Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لِمَنْ حَوْلَهُ: अपने आस-पास के लोगों से (अर्थात फ़िरऔन के दरबार के सरदारों और निकटवर्ती अधिकारियों से)
- أَلَا تَسْتَمِعُونَ: क्या तुम सुनते नहीं हो? (विस्मय और आश्चर्य के साथ कहा गया)
तफ़सीर (व्याख्या):
जब मूसा (अलैहिस्सलाम) ने फ़िरऔन के सामने अपने रब का परिचय दिया—जो आसमानों और ज़मीन का मालिक है और जो कुछ भी इन दोनों के बीच है उसका स्वामी है—तो फ़िरऔन अत्यंत आश्चर्यचकित और हैरान रह गया। उसका अहंकार और घमंड उसे सत्य स्वीकार करने से रोक रहा था, लेकिन मूसा का उत्तर इतना स्पष्ट और तर्कसंगत था कि उसके पास कोई जवाब नहीं था। इसलिए उसने अपने दरबार के सरदारों और आस-पास बैठे लोगों की ओर मुखातिब होकर व्यंग्य और उपहास के स्वर में कहा: "क्या तुम सुनते नहीं हो?" यानी क्या तुमने इस व्यक्ति की बात सुनी? यह कह रहा है कि मेरे अलावा कोई और रब है! वह उनका ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहता था कि मूसा की बात कितनी अजीब और निराधार है, जबकि असल में अजीब बात यह थी कि एक बंदा (फ़िरऔन) अपने आपको रब कहने का दावा कर रहा था।
फ़िरऔन ने यह बात इसलिए कही ताकि अपने दरबारियों को अपनी तरफ़ मज़बूत कर सके और उनके दिलों में मूसा की बात को बेकार और हास्यास्पद साबित कर सके। वह चाहता था कि लोग उसकी बात को गंभीरता से न लें, बल्कि उसका मज़ाक उड़ाएँ। लेकिन सच्चाई तो यह थी कि मूसा (अलैहिस्सलाम) की दलील इतनी मज़बूत थी कि उसे सुनने वाला हर समझदार इंसान उसे मानने पर मजबूर हो जाता, अगर उसका दिल अहंकार और हठधर्मिता से भरा न होता।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि सत्य का प्रचार करते समय अगर सामने वाला व्यक्ति घमंडी और अहंकारी हो, तो वह सत्य को सुनकर भी उसे झुठलाने की कोशिश करता है और दूसरों को भी सत्य से दूर रखने की पूरी कोशिश करता है। लेकिन एक सच्चे दावत देने वाले को कभी निराश नहीं होना चाहिए। मूसा (अलैहिस्सलाम) ने फ़िरऔन जैसे ज़ालिम के सामने भी सत्य की बात बिना किसी डर के कही। हमें भी चाहिए कि हम अपने जीवन में सत्य को अपनाएँ और उस पर दृढ़ रहें, चाहे सामने कोई भी हो। अल्लाह तआला सत्य बोलने वालों की मदद करता है और उन्हें कामयाबी देता है। याद रखें, फ़िरऔन की सारी शक्ति और साम्राज्य के बावजूद उसका नाम आज इतिहास में ज़ालिम के रूप में दर्ज है, जबकि मूसा (अलैहिस्सलाम) का नाम पैग़ंबर और सच्चे दावत देने वाले के रूप में हमेशा के लिए अमर हो गया। सत्य की ही जीत होती है, चाहे देर से ही सही।
📜 आयत 23-27 — सूरा अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 25
सूरा अश-शुआरा आयत 25 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिरऔन ने उन लोगो से जो उसके इर्द गिर्द (बैठे)…सूरा आयत 25/227 — सूरा अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अश-शुआरा सुनें, सूरा अश-शुआरा अनुवाद, सूरा अश-शुआरा mp3, सूरा अश-शुआरा pdf. आयत 23–27. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अश-शुआरा
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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