अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- العَزِيزُ: अत्यंत प्रतापी, सब पर विजय पाने वाला, जो अपनी शक्ति और प्रभुत्व में अद्वितीय हो।
- الرَّحِيمُ: अत्यंत दयालु, जो अपने बंदों पर असीम दया और करुणा करने वाला हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आपका रब, जिसने आपको भेजा है और जिसकी ओर आप बुलाते हैं, वह निश्चित रूप से अत्यंत प्रतापी और दयालु है। उसकी प्रतापी (इज़्ज़त) का अर्थ है कि वह अपने दुश्मनों से पूरा बदला लेने पर पूर्ण सामर्थ्य रखता है। जिन लोगों ने उसके रसूलों को झुठलाया और उनके ख़िलाफ़ साज़िशें रचीं—जैसे क़ौमे नूह, आद, समूद, फ़िरऔन और उसकी क़ौम—उन सबको उसने अपनी पकड़ में लिया और उन्हें इस तरह तबाह किया कि उनका कोई निशान नहीं बचा। यह उसकी प्रतापी का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
और उसकी दयालुता का अर्थ है कि वह अपने उन बंदों पर रहम करता है जो उसकी ओर रुजू करते हैं, तौबा करते हैं और उसकी एकता (तौहीद) पर ईमान लाते हैं। वह उनके गुनाहों को माफ कर देता है, उन्हें अपनी रहमत की छांव में ले लेता है और उन्हें दुनिया और आख़िरत की भलाइयाँ प्रदान करता है। यही उसका स्थायी क़ानून है—जो उसका विरोध करे, वह नष्ट हो जाए; और जो उसकी ओर झुके, वह सुरक्षित रहे।
यह आयत उन सात क़िस्सों के अंत में आई है जिनका उल्लेख इस सूरह में किया गया है। इन क़िस्सों का उद्देश्य आपको (ऐ नबी!) सांत्वना देना है, ताकि आपका दिल मजबूत हो और आपको यक़ीन हो कि जिस तरह पिछले नबियों को उनकी क़ौमों ने झुठलाया और अल्लाह ने उनकी मदद की और झुठलाने वालों को तबाह कर दिया, उसी तरह आपके साथ भी ऐसा ही होगा। साथ ही, यह उन झुठलाने वालों के लिए एक सख्त चेतावनी है कि अल्लाह की पकड़ से बचना नामुमकिन है। इन क़िस्सों में बार-बार यही बात दोहराई गई है—"और निश्चय ही आपका रब प्रतापी और दयालु है"—ताकि यह सच्चाई दिलों में गहराई तक बैठ जाए और नसीहत का असर ज़्यादा गहरा हो।
दावत (उपदेश):
ऐ अल्लाह के बंदो! इस आयत में दो ऐसे गुण बताए गए हैं जो हमें जीवन का सही रास्ता दिखाते हैं। पहला गुण है अल्लाह की प्रतापी (इज़्ज़त)—यह हमें सिखाती है कि हमें कभी उसकी नाफ़रमानी का साहस नहीं करना चाहिए, क्योंकि उसकी पकड़ बहुत सख्त है। दूसरा गुण है उसकी दयालुता (रहमत)—यह हमें उम्मीद देता है कि चाहे हमसे कितनी भी गलतियाँ हुई हों, अगर हम सच्चे दिल से उसकी ओर लौटें और तौबा करें, तो वह हमें माफ कर देगा और अपनी रहमत से नवाज़ेगा। यही दोनों गुण मिलकर हमें डर और उम्मीद के बीच संतुलित रखते हैं—डर इसलिए कि हम गुनाहों से बचें, और उम्मीद इसलिए कि हम उसकी रहमत से निराश न हों। आइए, हम अपने रब की इन्हीं दो सिफ़ात को अपने दिलों में बिठाएँ और उसकी इबादत में जुट जाएँ, क्योंकि वही सबसे बड़ा सहारा है।
📜 आयत 189-193 — अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 191
सूरा अश-शुआरा आयत 191 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और बेशक तुम्हारा परवरदिगार यक़ीनन (सब पर) ग़ालिब (और) बड़ा…सूरा आयत 191/227 — अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शुआरा सुनें, अश-शुआरा अनुवाद, अश-शुआरा mp3, अश-शुआरा pdf. आयत 189–193. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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