अश-शुआरा · 25/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
قَالَ لِمَنْ حَوْلَهُ أَلَا تَسْتَمِعُونَ ۝٢٥
Qaala liman hawlahooo alaa tastami`oon
📖 हिंदी अर्थ
फिरऔन ने उन लोगो से जो उसके इर्द गिर्द (बैठे) थे कहा क्या तुम लोग नहीं सुनते हो
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لِمَنْ حَوْلَهُ: अपने आस-पास के लोगों से (अर्थात फ़िरऔन के दरबार के सरदारों और निकटवर्ती अधिकारियों से)
  • أَلَا تَسْتَمِعُونَ: क्या तुम सुनते नहीं हो? (विस्मय और आश्चर्य के साथ कहा गया)

तफ़सीर (व्याख्या):

जब मूसा (अलैहिस्सलाम) ने फ़िरऔन के सामने अपने रब का परिचय दिया—जो आसमानों और ज़मीन का मालिक है और जो कुछ भी इन दोनों के बीच है उसका स्वामी है—तो फ़िरऔन अत्यंत आश्चर्यचकित और हैरान रह गया। उसका अहंकार और घमंड उसे सत्य स्वीकार करने से रोक रहा था, लेकिन मूसा का उत्तर इतना स्पष्ट और तर्कसंगत था कि उसके पास कोई जवाब नहीं था। इसलिए उसने अपने दरबार के सरदारों और आस-पास बैठे लोगों की ओर मुखातिब होकर व्यंग्य और उपहास के स्वर में कहा: "क्या तुम सुनते नहीं हो?" यानी क्या तुमने इस व्यक्ति की बात सुनी? यह कह रहा है कि मेरे अलावा कोई और रब है! वह उनका ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहता था कि मूसा की बात कितनी अजीब और निराधार है, जबकि असल में अजीब बात यह थी कि एक बंदा (फ़िरऔन) अपने आपको रब कहने का दावा कर रहा था।

फ़िरऔन ने यह बात इसलिए कही ताकि अपने दरबारियों को अपनी तरफ़ मज़बूत कर सके और उनके दिलों में मूसा की बात को बेकार और हास्यास्पद साबित कर सके। वह चाहता था कि लोग उसकी बात को गंभीरता से न लें, बल्कि उसका मज़ाक उड़ाएँ। लेकिन सच्चाई तो यह थी कि मूसा (अलैहिस्सलाम) की दलील इतनी मज़बूत थी कि उसे सुनने वाला हर समझदार इंसान उसे मानने पर मजबूर हो जाता, अगर उसका दिल अहंकार और हठधर्मिता से भरा न होता।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि सत्य का प्रचार करते समय अगर सामने वाला व्यक्ति घमंडी और अहंकारी हो, तो वह सत्य को सुनकर भी उसे झुठलाने की कोशिश करता है और दूसरों को भी सत्य से दूर रखने की पूरी कोशिश करता है। लेकिन एक सच्चे दावत देने वाले को कभी निराश नहीं होना चाहिए। मूसा (अलैहिस्सलाम) ने फ़िरऔन जैसे ज़ालिम के सामने भी सत्य की बात बिना किसी डर के कही। हमें भी चाहिए कि हम अपने जीवन में सत्य को अपनाएँ और उस पर दृढ़ रहें, चाहे सामने कोई भी हो। अल्लाह तआला सत्य बोलने वालों की मदद करता है और उन्हें कामयाबी देता है। याद रखें, फ़िरऔन की सारी शक्ति और साम्राज्य के बावजूद उसका नाम आज इतिहास में ज़ालिम के रूप में दर्ज है, जबकि मूसा (अलैहिस्सलाम) का नाम पैग़ंबर और सच्चे दावत देने वाले के रूप में हमेशा के लिए अमर हो गया। सत्य की ही जीत होती है, चाहे देर से ही सही।

🎧 सुनें

📜 आयत 23-27 — अश-शुआरा

23قَالَ فِرْعَوْنُ وَمَا رَبُّ الْعَالَمِينَ
फिरऔन ने पूछा (अच्छा ये तो बताओ) रब्बुल आलमीन क्या चीज़ है
24قَالَ رَبُّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا ۖ إِن كُنتُم مُّوقِنِينَ
मूसा ने कहाँ सारे आसमान व ज़मीन का और जो कुछ इन दोनों के दरमियान है (सबका) मालिक अगर आप लोग यक़ीन कीजिए (तो काफी है)
25قَالَ لِمَنْ حَوْلَهُ أَلَا تَسْتَمِعُونَ
फिरऔन ने उन लोगो से जो उसके इर्द गिर्द (बैठे) थे कहा क्या तुम लोग नहीं सुनते हो
26قَالَ رَبُّكُمْ وَرَبُّ آبَائِكُمُ الْأَوَّلِينَ
मूसा ने कहा (वही ख़ुदा जो कि) तुम्हारा परवरदिगार और तुम्हारे बाप दादाओं का परवरदिगार है
27قَالَ إِنَّ رَسُولَكُمُ الَّذِي أُرْسِلَ إِلَيْكُمْ لَمَجْنُونٌ
फिरऔन ने कहा (लोगों) ये रसूल जो तुम्हारे पास भेजा गया है हो न हो दीवाना है
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अनुवाद — अश-शुआरा 25

सूरा अश-शुआरा आयत 25 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिरऔन ने उन लोगो से जो उसके इर्द गिर्द (बैठे)…

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Tuesday, August 18, 2026

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