Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَلَمْ تَرَ: क्या तुमने नहीं देखा? (यानी, क्या तुम्हें मालूम नहीं?)
- فِي كُلِّ وَادٍ: हर वादी (मैदान) में
- يَهِيمُونَ: वे भटकते फिरते हैं (बिना किसी उद्देश्य के इधर-उधर भागते हैं)
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को संबोधित करते हुए फ़रमाते हैं: क्या आपने नहीं देखा कि ये शायर (कवि) हर वादी में भटकते फिरते हैं? यानी, ये लोग अपने कलाम (कविता) में कभी किसी की तारीफ़ करते हैं, तो कभी किसी की बुराई; कभी सच बोलते हैं, तो कभी झूठ; कभी इश्क़-मुहब्बत के किस्से सुनाते हैं, तो कभी लोगों का मज़ाक उड़ाते हैं। इनका कोई सिद्धांत नहीं होता, न ही ये किसी एक राह पर स्थिर रहते हैं। जिस तरह एक बेसुध इंसान बिना किसी मंज़िल के इधर-उधर भटकता रहता है, उसी तरह ये शायर अपने ख़यालात की दुनिया में भटکते रहते हैं।
ये शायर अक्सर झूठ और बातिल (असत्य) की तरफ़ लोगों को ले जाते हैं। वे लोगों की इज़्ज़त को नुक़्सान पहुँचाते हैं, पाक-दामन औरतों पर तोहमत लगाते हैं, नेक लोगों को बुरा कहते हैं और बुरे लोगों की तारीफ़ में मुबालग़ा करते हैं। वे ऐसी बातें कहते हैं जो ख़ुद नहीं करते — यानी, उनके दावे और उनके अमल में कोई मुनासिबत नहीं होती।
यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान को चाहिए कि वह अपनी ज़ुबान और अपने कलाम में सच्चाई और स्थिरता अपनाए। जो लोग सिर्फ़ लोगों को भड़काने, झूठ फैलाने और फ़ितना पैदा करने के लिए बोलते हैं, वे अल्लाह की नज़र में बहुत बुरे हैं। लेकिन जो लोग सच बोलते हैं, नेकी की तरफ़ बुलाते हैं और अल्लाह के बंदों को भलाई की राह दिखाते हैं, उनके लिए अल्लाह के पास बड़ा अज्र (इनाम) है।
इस आयत से हमें यह भी सबक़ मिलता है कि हमें अपने कलाम (बोल) में हमेशा सच्चाई, नेकी और इंसाफ़ को अपनाना चाहिए। हमें उन लोगों से बचना चाहिए जो बातिल की तरफ़ ले जाते हैं और लोगों को गुमराह करते हैं। अल्लाह तआला हमें सच्चाई पर स्थिर रहने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
📜 आयत 223-227 — सूरा अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 225
सूरा अश-शुआरा आयत 225 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या तुम नहीं देखते कि ये लोग जंगल जंगल सरगिरदॉ…सूरा आयत 225/227 — सूरा अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अश-शुआरा सुनें, सूरा अश-शुआरा अनुवाद, सूरा अश-शुआरा mp3, सूरा अश-शुआरा pdf. आयत 223–227. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अश-शुआरा
पवित्र क़ुरआन
Sunday, October 4, 2026
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