अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- الشُّعَرَاء: कवि (शायर)
- يَتَّبِعُهُمُ: उनका अनुसरण करते हैं
- الْغَاوُونَ: पथभ्रष्ट लोग, गुमराह, जो सत्य के मार्ग से भटक चुके हैं
व्याख्या:
इस आयत में अल्लाह तआला कवियों (शायरों) की उस स्थिति का वर्णन कर रहे हैं जब वे सत्य और सदाचार के विपरीत बातें कहते हैं। जब कवि झूठ, बुराई, और बेहूदा बातों को अपने काव्य का विषय बनाते हैं, तो उनके पीछे वही लोग चलते हैं जो पहले से ही गुमराह हैं—जो सत्य से भटके हुए हैं और जिन्हें सीधे रास्ते से कोई लगाव नहीं। ये गुमराह लोग उन कवियों की बातों को सुनते हैं, उन्हें आगे फैलाते हैं, और उनके झूठे विचारों को सच मान लेते हैं।
यह आयत उन काफिरों के संदर्भ में उतरी जो कहते थे कि मुहम्मद ﷺ भी एक कवि हैं और हम भी कवि हैं, हम भी वैसा ही कह सकते हैं। अल्लाह ने स्पष्ट कर दिया कि रसूल ﷺ का कथन कवियों के कथन जैसा नहीं है, क्योंकि कवियों का अनुसरण तो पथभ्रष्ट लोग करते हैं, जबकि रसूल ﷺ का अनुसरण सीधे मार्ग पर चलने वाले और सत्य के प्यासे लोग करते हैं।
इन कवियों की विशेषता यह है कि वे हर दिशा में भटकते हैं—कभी किसी की झूठी प्रशंसा करते हैं, कभी किसी की बुराई करते हैं, कभी सम्मानित लोगों को नीचा दिखाते हैं, कभी पवित्र महिलाओं पर आरोप लगाते हैं। वे ऐसी बातें कहते हैं जो वे स्वयं नहीं करते। यानी उनका काव्य उनके आचरण से मेल नहीं खाता—वे दूसरों को उपदेश देते हैं लेकिन खुद उस पर अमल नहीं करते।
दीनी पहलू और सीख:
यह आयत हमें सिखाती है कि वाणी और कला का उपयोग अल्लाह की राह में, सत्य के प्रचार में, और अच्छाई के संदेश को फैलाने में किया जाना चाहिए। कविता, कला, और साहित्य अपने आप में बुरे नहीं हैं, बल्कि जब इनका उपयोग झूठ, बुराई, और गुमराही के लिए किया जाए तो ये हानिकारक बन जाते हैं। इस्लाम ने कविता की अनुमति दी है, बशर्ते वह सत्य और सदाचार के अनुरूप हो। रसूल ﷺ के दरबार में हस्सान बिन साबित जैसे कवि थे जो इस्लाम की रक्षा के लिए कविता करते थे और रसूल ﷺ उन्हें प्रोत्साहित करते थे।
इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी जुबान, अपने लेखन, और अपनी कला का उपयोग अल्लाह की राह में करें—लोगों को सत्य की ओर बुलाएँ, अच्छाई का संदेश दें, और समाज में सुधार लाने का प्रयास करें। याद रखें, हमारी हर बात का हिसाब अल्लाह के सामने होगा, और जो लोग सत्य की राह पर चलते हैं, उनके पीछे अच्छे लोग चलते हैं, जबकि जो झूठ और बुराई फैलाते हैं, उनके पीछे केवल गुमराह लोग ही चलते हैं।
📜 आयत 222-226 — अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 224
सूरा अश-शुआरा आयत 224 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : हालाँकि उनमें के अक्सर तो (बिल्कुल) झूठे हैं और शायरों…सूरा आयत 224/227 — अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शुआरा सुनें, अश-शुआरा अनुवाद, अश-शुआरा mp3, अश-शुआरा pdf. आयत 222–226. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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