अश-शुआरा · 34/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
قَالَ لِلْمَلَإِ حَوْلَهُ إِنَّ هَٰذَا لَسَاحِرٌ عَلِيمٌ ۝٣٤
Qaala lilmala-i hawlahooo inna haazaa lasaahirun `aleem
📖 हिंदी अर्थ
(इस पर) फिरऔन अपने दरबारियों से जो उसके गिर्द (बैठे) थे कहने लगा

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • الْمَلَإِ: क़ौम के बड़े-बड़े सरदार और रईस लोग।
  • حَوْلَهُ: उसके आस-पास (फ़िरऔन के इर्द-गिर्द)।
  • لَسَاحِرٌ عَلِيمٌ: बड़ा माहिर (हुनरमंद) जादूगर, जो जादू के इल्म में पूरी तरह पारंगत हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब अल्लाह के नबी मूसा (अलैहिस्सलाम) ने फ़िरऔन के सामने अपना असा (लाठी) डाला और वह एक बड़ा अज़दहा (साँप) बन गया, और उन्होंने अपना हाथ अपनी जेब से निकाला तो वह चमकता हुआ सफ़ेद नूरानी हो गया, तो फ़िरऔन अपनी हुकूमत और अपने झूठे देवत्व (ख़ुदाई) के दावे को ख़तरे में देखकर घबरा गया। उसने अपने दरबार के सरदारों और रईसों की तरफ़ रुख़ किया, जो उसके इर्द-गिर्द खड़े थे, और उनसे कहा: "यह शख़्स (मूसा) कोई नबी या रसूल नहीं है, बल्कि यह एक बहुत बड़ा माहिर जादूगर है, जो जादू के इल्म में कमाल की मुकम्मल दक्षता रखता है।"

फ़िरऔन ने यह बात इसलिए कही ताकि लोगों के दिलों में मूसा (अलैहिस्सलाम) के मु'जिज़े (चमत्कार) का असर ख़त्म हो जाए, और वह उन्हें यह समझा सके कि यह कोई ईश्वरीय चमत्कार नहीं, बल्कि महज़ एक जादू है, जिसे वह अपनी तरफ़ से पेश कर रहा है। वह जानता था कि अगर लोगों ने इसे सच्चा मान लिया, तो उसकी सारी सत्ता और शोहरत मिट्टी में मिल जाएगी। इसलिए उसने पहले से ही लोगों के ज़हनों में शुबहा (संदेह) पैदा करने की कोशिश की, ताकि वे सच्चाई को क़बूल न करें।

दावती पहलू (नसीहत और रहनुमाई):

यह आयत हमें सिखाती है कि बातिल (झूठ) की ताक़तें जब सच्चाई के सामने आती हैं, तो वे उसे दबाने के लिए हर हथकंडा अपनाती हैं। फ़िरऔन ने साफ़ सच्चाई देखने के बावजूद उसे जादू कहकर झुठलाया, क्योंकि उसका दिल ग़रूर और हुकूमत की मोहब्बत से अंधा हो चुका था। इससे हमें सबक़ मिलता है कि हमें सच्चाई को क़बूल करने में हिचकिचाना नहीं चाहिए, चाहे वह किसी भी शख़्स की तरफ़ से आए। अल्लाह के दीन की निशानियाँ और उसके नबियों के मु'जिज़ात हक़ हैं, और हक़ को कभी बातिल की तरफ़ से झुठलाया नहीं जा सकता। आज भी जो लोग क़ुरआन और सुन्नत की रौशनी में आने वाली सच्चाइयों को नज़रअंदाज़ करते हैं, वही फ़िरऔन का रास्ता अपनाते हैं। हमें चाहिए कि हम हक़ को पहचानें, उस पर अमल करें, और बातिल के डर से कभी पीछे न हटें। अल्लाह तआला अपने नबियों की मदद करता है, और हक़ को बुलंद करके रहता है।



📜 आयत 32-36 — सूरा अश-शुआरा

32فَأَلْقَىٰ عَصَاهُ فَإِذَا هِيَ ثُعْبَانٌ مُّبِينٌ
बस (ये सुनते ही) मूसा ने अपनी छड़ी (ज़मीन पर) डाल दी फिर तो यकायक वह एक सरीही अज़दहा बन गया
33وَنَزَعَ يَدَهُ فَإِذَا هِيَ بَيْضَاءُ لِلنَّاظِرِينَ
और (जेब से) अपना हाथ बाहर निकाला तो यकायक देखने वालों के वास्ते बहुत सफेद चमकदार था
34قَالَ لِلْمَلَإِ حَوْلَهُ إِنَّ هَٰذَا لَسَاحِرٌ عَلِيمٌ
(इस पर) फिरऔन अपने दरबारियों से जो उसके गिर्द (बैठे) थे कहने लगा
35يُرِيدُ أَن يُخْرِجَكُم مِّنْ أَرْضِكُم بِسِحْرِهِ فَمَاذَا تَأْمُرُونَ
कि ये तो यक़ीनी बड़ा खिलाड़ी जादूगर है ये तो चाहता है कि अपने जादू के ज़ोर से तुम्हें तुम्हारे मुल्क से बाहर निकाल दे तो तुम लोग क्या हुक्म लगाते हो
36قَالُوا أَرْجِهْ وَأَخَاهُ وَابْعَثْ فِي الْمَدَائِنِ حَاشِرِينَ
दरबारियों ने कहा अभी इसको और इसके भाई को (चन्द) मोहलत दीजिए
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
34आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 34

सूरा अश-शुआरा आयत 34 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (इस पर) फिरऔन अपने दरबारियों से जो उसके गिर्द (बैठे)…

सूरा आयत 34/227 — सूरा अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अश-शुआरा सुनें, सूरा अश-शुआरा अनुवाद, सूरा अश-शुआरा mp3, सूरा अश-शुआरा pdf. आयत 32–36. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Friday, October 2, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए