आल-इमरान · 84/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
قُلْ آمَنَّا بِاللَّهِ وَمَا أُنزِلَ عَلَيْنَا وَمَا أُنزِلَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَإِسْمَاعِيلَ وَإِسْحَاقَ وَيَعْقُوبَ وَالْأَسْبَاطِ وَمَا أُوتِيَ مُوسَىٰ وَعِيسَىٰ وَالنَّبِيُّونَ مِن رَّبِّهِمْ لَا نُفَرِّقُ بَيْنَ أَحَدٍ مِّنْهُمْ وَنَحْنُ لَهُ مُسْلِمُونَ ۝٨٤
Qul aamannaa billaahi wa maaa unzila `alainaa wa maaa unzila `alaaa Ibraaheema wa Ismaa`eela wa Ishaaqa wa Ya`qooba wal Asbaati wa maaa ootiya Moosaa wa `Eesaa wan Nabiyyoona mir Rabbihim laa nufarriqu baina ahadim minhum wa nahnu lahoo muslimoon
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल उन लोगों से) कह दो कि हम तो ख़ुदा पर ईमान लाए और जो किताब हम पर नाज़िल हुई और जो (सहीफ़े) इबराहीम और इस्माईल और इसहाक़ और याकूब और औलादे याकूब पर नाज़िल हुये और मूसा और ईसा और दूसरे पैग़म्बरों को जो (जो किताब) उनके परवरदिगार की तरफ़ से इनायत हुई(सब पर ईमान लाए) हम तो उनमें से किसी एक में भी फ़र्क़ नहीं करते
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الأَسْبَاطِ: यहूदा के वंशजों में से बारह क़बीलों के नबी, जो हज़रत याक़ूब (अलैहिस्सलाम) की औलाद में से थे।
  • لَا نُفَرِّقُ بَيْنَ أَحَدٍ مِنْهُمْ: हम उनमें से किसी एक पर ईमान लाकर किसी दूसरे का इनकार नहीं करते।
  • مُسْلِمُونَ: हम अल्लाह के आज्ञाकारी और उसके सामने सिर झुकाने वाले हैं।

तफ़सीर:

ऐ नबी! आप लोगों से कह दीजिए कि हम अल्लाह पर ईमान लाए, और उस वह़ी पर भी ईमान लाए जो हमारी तरफ़ उतारी गई। हम उन सब चीज़ों पर भी ईमान रखते हैं जो अल्लाह ने हज़रत इब्राहीम, इस्माईल, इस्ह़ाक़, याक़ूब और उनकी औलाद में से नबी हुए (अलैहिमुस्सलाम) पर उतारीं। हम उस पर भी ईमान लाते हैं जो मूसा और ईसा (अलैहिमुस्सलाम) को दी गई, यानी तौरात और इंजील, और उन सब चीज़ों पर भी जो अल्लाह ने अपने सभी नबियों को अपने रब की तरफ़ से दीं। हम उनमें से किसी एक के बीच फ़र्क़ नहीं करते — हम किसी एक पर ईमान लाकर दूसरे का इनकार नहीं करते, बल्कि हम सब पर एक समान ईमान रखते हैं। हम अल्लाह के सामने पूरी तरह आज्ञाकारी और उसके हुक्म के सामने सिर झुकाने वाले हैं।

यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि वे सभी नबियों पर ईमान रखें, चाहे वे किसी भी ज़माने में आए हों। यहूदियों और ईसाइयों के विपरीत, जो कुछ नबियों पर ईमान लाते हैं और कुछ का इनकार करते हैं, मुसलमानों का ईमान सभी नबियों पर पूर्ण और एकसमान है। यही सच्चा ईमान है और यही अल्लाह की ओर से सिखाया गया तरीक़ा है।

फ़ायदे:

  • इस आयत से हमें सीख मिलती है कि ईमान की पहचान यह है कि हम अल्लाह के सभी नबियों पर बिना किसी भेदभाव के ईमान लाएँ। किसी नबी को छोटा या बड़ा समझना या किसी एक को मानकर दूसरे को न मानना ईमान की कमी है।
  • यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम में एकता और भाईचारा है — सभी नबी अल्लाह के चुने हुए हैं और उन सब पर ईमान लाना हमारा कर्तव्य है।
  • यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हमारा दीन (इस्लाम) पूर्ण और सच्चा दीन है, जो अल्लाह की ओर से सभी नबियों को दिया गया एक ही दीन है। इसलिए हमें अपने दीन पर गर्व करना चाहिए और उस पर स्थिर रहना चाहिए।
  • यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह के सामने पूरी तरह आज्ञाकारी और समर्पित होना ही सच्ची इबादत है — यानी अपनी इच्छाओं को छोड़कर अल्लाह के हुक्म के सामने सिर झुकाना।
🎧 सुनें

📜 आयत 82-86 — आल-इमरान

82فَمَن تَوَلَّىٰ بَعْدَ ذَٰلِكَ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْفَاسِقُونَ
और तुम्हारे साथ मैं भी एक गवाह हूं फिर उसके बाद जो शख्स (अपने क़ौल से) मुंह फेरे तो वही लोग बदचलन हैं
83أَفَغَيْرَ دِينِ اللَّهِ يَبْغُونَ وَلَهُ أَسْلَمَ مَن فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ طَوْعًا وَكَرْهًا وَإِلَيْهِ يُرْجَعُونَ
तो क्या ये लोग ख़ुदा के दीन के सिवा (कोई और दीन) ढूंढते हैं हालॉकि जो (फ़रिश्ते) आसमानों में हैं और जो (लोग) ज़मीन में हैं सबने ख़ुशी ख़ुशी या ज़बरदस्ती उसके सामने अपनी गर्दन डाल दी है और (आख़िर सब) उसकी तरफ़ लौट कर जाएंगे
84قُلْ آمَنَّا بِاللَّهِ وَمَا أُنزِلَ عَلَيْنَا وَمَا أُنزِلَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَإِسْمَاعِيلَ وَإِسْحَاقَ وَيَعْقُوبَ وَالْأَسْبَاطِ وَمَا أُوتِيَ مُوسَىٰ وَعِيسَىٰ وَالنَّبِيُّونَ مِن رَّبِّهِمْ لَا نُفَرِّقُ بَيْنَ أَحَدٍ مِّنْهُمْ وَنَحْنُ لَهُ مُسْلِمُونَ
(ऐ रसूल उन लोगों से) कह दो कि हम तो ख़ुदा पर ईमान लाए और जो किताब हम पर नाज़िल हुई और जो (सहीफ़े) इबराहीम और इस्माईल और इसहाक़ और याकूब और औलादे याकूब पर नाज़िल हुये और मूसा और ईसा और दूसरे पैग़म्बरों को जो (जो किताब) उनके परवरदिगार की तरफ़ से इनायत हुई(सब पर ईमान लाए) हम तो उनमें से किसी एक में भी फ़र्क़ नहीं करते
85وَمَن يَبْتَغِ غَيْرَ الْإِسْلَامِ دِينًا فَلَن يُقْبَلَ مِنْهُ وَهُوَ فِي الْآخِرَةِ مِنَ الْخَاسِرِينَ
और हम तो उसी (यकता ख़ुदा) के फ़रमाबरदार हैं और जो शख्स इस्लाम के सिवा किसी और दीन की ख्वाहिश करे तो उसका वह दीन हरगिज़ कुबूल ही न किया जाएगा और वह आख़िरत में सख्त घाटे में रहेगा
86كَيْفَ يَهْدِي اللَّهُ قَوْمًا كَفَرُوا بَعْدَ إِيمَانِهِمْ وَشَهِدُوا أَنَّ الرَّسُولَ حَقٌّ وَجَاءَهُمُ الْبَيِّنَاتُ ۚ وَاللَّهُ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الظَّالِمِينَ
भला ख़ुदा ऐसे लोगों की क्योंकर हिदायत करेगा जो इमाने लाने के बाद फिर काफ़िर हो गए हालॉकि वह इक़रार कर चुके थे कि पैग़म्बर (आख़िरूज़ज़मा) बरहक़ हैं और उनके पास वाजेए व रौशन मौजिज़े भी आ चुके थे और ख़ुदा ऐसी हठधर्मी करने वाले लोगों की हिदायत नहीं करता
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अनुवाद — आल-इमरान 84

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Tuesday, August 18, 2026

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