अश-शुआरा · 223/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
يُلْقُونَ السَّمْعَ وَأَكْثَرُهُمْ كَاذِبُونَ ۝٢٢٣
Yulqoonas sam`a wa aksaruhum aaziboon
📖 हिंदी अर्थ
जो (फ़रिश्तों की बातों पर कान लगाए रहते हैं) कि कुछ सुन पाएँ
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يُلْقُونَ السَّمْعَ: कान लगाकर सुनना, चुपके से सुनना (فرشتوں کی باتوں کو چھپ کر سننا)
  • أَكْثَرُهُمْ كَاذِبُونَ: उनमें से अधिकतर झूठे हैं

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में शैतानों के हालात बयान कर रहे हैं कि वे आसमान की तरफ कान लगाकर फ़रिश्तों की बातें चुराने की कोशिश करते हैं। ये शैतान काहिनों (ज्योतिषियों, भविष्यवक्ताओं) और उन जैसे बदकार लोगों पर उतरते हैं। जब ये शैतान आसमान से कोई बात चुराकर लाते हैं, तो उसे अपने साथियों (काहिनों) तक पहुँचाते हैं, लेकिन उनमें से अधिकतर झूठे होते हैं।

इसका मतलब यह है कि काहिन और ज्योतिषी जो कुछ भी बताते हैं, उसमें सच्चाई का अंश बहुत कम होता है। हो सकता है कि कभी-कभी वे एक सच्ची बात कह दें, लेकिन उसके साथ वे सौ झूठ मिला देते हैं। जैसा कि हदीस में आया है कि शैतान आसमान की बातें चुराकर काहिन के कान में डाल देता है, फिर काहिन उस एक सच्ची बात के साथ सौ झूठ जोड़ देता है।

यह आयत हमें सिखाती है कि हमें काहिनों, ज्योतिषियों, रम्मालों और भविष्यवक्ताओं की बातों पर विश्वास नहीं करना चाहिए। ये सब शैतान के साथी हैं और इनकी बातों में सच्चाई नहीं होती। इस्लाम में इनके पास जाना और इनकी बातों पर यकीन करना बड़ा गुनाह है।

प्यारे भाइयों और बहनों! हमें अपना जीवन अल्लाह की किताब (कुरआन) और उसके नबी ﷺ की सुन्नत के अनुसार बनाना चाहिए। किसी भी इंसान को भविष्य का ज्ञान नहीं है, सिवाय अल्लाह के। जो लोग आपको भविष्य बताने का दावा करते हैं, वे या तो झूठे हैं या शैतान के सहारे हैं। सच्ची कामयाबी अल्लाह की इबादत में है, उसकी राह पर चलने में है। अल्लाह हमें सीधी राह पर चलने की तौफीक दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 221-225 — अश-शुआरा

221هَلْ أُنَبِّئُكُمْ عَلَىٰ مَن تَنَزَّلُ الشَّيَاطِينُ
बेशक वह बड़ा सुनने वाला वाक़िफ़कार है क्या मै तुम्हें बता दूँ कि शयातीन किन लोगों पर नाज़िल हुआ करते हैं
222تَنَزَّلُ عَلَىٰ كُلِّ أَفَّاكٍ أَثِيمٍ
(लो सुनो) ये लोग झूठे बद किरदार पर नाज़िल हुआ करते हैं
223يُلْقُونَ السَّمْعَ وَأَكْثَرُهُمْ كَاذِبُونَ
जो (फ़रिश्तों की बातों पर कान लगाए रहते हैं) कि कुछ सुन पाएँ
224وَالشُّعَرَاءُ يَتَّبِعُهُمُ الْغَاوُونَ
हालाँकि उनमें के अक्सर तो (बिल्कुल) झूठे हैं और शायरों की पैरवी तो गुमराह लोग किया करते हैं
225أَلَمْ تَرَ أَنَّهُمْ فِي كُلِّ وَادٍ يَهِيمُونَ
क्या तुम नहीं देखते कि ये लोग जंगल जंगल सरगिरदॉ मारे मारे फिरते हैं
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अनुवाद — अश-शुआरा 223

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Tuesday, August 18, 2026

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