अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تَبْيَضُّ وُجُوهٌ: चेहरे सफेद (रोशन) होंगे — यह खुशी, सुरूर और नूर की निशानी है।
- تَسْوَدُّ وُجُوهٌ: चेहरे काले होंगे — यह रुसवाई, ग़म और अंधेरे की निशानी है।
- أَكَفَرْتُم: क्या तुमने कुफ्र (इनकार) किया?
- فَذُوقُوا: तो चखो (अज़ाब का मज़ा चखो)।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत क़ियामत के उस महान दिन का मंज़र पेश करती है जब अल्लाह तआला अपने बंदों का हिसाब लेगा। उस दिन लोगों के चेहरे उनके ईमान और अमल के हिसाब से बदल जाएँगे। जिन लोगों ने दुनिया में अल्लाह और उसके रसूल ﷺ पर ईमान लाया, उनकी नेकियों पर अमल किया, और अल्लाह के अहकाम की पैरवी की — उनके चेहरे सफेद और रोशन होंगे, जैसे चाँद चमकता है। यह सफेदी खुशी, सुकून और अल्लाह की रहमत की निशानी होगी। उनके चेहरों पर नूर होगा और वे जन्नत की तरफ बढ़ेंगे।
इसके विपरीत, जिन लोगों ने अल्लाह के रसूलों को झुठलाया, उसकी आयतों से मुँह मोड़ा, और गुनाहों में डूबे रहे — उनके चेहरे काले और उदास होंगे। उनके चेहरों पर रुसवाई और शर्मिंदगी के निशान साफ दिखेंगे। यह कालापन उनके कुफ्र और नाफ़रमानी का नतीजा होगा।
फिर अल्लाह तआला फरमाता है कि जिन लोगों के चेहरे काले होंगे, उनसे पूछा जाएगा: "क्या तुमने ईमान लाने के बाद कुफ्र किया?" — यानी जब तुमने अल्लाह के साथ ईमान का अहद किया था, उसकी रुबूबियत का इक़रार किया था, तो फिर तुमने उसे तोड़कर कुफ्र और शिर्क का रास्ता क्यों चुना? यह सवाल उन्हें शर्मिंदा करने और उनकी गलती याद दिलाने के लिए होगा। उस दिन उनसे कहा जाएगा: "अब चखो अज़ाब का मज़ा — यह उस कुफ्र की सज़ा है जो तुम दुनिया में करते रहे।"
दावती पहलू (नसीहत):
यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी चेतावनी और नसीहत है। यह हमें बताती है कि आज की ज़िंदगी में हम जो भी कर रहे हैं, उसका नतीजा क़ियामत के दिन हमारे चेहरे पर ज़ाहिर होगा। अगर हम आज ईमान, नमाज़, रोज़ा, सच्चाई और नेकी का रास्ता अपनाएँ, तो उस दिन हमारे चेहरे रोशन होंगे और हम जन्नत के हक़दार बनेंगे। लेकिन अगर हम गुनाह, कुफ्र और नाफ़रमानी में जीवन बिताएँ, तो उस दिन हमारे चेहरे काले होंगे और हमें शर्मिंदगी और अज़ाब का सामना करना पड़ेगा।
तो आओ, हम अपनी ज़िंदगी को संवारें, अल्लाह की इबादत को अपनी आदत बनाएँ, और उसके रसूल ﷺ की सुन्नत पर चलें। याद रखें, आज का हर अमल कल के चेहरे की रोशनी या अंधेरे का ज़रिया बनेगा। अल्लाह हमें उन लोगों में शामिल करे जिनके चेहरे उस दिन सफेद और रोशन होंगे। आमीन।
📜 आयत 104-108 — आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 106
सूरा आल-इमरान आयत 106 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (उस दिन से डरो) जिस दिन कुछ लोगों के चेहरे…सूरा आयत 106/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 104–108. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








