अल-क़सस · 52/88
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-क़सस
الَّذِينَ آتَيْنَاهُمُ الْكِتَابَ مِن قَبْلِهِ هُم بِهِ يُؤْمِنُونَ ۝٥٢
Allazeena aatainaahu mul Kitaaba min qablihee hum bihee yu`minoon
📖 हिंदी अर्थ
जिन लोगों को हमने इससे पहले किताब अता की है वह उस (क़ुरान) पर ईमान लाते हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • آتَيْنَاهُمُ الْكِتَابَ: हमने उन्हें किताब (तौरात/इंजील) दी।
  • مِن قَبْلِهِ: इस (क़ुरआन) से पहले।
  • هُم بِهِ يُؤْمِنُونَ: वे उस (क़ुरआन) पर ईमान लाते हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन अहले-किताब (यहूदियों और ईसाइयों) के बारे में बताती है जिन्होंने अपनी मूल किताबों (तौरात और इंजील) को सही रूप में संजोए रखा और उनमें बताए गए नबी मुहम्मद (ﷺ) के आगमन के संकेतों को नहीं छिपाया। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जिन लोगों को हमने क़ुरआन से पहले किताब दी थी—यानी वे सच्चे विद्वान और ईमानवाले जो अपनी किताबों पर स्थिर रहे—वे क़ुरआन पर ईमान लाते हैं।

इसका कारण यह है कि उन्होंने अपनी किताबों में पढ़ा था कि एक अंतिम नबी आएंगे, उनकी विशेषताएँ, उनका नाम और उनके समय के बारे में विस्तार से लिखा हुआ था। जब उन्होंने क़ुरआन सुना और मुहम्मद (ﷺ) के गुणों को देखा, तो उन्होंने पहचान लिया कि यह वही नबी हैं जिनका वर्णन उनकी किताबों में मौजूद है। इसलिए उन्होंने बिना किसी झिझक के ईमान लाया।

यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई की पहचान करने के लिए खुला दिल और सच्ची नीयत चाहिए। जो लोग अपने ज्ञान और किताबों के साथ ईमानदार रहते हैं, अल्लाह उन्हें सत्य तक पहुँचा देता है। यह उन लोगों के लिए एक बड़ी शुभ सूचना है जो सच्चाई की तलाश में हैं—चाहे वे किसी भी समुदाय से हों।

आज भी जब कोई व्यक्ति खुले दिल से क़ुरआन पढ़ता है और उसकी शिक्षाओं पर ग़ौर करता है, तो उसे सच्चाई का रास्ता मिल जाता है। यह आयत हमें यह भी बताती है कि ईमान की नींव ज्ञान और सच्चाई की पहचान पर होनी चाहिए, न कि अंधी परंपरा पर। अल्लाह हमें सच्चाई को पहचानने और उस पर स्थिर रहने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 50-54 — सूरा अल-क़सस

50فَإِن لَّمْ يَسْتَجِيبُوا لَكَ فَاعْلَمْ أَنَّمَا يَتَّبِعُونَ أَهْوَاءَهُمْ ۚ وَمَنْ أَضَلُّ مِمَّنِ اتَّبَعَ هَوَاهُ بِغَيْرِ هُدًى مِّنَ اللَّهِ ۚ إِنَّ اللَّهَ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الظَّالِمِينَ
कि मै भी उस पर चलँ फिर अगर ये लोग (इस पर भी) न मानें तो समझ लो कि ये लोग बस अपनी हवा व हवस की पैरवी करते है और जो शख्स ख़ुदा की हिदायत को छोड़ कर अपनी हवा व हवस की पैरवी करते है उससे ज्यादा गुमराह कौन होगा बेशक ख़ुदा सरकश लोगों को मंज़िले मक़सूद तक नहीं पहुँचाया करता
51۞ وَلَقَدْ وَصَّلْنَا لَهُمُ الْقَوْلَ لَعَلَّهُمْ يَتَذَكَّرُونَ
और हम यक़ीनन लगातार (अपने एहकाम भेजकर) उनकी नसीहत करते रहे ताकि वह लोग नसीहत हासिल करें
52الَّذِينَ آتَيْنَاهُمُ الْكِتَابَ مِن قَبْلِهِ هُم بِهِ يُؤْمِنُونَ
जिन लोगों को हमने इससे पहले किताब अता की है वह उस (क़ुरान) पर ईमान लाते हैं
53وَإِذَا يُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ قَالُوا آمَنَّا بِهِ إِنَّهُ الْحَقُّ مِن رَّبِّنَا إِنَّا كُنَّا مِن قَبْلِهِ مُسْلِمِينَ
और जब उनके सामने ये पढ़ा जाता है तो बोल उठते हैं कि हम तो इस पर ईमान ला चुके बेशक ये ठीक है (और) हमारे परवरदिगार की तरफ से है हम तो इसको पहले ही मानते थे
54أُولَٰئِكَ يُؤْتَوْنَ أَجْرَهُم مَّرَّتَيْنِ بِمَا صَبَرُوا وَيَدْرَءُونَ بِالْحَسَنَةِ السَّيِّئَةَ وَمِمَّا رَزَقْنَاهُمْ يُنفِقُونَ
यही वह लोग हैं जिन्हें (इनके आमाले ख़ैर की) दोहरी जज़ा दी जाएगी-चूँकि उन लोगों ने सब्र किया और बदी को नेकी से दफ़ा करते हैं और जो कुछ हमने उन्हें अता किया है उसमें से (हमारी राह में) ख़र्च करते हैं
अल-क़ससकुरान सूची
88आयत
मक्कीअवतरण स्थान
52आयत

अनुवाद — अल-क़सस 52

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सूरा आयत 52/88 — सूरा अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-क़सस सुनें, सूरा अल-क़सस अनुवाद, सूरा अल-क़सस mp3, सूरा अल-क़सस pdf. आयत 50–54. हिंदी अर्थ: اردو.





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Thursday, October 1, 2026

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