अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- آتَيْنَاهُمُ الْكِتَابَ: हमने उन्हें किताब (तौरात/इंजील) दी।
- مِن قَبْلِهِ: इस (क़ुरआन) से पहले।
- هُم بِهِ يُؤْمِنُونَ: वे उस (क़ुरआन) पर ईमान लाते हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन अहले-किताब (यहूदियों और ईसाइयों) के बारे में बताती है जिन्होंने अपनी मूल किताबों (तौरात और इंजील) को सही रूप में संजोए रखा और उनमें बताए गए नबी मुहम्मद (ﷺ) के आगमन के संकेतों को नहीं छिपाया। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जिन लोगों को हमने क़ुरआन से पहले किताब दी थी—यानी वे सच्चे विद्वान और ईमानवाले जो अपनी किताबों पर स्थिर रहे—वे क़ुरआन पर ईमान लाते हैं।
इसका कारण यह है कि उन्होंने अपनी किताबों में पढ़ा था कि एक अंतिम नबी आएंगे, उनकी विशेषताएँ, उनका नाम और उनके समय के बारे में विस्तार से लिखा हुआ था। जब उन्होंने क़ुरआन सुना और मुहम्मद (ﷺ) के गुणों को देखा, तो उन्होंने पहचान लिया कि यह वही नबी हैं जिनका वर्णन उनकी किताबों में मौजूद है। इसलिए उन्होंने बिना किसी झिझक के ईमान लाया।
यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई की पहचान करने के लिए खुला दिल और सच्ची नीयत चाहिए। जो लोग अपने ज्ञान और किताबों के साथ ईमानदार रहते हैं, अल्लाह उन्हें सत्य तक पहुँचा देता है। यह उन लोगों के लिए एक बड़ी शुभ सूचना है जो सच्चाई की तलाश में हैं—चाहे वे किसी भी समुदाय से हों।
आज भी जब कोई व्यक्ति खुले दिल से क़ुरआन पढ़ता है और उसकी शिक्षाओं पर ग़ौर करता है, तो उसे सच्चाई का रास्ता मिल जाता है। यह आयत हमें यह भी बताती है कि ईमान की नींव ज्ञान और सच्चाई की पहचान पर होनी चाहिए, न कि अंधी परंपरा पर। अल्लाह हमें सच्चाई को पहचानने और उस पर स्थिर रहने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 50-54 — अल-क़सस
अनुवाद — अल-क़सस 52
सूरा अल-क़सस आयत 52 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जिन लोगों को हमने इससे पहले किताब अता की है…सूरा आयत 52/88 — अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़सस सुनें, अल-क़सस अनुवाद, अल-क़सस mp3, अल-क़सस pdf. आयत 50–54. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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