अल-क़सस · 11/88
अनुवाद उच्चारण — अल-क़सस
وَقَالَتْ لِأُخْتِهِ قُصِّيهِ ۖ فَبَصُرَتْ بِهِ عَن جُنُبٍ وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ ۝١١
Wa qaalat li ukhtihee qusseehi fabasurat bihee `an junubinw wahum laa yash`uroon
📖 हिंदी अर्थ
और मूसा की माँ ने (दरिया में डालते वक्त) उनकी बहन (कुलसूम) से कहा कि तुम इसके पीछे पीछे (अलग) चली जाओ तो वह मूसा को दूर से देखती रही और उन लोगो को उसकी ख़बर भी न हुई

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • قُصِّيهِ (क़ुस्सीहि): उसका पीछा करो, उसके निशान पर जाओ।
  • عَن جُنُبٍ (अन जुनुबिन): दूर से, छिपकर, बिना किसी को बताए।
  • لَا يَشْعُرُونَ (ला यश'उरून): उन्हें पता नहीं चलता, वे भाँप नहीं पाते।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) की माँ ने अल्लाह के इशारे पर अपने नन्हें बच्चे को संदूक में रखकर दरिया में डाला, तो उनका दिल घबराहट और चिंता से भर गया। लेकिन अल्लाह ने उनके दिल को सुकून दिया और उन्हें यक़ीन दिलाया कि वह बच्चा सुरक्षित है। इसी दौरान, उन्होंने अपनी बेटी (मूसा की बहन) से कहा: "तू उसके पीछे-पीछे जा और देख कि उसके साथ क्या होता है, बिना किसी को बताए।"

बहन ने चुपचाप दूर से उस संदूक का पीछा किया। वह दूर से ही देखती रही कि संदूक कहाँ जाता है और किसके हाथ लगता है। अल्लाह ने उसकी आँखों को वह शक्ति दी कि वह दूर से ही सब कुछ साफ देख सके, जबकि फ़िरऔन के लोगों को यह बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि यह लड़की उस बच्चे की बहन है और उसकी निगरानी कर रही है। वे इस बात से बिल्कुल बेख़बर थे।

यह अल्लाह की अद्भुत तदबीर (योजना) थी कि उसने एक माँ के दिल में अपने बच्चे के लिए ऐसा इंतज़ाम किया, और एक छोटी सी बहन को इतनी समझदारी दी कि वह चुपचाप अपने भाई का हाल जानती रहे, बिना किसी के शक के। यह उन लोगों के लिए एक बड़ा सबक़ है कि जब अल्लाह किसी काम का फ़ैसला कर लेता है, तो वह उसे पूरा करके ही रहता है, चाहे दुश्मन कितने भी ताकतवर क्यों न हों।

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह पर भरोसा रखने वालों के लिए अल्लाह हर मुश्किल में रास्ता निकालता है। माँ का दिल बच्चे के लिए धड़कता है, और अल्लाह उसकी मदद के लिए ऐसे ज़रिये बनाता है जिनका अंदाज़ा किसी को नहीं होता। यही तो अल्लाह की कुदरत है — वह अपने बंदों की मदद करता है, चाहे हालात कितने भी विपरीत क्यों न हों।



📜 आयत 9-13 — अल-क़सस

9وَقَالَتِ امْرَأَتُ فِرْعَوْنَ قُرَّتُ عَيْنٍ لِّي وَلَكَ ۖ لَا تَقْتُلُوهُ عَسَىٰ أَن يَنفَعَنَا أَوْ نَتَّخِذَهُ وَلَدًا وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ
और (जब मूसा महल में लाए गए तो) फिरऔन की बीबी (आसिया अपने शौहर से) बोली कि ये मेरी और तुम्हारी (दोनों की) ऑंखों की ठन्डक है तो तुम लोग इसको क़त्ल न करो क्या अजब है कि ये हमको नफ़ा पहुँचाए या हम उसे ले पालक ही बना लें और उन्हें (उसी के हाथ से बर्बाद होने की) ख़बर न थी
10وَأَصْبَحَ فُؤَادُ أُمِّ مُوسَىٰ فَارِغًا ۖ إِن كَادَتْ لَتُبْدِي بِهِ لَوْلَا أَن رَّبَطْنَا عَلَىٰ قَلْبِهَا لِتَكُونَ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ
इधर तो ये हो रहा था और (उधर) मूसा की माँ का दिल ऐसा बेचैन हो गया कि अगर हम उसके दिल को मज़बूत कर देते तो क़रीब था कि मूसा का हाल ज़ाहिर कर देती (और हमने इसीलिए ढारस दी) ताकि वह (हमारे वायदे का) यक़ीन रखे
11وَقَالَتْ لِأُخْتِهِ قُصِّيهِ ۖ فَبَصُرَتْ بِهِ عَن جُنُبٍ وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ
और मूसा की माँ ने (दरिया में डालते वक्त) उनकी बहन (कुलसूम) से कहा कि तुम इसके पीछे पीछे (अलग) चली जाओ तो वह मूसा को दूर से देखती रही और उन लोगो को उसकी ख़बर भी न हुई
12۞ وَحَرَّمْنَا عَلَيْهِ الْمَرَاضِعَ مِن قَبْلُ فَقَالَتْ هَلْ أَدُلُّكُمْ عَلَىٰ أَهْلِ بَيْتٍ يَكْفُلُونَهُ لَكُمْ وَهُمْ لَهُ نَاصِحُونَ
और हमने मूसा पर पहले ही से और दाईयों (के दूध) को हराम कर दिया था (कि किसी की छाती से मुँह न लगाया) तब मूसा की बहन बोली भला मै तुम्हें एक घराने का पता बताऊ कि वह तुम्हारी ख़ातिर इस बच्चे की परवरिश कर देंगे और वह यक़ीनन इसके खैरख्वाह होगे
13فَرَدَدْنَاهُ إِلَىٰ أُمِّهِ كَيْ تَقَرَّ عَيْنُهَا وَلَا تَحْزَنَ وَلِتَعْلَمَ أَنَّ وَعْدَ اللَّهِ حَقٌّ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ
ग़रज़ (इस तरकीब से) हमने मूसा को उसकी माँ तक फिर पहुँचा दिया ताकि उसकी ऑंख ठन्डी हो जाए और रंज न करे और ताकि समझ ले ख़ुदा का वायदा बिल्कुल ठीक है मगर उनमें के अक्सर नहीं जानते हैं
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अनुवाद — अल-क़सस 11

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Tuesday, August 18, 2026

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