अन-नमल · 67/93
अनुवाद उच्चारण — अन-नमल
وَقَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا أَإِذَا كُنَّا تُرَابًا وَآبَاؤُنَا أَئِنَّا لَمُخْرَجُونَ ۝٦٧
Wa qaalal lazeena kafarooo `a-izaa kunnaa turaabanw wa aabaaa`unaaa a`innaa lamukhrajoon
📖 हिंदी अर्थ
और कुफ्फार कहने लगे कि क्या जब हम और हमारे बाप दादा (सड़ गल कर) मिट्टी हो जाएँगें तो क्या हम फिर निकाले जाएँगें

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَإِذَا كُنَّا تُرَابًا: क्या जब हम मिट्टी हो जाएँगे (मरकर खाक में मिल जाएँगे)
  • وَآبَاؤُنَا: और हमारे बाप-दादा (जो पहले ही मर चुके हैं)
  • أَئِنَّا لَمُخْرَجُونَ: क्या हम (कब्रों से) निकाले जाने वाले हैं (यानी दोबारा ज़िंदा किए जाएँगे)

तफसीर:

यह आयत उन काफिरों का हाल बयान कर रही है जिन्होंने अल्लाह की वहदानियत (एकता) और क़यामत के दिन को मानने से इनकार किया। ये लोग अपनी समझ में बहुत बड़ी ग़लती पर थे — वे पुनर्जीवन (आख़िरत) को नामुमकिन समझते थे और अंजाम की परवाह नहीं करते थे।

उन्होंने अजीब अंदाज़ में कहा: "क्या जब हम मरकर मिट्टी हो जाएँगे — और हमारे बाप-दादा भी — तो क्या हम कब्रों से निकाले जाएँगे?" यानी वे इस बात को असंभव और बेतुका समझते थे कि सड़ी-गली हड्डियाँ और मिट्टी में मिला हुआ इंसान दोबारा ज़िंदा होकर उठ खड़ा होगा। उनकी यह बात अल्लाह की क़ुदरत (शक्ति) पर शक करने वाली थी, जबकि अल्लाह ने उन्हें पहली बार पैदा किया — और जो पहली बार पैदा कर सकता है, वह दोबारा पैदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर है।

यह आयत हमें सिखाती है कि मौत अंत नहीं है, बल्कि एक दरवाज़ा है — उसके बाद हिसाब की ज़िंदगी है। जो लोग इस पर शक करते हैं, वह अल्लाह की क़ुदरत को नहीं समझते। अल्लाह ने पहली बार पैदा करके यह सबूत दे दिया कि दोबारा ज़िंदा करना उसके लिए बिल्कुल आसान है। जिसने आसमान और ज़मीन बनाई, उसके लिए इंसान को दोबारा ज़िंदा करना क्या मुश्किल है?

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें आख़िरत पर ईमान लाने की तरग़ीब देती है। जो इंसान यक़ीन रखता है कि उसे दोबारा ज़िंदा होकर अल्लाह के सामने हिसाब देना है, वह कभी गुनाहों में नहीं डूबता, बल्कि नेक कामों की तरफ दौड़ता है। क़यामत का दिन हक़ है, और उस दिन हर अच्छाई और बुराई का बदला मिलेगा। यही ईमान इंसान को ज़िंदगी में सीधे रास्ते पर चलाता है और उसे अल्लाह की रहमत का हक़दार बनाता है।



📜 आयत 65-69 — अन-नमल

65قُل لَّا يَعْلَمُ مَن فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ الْغَيْبَ إِلَّا اللَّهُ ۚ وَمَا يَشْعُرُونَ أَيَّانَ يُبْعَثُونَ
(ऐ रसूल इन से) कह दो कि जितने लोग आसमान व ज़मीन में हैं उनमे से कोई भी गैब की बात के सिवा नहीं जानता और वह भी तो नहीं समझते कि क़ब्र से दोबारा कब ज़िन्दा उठ खडे क़िए जाएँगें
66بَلِ ادَّارَكَ عِلْمُهُمْ فِي الْآخِرَةِ ۚ بَلْ هُمْ فِي شَكٍّ مِّنْهَا ۖ بَلْ هُم مِّنْهَا عَمُونَ
बल्कि (असल ये है कि) आख़िरत के बारे में उनके इल्म का ख़ात्मा हो गया है बल्कि उसकी तरफ से शक में पड़ें हैं बल्कि (सच ये है कि) इससे ये लोग अंधे बने हुए हैं
67وَقَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا أَإِذَا كُنَّا تُرَابًا وَآبَاؤُنَا أَئِنَّا لَمُخْرَجُونَ
और कुफ्फार कहने लगे कि क्या जब हम और हमारे बाप दादा (सड़ गल कर) मिट्टी हो जाएँगें तो क्या हम फिर निकाले जाएँगें
68لَقَدْ وُعِدْنَا هَٰذَا نَحْنُ وَآبَاؤُنَا مِن قَبْلُ إِنْ هَٰذَا إِلَّا أَسَاطِيرُ الْأَوَّلِينَ
उसका तो पहले भी हम से और हमारे बाप दादाओं से वायदा किया गया था (कहाँ का उठना और कैसी क़यामत) ये तो हो न हो अगले लोगों के ढकोसले हैं
69قُلْ سِيرُوا فِي الْأَرْضِ فَانظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُجْرِمِينَ
(ऐ रसूल) लोगों से कह दो कि रुए ज़मीन पर ज़रा चल फिर कर देखो तो गुनाहगारों का अन्जाम क्या हुआ
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अनुवाद — अन-नमल 67

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Tuesday, August 18, 2026

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