अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَإِذَا كُنَّا تُرَابًا: क्या जब हम मिट्टी हो जाएँगे (मरकर खाक में मिल जाएँगे)
- وَآبَاؤُنَا: और हमारे बाप-दादा (जो पहले ही मर चुके हैं)
- أَئِنَّا لَمُخْرَجُونَ: क्या हम (कब्रों से) निकाले जाने वाले हैं (यानी दोबारा ज़िंदा किए जाएँगे)
तफसीर:
यह आयत उन काफिरों का हाल बयान कर रही है जिन्होंने अल्लाह की वहदानियत (एकता) और क़यामत के दिन को मानने से इनकार किया। ये लोग अपनी समझ में बहुत बड़ी ग़लती पर थे — वे पुनर्जीवन (आख़िरत) को नामुमकिन समझते थे और अंजाम की परवाह नहीं करते थे।
उन्होंने अजीब अंदाज़ में कहा: "क्या जब हम मरकर मिट्टी हो जाएँगे — और हमारे बाप-दादा भी — तो क्या हम कब्रों से निकाले जाएँगे?" यानी वे इस बात को असंभव और बेतुका समझते थे कि सड़ी-गली हड्डियाँ और मिट्टी में मिला हुआ इंसान दोबारा ज़िंदा होकर उठ खड़ा होगा। उनकी यह बात अल्लाह की क़ुदरत (शक्ति) पर शक करने वाली थी, जबकि अल्लाह ने उन्हें पहली बार पैदा किया — और जो पहली बार पैदा कर सकता है, वह दोबारा पैदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर है।
यह आयत हमें सिखाती है कि मौत अंत नहीं है, बल्कि एक दरवाज़ा है — उसके बाद हिसाब की ज़िंदगी है। जो लोग इस पर शक करते हैं, वह अल्लाह की क़ुदरत को नहीं समझते। अल्लाह ने पहली बार पैदा करके यह सबूत दे दिया कि दोबारा ज़िंदा करना उसके लिए बिल्कुल आसान है। जिसने आसमान और ज़मीन बनाई, उसके लिए इंसान को दोबारा ज़िंदा करना क्या मुश्किल है?
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें आख़िरत पर ईमान लाने की तरग़ीब देती है। जो इंसान यक़ीन रखता है कि उसे दोबारा ज़िंदा होकर अल्लाह के सामने हिसाब देना है, वह कभी गुनाहों में नहीं डूबता, बल्कि नेक कामों की तरफ दौड़ता है। क़यामत का दिन हक़ है, और उस दिन हर अच्छाई और बुराई का बदला मिलेगा। यही ईमान इंसान को ज़िंदगी में सीधे रास्ते पर चलाता है और उसे अल्लाह की रहमत का हक़दार बनाता है।
📜 आयत 65-69 — अन-नमल
अनुवाद — अन-नमल 67
सूरा अन-नमल आयत 67 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और कुफ्फार कहने लगे कि क्या जब हम और हमारे…सूरा आयत 67/93 — अन-नमल النمل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नमल सुनें, अन-नमल अनुवाद, अन-नमल mp3, अन-नमल pdf. आयत 65–69. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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