Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- حَقَّ عَلَيْهِمُ الْقَوْلُ – जिन पर अज़ाब का फ़ैसला साबित हो चुका था।
- أَغْوَيْنَا – हमने गुमराह किया।
- غَوَيْنَا – हम खुद गुमराह हुए।
- تَبَرَّأْنَا – हम बरी होते हैं / बराअत का इज़हार करते हैं।
तफ़सीर:
उस दिन जब अल्लाह तआला गुनाहगारों से पूछेगा कि तुमने मेरे बंदों को क्यों गुमराह किया, तो जिन लोगों पर अल्लाह का अज़ाब और फ़ैसला साबित हो चुका होगा – यानी कुफ़्र के बड़े-बड़े सरदार और गुमराह करने वाले रहनुमा – वे जवाब में कहेंगे: "ऐ हमारे रब! ये लोग जिन्हें हमने गुमराह किया था, हमने उन्हें उसी तरह गुमराह किया जिस तरह हम खुद गुमराह हुए थे। हमने उन्हें ज़बरदस्ती गुमराह नहीं किया, बल्कि हमने उन्हें बुराई की तरफ बुलाया और उन्होंने अपनी मर्ज़ी से हमारी बात मान ली।"
फिर वे कहेंगे: "हम तेरी बारगाह में उनसे बराअत (बरी होने) का इज़हार करते हैं। हमारा उनसे कोई नाता नहीं, न हम उनके कामों के ज़िम्मेदार हैं।" और वे यह भी कहेंगे: "ये लोग हमारी इबादत नहीं करते थे, बल्कि ये अपनी नफ़्सियानी ख्वाहिशों और शैतानों की इबादत करते थे। हमने उन्हें सिर्फ़ बहकाया था, लेकिन असल में उन्होंने अपने दिलों की ख्वाहिशों को ही माबूद बना लिया था।"
यानी उस दिन ये गुमराह करने वाले अपने पैरोकारों से किनारा कर लेंगे और दोनों गिरोह अज़ाब में मुब्तला होंगे। यह अल्लाह का बिल्कुल अदल है कि हर शख्स अपने किए का बदला पाए।
दावती पहलू:
यह आयत हमें एक बहुत बड़ी हक़ीक़त से आगाह करती है कि आज हम जिन लोगों की बात मानते हैं, उनके पीछे चलते हैं, अगर वे हमें गुमराह करते हैं, तो क़यामत के दिन वे हमसे बराअत कर लेंगे और हमें अकेला छोड़ देंगे। इसलिए हमें चाहिए कि हम सिर्फ़ अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की बात मानें, क्योंकि यही वह रास्ता है जो हमें जन्नत तक पहुँचाता है। अल्लाह ने हमें अक़्ल और समझ दी है, ताकि हम सच को झूठ से पहचानें और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ बनाएँ। याद रखें, क़यामत के दिन कोई किसी के काम नहीं आएगा, हर इंसान अपने आमाल के साथ अकेला खड़ा होगा। इसलिए आज ही अपनी ज़िंदगी को सुधार लें और अल्लाह की रहमत और मग़फिरत के तलबगार बनें।
📜 आयत 61-65 — सूरा अल-क़सस
अनुवाद — अल-क़सस 63
सूरा अल-क़सस आयत 63 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वह लोग जो हमारे अज़ाब के मुस्ताजिब हो चुके हैं…सूरा आयत 63/88 — सूरा अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-क़सस सुनें, सूरा अल-क़सस अनुवाद, सूरा अल-क़सस mp3, सूरा अल-क़सस pdf. आयत 61–65. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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