अन-नमल · 56/93
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नमल
۞ فَمَا كَانَ جَوَابَ قَوْمِهِ إِلَّا أَن قَالُوا أَخْرِجُوا آلَ لُوطٍ مِّن قَرْيَتِكُمْ ۖ إِنَّهُمْ أُنَاسٌ يَتَطَهَّرُونَ ۝٥٦
Fammaa kaana jawaaba qawmiheee illaaa an qaalooo akrijoon aalaa Lootim min qaryatikum innahum unaasuny yatatahharoon
📖 हिंदी अर्थ
कि वह लोग बोल उठे कि लूत के खानदान को अपनी बस्ती (सदूम) से निकाल बाहर करो ये लोग बड़े पाक साफ बनना चाहते हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • جَوَابَ – उत्तर
  • آلَ لُوطٍ – लूत (अलैहिस्सलाम) की क़ौम (परिवार और अनुयायी)
  • يَتَطَهَّرُونَ – पवित्रता अपनाते हैं, गंदगी और अशुद्धि से बचते हैं

तफ़सीर:

जब हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को उस घिनौने काम (समलैंगिकता) से रोका और उन्हें अल्लाह की इबादत की ओर बुलाया, तो उनकी क़ौम का जवाब बेहद दुखद और उपहासपूर्ण था। उन्होंने कहा: "इन लोगों को अपने गाँव से निकाल दो, ये लोग पवित्रता अपनाते हैं!"

ग़ौर कीजिए, उन्होंने पवित्रता को जुर्म ठहरा दिया और गुनाह को अपना तरीक़ा बना लिया। वे हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) और उनके अनुयायियों का मज़ाक उड़ा रहे थे, क्योंकि ये लोग उनके गंदे कामों में शामिल नहीं होते थे और उन्हें बुराई से रोकते थे। उनकी सोच इतनी विकृत हो चुकी थी कि उन्हें अपना घिनौना काम अच्छा लगता था और पाक-साफ़ रहने वालों को वे बुरा समझते थे।

यह आयत हमें सिखाती है कि जब समाज में बुराई आम हो जाती है, तो नेक लोगों को अजीब और परेशान करने वाला समझा जाता है। लेकिन एक मोमिन को कभी भी समाज के दबाव में आकर अपने ईमान और पवित्रता से समझौता नहीं करना चाहिए। अल्लाह की राह पर चलने वालों को दुनिया में तकलीफ़ें आती हैं, लेकिन अल्लाह उन्हें अकेला नहीं छोड़ता। जैसा कि इसी क़िस्से में आगे आता है कि अल्लाह ने हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) और उनके साथियों को नजात दी और बुराई करने वालों को हलाक कर दिया।

इस आयत से हमें यह भी सबक मिलता है कि बुराई पर अड़े रहने वाले लोग नेकी का मज़ाक उड़ाते हैं, लेकिन अल्लाह की मदद नेक लोगों के साथ होती है। हमें चाहिए कि हम अपनी पवित्रता और नेकी पर डटे रहें, चाहे लोग हमारा मज़ाक उड़ाएँ या हमें बुरा कहें। अल्लाह ही असली मददगार है और वही अपने नेक बंदों की इज़्ज़त करता है।



📜 आयत 54-58 — सूरा अन-नमल

54وَلُوطًا إِذْ قَالَ لِقَوْمِهِ أَتَأْتُونَ الْفَاحِشَةَ وَأَنتُمْ تُبْصِرُونَ
और (ऐ रसूल) लूत को (याद करो) जब उन्होंने अपनी क़ौम से कहा कि क्या तुम देखभाल कर (समझ बूझ कर) ऐसी बेहयाई करते हो
55أَئِنَّكُمْ لَتَأْتُونَ الرِّجَالَ شَهْوَةً مِّن دُونِ النِّسَاءِ ۚ بَلْ أَنتُمْ قَوْمٌ تَجْهَلُونَ
क्या तुम औरतों को छोड़कर शहवत से मर्दों के आते हो (ये तुम अच्छा नहीं करते) बल्कि तुम लोग बड़ी जाहिल क़ौम हो तो लूत की क़ौम का इसके सिवा कुछ जवाब न था
56۞ فَمَا كَانَ جَوَابَ قَوْمِهِ إِلَّا أَن قَالُوا أَخْرِجُوا آلَ لُوطٍ مِّن قَرْيَتِكُمْ ۖ إِنَّهُمْ أُنَاسٌ يَتَطَهَّرُونَ
कि वह लोग बोल उठे कि लूत के खानदान को अपनी बस्ती (सदूम) से निकाल बाहर करो ये लोग बड़े पाक साफ बनना चाहते हैं
57فَأَنجَيْنَاهُ وَأَهْلَهُ إِلَّا امْرَأَتَهُ قَدَّرْنَاهَا مِنَ الْغَابِرِينَ
ग़रज हमने लूत को और उनके ख़ानदान को बचा लिया मगर उनकी बीवी कि हमने उसकी तक़दीर में पीछे रह जाने वालों में लिख दिया था
58وَأَمْطَرْنَا عَلَيْهِم مَّطَرًا ۖ فَسَاءَ مَطَرُ الْمُنذَرِينَ
और (फिर तो) हमने उन लोगों पर (पत्थर का) मेंह बरसाया तो जो लोग डराए जा चुके थे उन पर क्या बुरा मेंह बरसा
अन-नमलकुरान सूची
93आयत
मक्कीअवतरण स्थान
56आयत

अनुवाद — अन-नमल 56

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Friday, October 2, 2026

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