Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الأَسْبَاطِ: यहूदा के वंशजों में से बारह क़बीलों के नबी, जो हज़रत याक़ूब (अलैहिस्सलाम) की औलाद में से थे।
- لَا نُفَرِّقُ بَيْنَ أَحَدٍ مِنْهُمْ: हम उनमें से किसी एक पर ईमान लाकर किसी दूसरे का इनकार नहीं करते।
- مُسْلِمُونَ: हम अल्लाह के आज्ञाकारी और उसके सामने सिर झुकाने वाले हैं।
तफ़सीर:
ऐ नबी! आप लोगों से कह दीजिए कि हम अल्लाह पर ईमान लाए, और उस वह़ी पर भी ईमान लाए जो हमारी तरफ़ उतारी गई। हम उन सब चीज़ों पर भी ईमान रखते हैं जो अल्लाह ने हज़रत इब्राहीम, इस्माईल, इस्ह़ाक़, याक़ूब और उनकी औलाद में से नबी हुए (अलैहिमुस्सलाम) पर उतारीं। हम उस पर भी ईमान लाते हैं जो मूसा और ईसा (अलैहिमुस्सलाम) को दी गई, यानी तौरात और इंजील, और उन सब चीज़ों पर भी जो अल्लाह ने अपने सभी नबियों को अपने रब की तरफ़ से दीं। हम उनमें से किसी एक के बीच फ़र्क़ नहीं करते — हम किसी एक पर ईमान लाकर दूसरे का इनकार नहीं करते, बल्कि हम सब पर एक समान ईमान रखते हैं। हम अल्लाह के सामने पूरी तरह आज्ञाकारी और उसके हुक्म के सामने सिर झुकाने वाले हैं।
यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि वे सभी नबियों पर ईमान रखें, चाहे वे किसी भी ज़माने में आए हों। यहूदियों और ईसाइयों के विपरीत, जो कुछ नबियों पर ईमान लाते हैं और कुछ का इनकार करते हैं, मुसलमानों का ईमान सभी नबियों पर पूर्ण और एकसमान है। यही सच्चा ईमान है और यही अल्लाह की ओर से सिखाया गया तरीक़ा है।
फ़ायदे:
- इस आयत से हमें सीख मिलती है कि ईमान की पहचान यह है कि हम अल्लाह के सभी नबियों पर बिना किसी भेदभाव के ईमान लाएँ। किसी नबी को छोटा या बड़ा समझना या किसी एक को मानकर दूसरे को न मानना ईमान की कमी है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम में एकता और भाईचारा है — सभी नबी अल्लाह के चुने हुए हैं और उन सब पर ईमान लाना हमारा कर्तव्य है।
- यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हमारा दीन (इस्लाम) पूर्ण और सच्चा दीन है, जो अल्लाह की ओर से सभी नबियों को दिया गया एक ही दीन है। इसलिए हमें अपने दीन पर गर्व करना चाहिए और उस पर स्थिर रहना चाहिए।
- यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह के सामने पूरी तरह आज्ञाकारी और समर्पित होना ही सच्ची इबादत है — यानी अपनी इच्छाओं को छोड़कर अल्लाह के हुक्म के सामने सिर झुकाना।
📜 आयत 82-86 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 84
सूरा आल-इमरान आयत 84 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल उन लोगों से) कह दो कि हम तो…सूरा आयत 84/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 82–86. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा आल-इमरान
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


