न थे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • آيَةً: निशानी, सबक, सीख लेने की जगह
  • مُؤْمِنِينَ: ईमान लाने वाले, सच्चे विश्वासी

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि इसमें (यानी क़ौम-ए-शुऐब पर आए अज़ाब में) बड़ी निशानी और सबक़ है। यानी जिस तरह अल्लाह ने शुऐब अलैहिस्सलाम की क़ौम को उनके कुफ़्र और नाफ़रमानी की वजह से पकड़ा और उन्हें सख़्त अज़ाब में गिरफ़्तार किया, ये वाक़िया अपने आप में एक बहुत बड़ी सीख और इबरत है।

जो लोग इस क़िस्से को सुनते हैं और उस पर ग़ौर-ओ-फ़िक्र करते हैं, उनके लिए इसमें अल्लाह की क़ुदरत और उसके अज़ाब का सबूत मौजूद है। लेकिन अफ़सोस कि अक्सर लोग इन निशानियों से सबक़ नहीं लेते। उनमें से अधिकतर लोग ईमान लाने वाले नहीं थे, क्योंकि उनके दिलों पर मुहर लग चुकी थी और वे हक़ को क़बूल करने के लिए तैयार नहीं थे।

ये आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला ने अपने नबियों के ज़रिए हर क़ौम को हिदायत का रास्ता दिखाया, मगर ज़्यादातर लोग हक़ से मुँह मोड़ते रहे। ये उन लोगों के लिए एक बड़ी नसीहत है जो आज भी अल्लाह के दीन से ग़ाफ़िल हैं।

प्यारे भाइयों और बहनों! हमें चाहिए कि हम इन क़िस्सों से सबक़ लें और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इताअत और रसूल की पैरवी पर क़ायम करें। अल्लाह तआला ने हमें क़ुरआन जैसी नेमत दी है, जिसमें हर ज़माने के लिए हिदायत है। हमें उस पर अमल करना चाहिए और अपनी ज़िंदगी को नेकियों से भरना चाहिए, ताकि हम उन लोगों में से न हों जिन्होंने हक़ को सुनकर भी उसे क़बूल नहीं किया। अल्लाह हम सबको अमल की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।



📜 आयत 188-192 — सूरा अश-शुआरा

188قَالَ رَبِّي أَعْلَمُ بِمَا تَعْمَلُونَ
और शुएब ने कहा जो तुम लोग करते हो मेरा परवरदिगार ख़ूब जानता है
189فَكَذَّبُوهُ فَأَخَذَهُمْ عَذَابُ يَوْمِ الظُّلَّةِ ۚ إِنَّهُ كَانَ عَذَابَ يَوْمٍ عَظِيمٍ
ग़रज़ उन लोगों ने शुएब को झुठलाया तो उन्हें साएबान (अब्र) के अज़ाब ने ले डाला- इसमे शक नहीं कि ये भी एक बड़े (सख्त) दिन का अज़ाब था
190إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ
इसमे भी शक नहीं कि इसमें (समझदारों के लिए) एक बड़ी इबरत है और उनमें के बहुतेरे ईमान लाने वाले ही न थे
191وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ
और बेशक तुम्हारा परवरदिगार यक़ीनन (सब पर) ग़ालिब (और) बड़ा मेहरबान है
192وَإِنَّهُ لَتَنزِيلُ رَبِّ الْعَالَمِينَ
और (ऐ रसूल) बेशक ये (क़ुरान) सारी ख़ुदायी के पालने वाले (ख़ुदा) का उतारा हुआ है
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
190आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 190

सूरा अश-शुआरा आयत 190 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : इसमे भी शक नहीं कि इसमें (समझदारों के लिए) एक…

सूरा आयत 190/227 — सूरा अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अश-शुआरा सुनें, सूरा अश-शुआरा अनुवाद, सूरा अश-शुआरा mp3, सूरा अश-शुआरा pdf. आयत 188–192. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Saturday, October 3, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए