अल-क़सस · 63/88
अनुवाद उच्चारण — अल-क़सस
قَالَ الَّذِينَ حَقَّ عَلَيْهِمُ الْقَوْلُ رَبَّنَا هَٰؤُلَاءِ الَّذِينَ أَغْوَيْنَا أَغْوَيْنَاهُمْ كَمَا غَوَيْنَا ۖ تَبَرَّأْنَا إِلَيْكَ ۖ مَا كَانُوا إِيَّانَا يَعْبُدُونَ ۝٦٣
Qaalal lazeena haqqa `alaihimul qawlu Rabbanaa haaa`ulaaa`il lazeena aghwainaa aghwainaahu kamaa ghawainaa tabarraanaaa ilaika maa kaanoo iyyaanaa ya`budoon
📖 हिंदी अर्थ
वह लोग जो हमारे अज़ाब के मुस्ताजिब हो चुके हैं कह देगे कि परवरदिगार यही वह लोग हैं जिन्हें हमने गुमराह किया था जिस तरह हम ख़़ुद गुमराह हुए उसी तरह हमने इनको गुमराह किया-अब हम तेरी बारगाह में (उनसे) दस्तबरदार होते है-ये लोग हमारी इबादत नहीं करते थे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • حَقَّ عَلَيْهِمُ الْقَوْلُ – जिन पर अज़ाब का फ़ैसला साबित हो चुका था।
  • أَغْوَيْنَا – हमने गुमराह किया।
  • غَوَيْنَا – हम खुद गुमराह हुए।
  • تَبَرَّأْنَا – हम बरी होते हैं / बराअत का इज़हार करते हैं।

तफ़सीर:

उस दिन जब अल्लाह तआला गुनाहगारों से पूछेगा कि तुमने मेरे बंदों को क्यों गुमराह किया, तो जिन लोगों पर अल्लाह का अज़ाब और फ़ैसला साबित हो चुका होगा – यानी कुफ़्र के बड़े-बड़े सरदार और गुमराह करने वाले रहनुमा – वे जवाब में कहेंगे: "ऐ हमारे रब! ये लोग जिन्हें हमने गुमराह किया था, हमने उन्हें उसी तरह गुमराह किया जिस तरह हम खुद गुमराह हुए थे। हमने उन्हें ज़बरदस्ती गुमराह नहीं किया, बल्कि हमने उन्हें बुराई की तरफ बुलाया और उन्होंने अपनी मर्ज़ी से हमारी बात मान ली।"

फिर वे कहेंगे: "हम तेरी बारगाह में उनसे बराअत (बरी होने) का इज़हार करते हैं। हमारा उनसे कोई नाता नहीं, न हम उनके कामों के ज़िम्मेदार हैं।" और वे यह भी कहेंगे: "ये लोग हमारी इबादत नहीं करते थे, बल्कि ये अपनी नफ़्सियानी ख्वाहिशों और शैतानों की इबादत करते थे। हमने उन्हें सिर्फ़ बहकाया था, लेकिन असल में उन्होंने अपने दिलों की ख्वाहिशों को ही माबूद बना लिया था।"

यानी उस दिन ये गुमराह करने वाले अपने पैरोकारों से किनारा कर लेंगे और दोनों गिरोह अज़ाब में मुब्तला होंगे। यह अल्लाह का बिल्कुल अदल है कि हर शख्स अपने किए का बदला पाए।

दावती पहलू:

यह आयत हमें एक बहुत बड़ी हक़ीक़त से आगाह करती है कि आज हम जिन लोगों की बात मानते हैं, उनके पीछे चलते हैं, अगर वे हमें गुमराह करते हैं, तो क़यामत के दिन वे हमसे बराअत कर लेंगे और हमें अकेला छोड़ देंगे। इसलिए हमें चाहिए कि हम सिर्फ़ अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की बात मानें, क्योंकि यही वह रास्ता है जो हमें जन्नत तक पहुँचाता है। अल्लाह ने हमें अक़्ल और समझ दी है, ताकि हम सच को झूठ से पहचानें और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ बनाएँ। याद रखें, क़यामत के दिन कोई किसी के काम नहीं आएगा, हर इंसान अपने आमाल के साथ अकेला खड़ा होगा। इसलिए आज ही अपनी ज़िंदगी को सुधार लें और अल्लाह की रहमत और मग़फिरत के तलबगार बनें।



📜 आयत 61-65 — अल-क़सस

61أَفَمَن وَعَدْنَاهُ وَعْدًا حَسَنًا فَهُوَ لَاقِيهِ كَمَن مَّتَّعْنَاهُ مَتَاعَ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا ثُمَّ هُوَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ مِنَ الْمُحْضَرِينَ
तो क्या वह शख्स जिससे हमने (बेहश्त का) अच्छा वायदा किया है और वह उसे पाकर रहेगा उस शख्स के बराबर हो सकता है जिसे हमने दुनियावी ज़िन्दगी के (चन्द रोज़ा) फायदे अता किए हैं और फिर क़यामत के दिन (जवाब देही के वास्ते हमारे सामने) हाज़िर किए जाएँगें
62وَيَوْمَ يُنَادِيهِمْ فَيَقُولُ أَيْنَ شُرَكَائِيَ الَّذِينَ كُنتُمْ تَزْعُمُونَ
और जिस दिन ख़ुदा उन कुफ्फ़ार को पुकारेगा और पूछेगा कि जिनको तुम हमारा शरीक ख्याल करते थे वह (आज) कहाँ हैं (ग़रज़ वह शरीक भी बुलाँए जाएँगे)
63قَالَ الَّذِينَ حَقَّ عَلَيْهِمُ الْقَوْلُ رَبَّنَا هَٰؤُلَاءِ الَّذِينَ أَغْوَيْنَا أَغْوَيْنَاهُمْ كَمَا غَوَيْنَا ۖ تَبَرَّأْنَا إِلَيْكَ ۖ مَا كَانُوا إِيَّانَا يَعْبُدُونَ
वह लोग जो हमारे अज़ाब के मुस्ताजिब हो चुके हैं कह देगे कि परवरदिगार यही वह लोग हैं जिन्हें हमने गुमराह किया था जिस तरह हम ख़़ुद गुमराह हुए उसी तरह हमने इनको गुमराह किया-अब हम तेरी बारगाह में (उनसे) दस्तबरदार होते है-ये लोग हमारी इबादत नहीं करते थे
64وَقِيلَ ادْعُوا شُرَكَاءَكُمْ فَدَعَوْهُمْ فَلَمْ يَسْتَجِيبُوا لَهُمْ وَرَأَوُا الْعَذَابَ ۚ لَوْ أَنَّهُمْ كَانُوا يَهْتَدُونَ
और कहा जाएगा कि भला अपने उन शरीको को (जिन्हें तुम ख़ुदा समझते थे) बुलाओ तो ग़रज़ वह लोग उन्हें बुलाएँगे तो वह उन्हें जवाब तक नही देगें और (अपनी ऑंखों से) अज़ाब को देखेंगें काश ये लोग (दुनिया में) राह पर आए होते
65وَيَوْمَ يُنَادِيهِمْ فَيَقُولُ مَاذَا أَجَبْتُمُ الْمُرْسَلِينَ
और (वह दिन याद करो) जिस दिन ख़ुदा लोगों को पुकार कर पूछेगा कि तुम लोगों ने पैग़म्बरों को (उनके समझाने पर) क्या जवाब दिया
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अनुवाद — अल-क़सस 63

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Tuesday, August 18, 2026

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