अल-क़सस · 65/88
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-क़सस
وَيَوْمَ يُنَادِيهِمْ فَيَقُولُ مَاذَا أَجَبْتُمُ الْمُرْسَلِينَ ۝٦٥
Wa Yawma yunaadeehim fa yaqoolu maazaaa ajabtumul mursaleen
📖 हिंदी अर्थ
और (वह दिन याद करो) जिस दिन ख़ुदा लोगों को पुकार कर पूछेगा कि तुम लोगों ने पैग़म्बरों को (उनके समझाने पर) क्या जवाब दिया

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يُنَادِيهِمْ (उन्हें पुकारेगा) — अर्थात अल्लाह तआला उन मुशरिकों को पुकारेगा।
  • مَاذَا أَجَبْتُمُ (तुमने क्या उत्तर दिया) — अर्थात तुमने क्या जवाब दिया।
  • الْمُرْسَلِينَ (रसूलों को) — अर्थात उन पैग़म्बरों को जो तुम्हारी ओर भेजे गए थे।

तफ़सीर:

क़यामत के दिन जब अल्लाह तआला उन मुशरिकों को पुकारेगा, तो वह उनसे पूछेगा: "तुमने मेरे भेजे हुए रसूलों को क्या उत्तर दिया था?" यानी जब मेरे पैग़म्बर तुम्हारे पास आए और तुम्हें मेरी इबादत की दावत दी, तो तुमने उन्हें क्या जवाब दिया? क्या तुमने उनकी बात मानी या उन्हें झुठलाया? क्या तुमने उनका साथ दिया या उनका विरोध किया?

यह पूछताछ उस दिन होगी जब सारे पर्दे उठा दिए जाएंगे, और हर व्यक्ति अपने कर्मों के सामने खड़ा होगा। यह प्रश्न केवल पूछताछ के लिए नहीं होगा, बल्कि यह उनकी हुज्जत (प्रमाण) क़ायम करने के लिए होगा, ताकि वे कोई बहाना न बना सकें। रसूलों ने उन्हें सच्चा रास्ता दिखाया, उन्हें अल्लाह की इबादत की ओर बुलाया, लेकिन उन्होंने उसे ठुकरा दिया।

यह पुकार उस दिन होगी, जब न कोई सिफ़ारिश काम आएगी और न कोई बहाना। अल्लाह तआला उनसे सीधा सवाल करेगा, और वे हैरान और शर्मिंदा होंगे। उनके पास कोई जवाब न होगा, क्योंकि सच्चाई सामने आ चुकी होगी।


दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला ने हर उम्मत की ओर रसूल भेजे, और हर इंसान से यह सवाल ज़रूर किया जाएगा कि उसने रसूलों के पैग़ाम का क्या जवाब दिया। यह हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है कि हम अपने नबी ﷺ की लाई हुई हिदायत को ग़ौर से सुनें, उस पर अमल करें, और उसे दूसरों तक पहुँचाएँ। रसूलों का पैग़ाम सिर्फ़ सुनने के लिए नहीं, बल्कि उस पर चलने के लिए है। जो लोग इस दुनिया में रसूलों का साथ देंगे और उनकी दावत को क़बूल करेंगे, वे उस दिन खुशहाल होंगे। और जो लोग उन्हें झुठलाएँगे या उनकी दावत को अनसुना कर देंगे, उनके लिए उस दिन बड़ी नदामत और शर्मिंदगी होगी। आइए, हम अपने जीवन को रसूल ﷺ की सुन्नत के अनुसार ढालें, ताकि उस दिन हमारा जवाब अच्छा हो सके।



📜 आयत 63-67 — सूरा अल-क़सस

63قَالَ الَّذِينَ حَقَّ عَلَيْهِمُ الْقَوْلُ رَبَّنَا هَٰؤُلَاءِ الَّذِينَ أَغْوَيْنَا أَغْوَيْنَاهُمْ كَمَا غَوَيْنَا ۖ تَبَرَّأْنَا إِلَيْكَ ۖ مَا كَانُوا إِيَّانَا يَعْبُدُونَ
वह लोग जो हमारे अज़ाब के मुस्ताजिब हो चुके हैं कह देगे कि परवरदिगार यही वह लोग हैं जिन्हें हमने गुमराह किया था जिस तरह हम ख़़ुद गुमराह हुए उसी तरह हमने इनको गुमराह किया-अब हम तेरी बारगाह में (उनसे) दस्तबरदार होते है-ये लोग हमारी इबादत नहीं करते थे
64وَقِيلَ ادْعُوا شُرَكَاءَكُمْ فَدَعَوْهُمْ فَلَمْ يَسْتَجِيبُوا لَهُمْ وَرَأَوُا الْعَذَابَ ۚ لَوْ أَنَّهُمْ كَانُوا يَهْتَدُونَ
और कहा जाएगा कि भला अपने उन शरीको को (जिन्हें तुम ख़ुदा समझते थे) बुलाओ तो ग़रज़ वह लोग उन्हें बुलाएँगे तो वह उन्हें जवाब तक नही देगें और (अपनी ऑंखों से) अज़ाब को देखेंगें काश ये लोग (दुनिया में) राह पर आए होते
65وَيَوْمَ يُنَادِيهِمْ فَيَقُولُ مَاذَا أَجَبْتُمُ الْمُرْسَلِينَ
और (वह दिन याद करो) जिस दिन ख़ुदा लोगों को पुकार कर पूछेगा कि तुम लोगों ने पैग़म्बरों को (उनके समझाने पर) क्या जवाब दिया
66فَعَمِيَتْ عَلَيْهِمُ الْأَنبَاءُ يَوْمَئِذٍ فَهُمْ لَا يَتَسَاءَلُونَ
तब उस दिन उन्हें बातें न सूझ पडेग़ी (और) फिर बाहम एक दूसरे से पूछ भी न सकेगें
67فَأَمَّا مَن تَابَ وَآمَنَ وَعَمِلَ صَالِحًا فَعَسَىٰ أَن يَكُونَ مِنَ الْمُفْلِحِينَ
मगर हाँ जिस शख्स ने तौबा कर ली और ईमान लाया और अच्छे अच्छे काम किए तो क़रीब है कि ये लोग अपनी मुरादें पाने वालों से होंगे
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65आयत

अनुवाद — अल-क़सस 65

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Thursday, October 1, 2026

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