अर-रूम · 18/60
अनुवाद उच्चारण — सूरा अर-रूम
وَلَهُ الْحَمْدُ فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَعَشِيًّا وَحِينَ تُظْهِرُونَ ۝١٨
Wa lahul hamdu fis samaawaati wal ardi wa `ashiyyanw wa heena tuzhiroon
📖 हिंदी अर्थ
और सारे आसमान व ज़मीन में तीसरे पहर को और जिस वक्त तुम लोगों की दोपहर हो जाए वही क़ाबिले तारीफ़ है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abdurrahman As-Sudais ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَعَشِيًّا: शाम का समय, जो अस्र (असर) की नमाज़ का समय है।
  • حِينَ تُظْهِرُونَ: जब तुम दोपहर में प्रवेश करते हो, यानी ज़ुहर (ज़ोहर) की नमाज़ का समय।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत मुसलमानों को निर्देश देती है कि वे अल्लाह की तस्बीह (पवित्रता का वर्णन) करें और उसे हर कमी, साथी, संतान और किसी भी प्रकार की कमज़ोरी से पाक और मुक्त घोषित करें। अल्लाह के लिए ही सारी प्रशंसा है—आसमानों में और ज़मीन में—क्योंकि आसमानों में फ़रिश्ते उसकी तस्बीह और हम्द करते हैं, और ज़मीन पर सभी प्राणी उसी की स्तुति करते हैं। यह तस्बीह और हम्द हर समय करनी चाहिए—शाम के समय (अस्र की नमाज़ में) और दोपहर के समय (ज़ुहर की नमाज़ में)। यानी, अल्लाह की याद और उसकी इबादत को दिन-रात के हर हिस्से में शामिल किया जाए, ताकि बंदा हर पल अपने रब से जुड़ा रहे और उसकी महानता का एहसास उसके दिल में जीवित रहे।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की याद सिर्फ़ मस्जिद या नमाज़ तक सीमित नहीं है, बल्कि हर हालत में—चाहे हम सुबह उठें, दोपहर में काम करें, या शाम को आराम करें—हमें उसे याद करना चाहिए। यही वह रास्ता है जो दिल को सुकून देता है और जीवन को बरकत से भर देता है। जब हम अल्लाह की हम्द और तस्बीह करते हैं, तो हमारा दिल उसकी मुहब्बत से रोशन हो जाता है, और हमारी ज़िंदगी में एक ऐसी शक्ति आती है जो हमें हर मुश्किल का सामना करने की ताक़त देती है। याद रखिए, जो बंदा अल्लाह की तस्बीह करता है, अल्लाह उसे दुनिया और आख़िरत में इज़्ज़त देता है और उसके दिल को सच्ची खुशी और संतोष से भर देता है।



📜 आयत 16-20 — सूरा अर-रूम

16وَأَمَّا الَّذِينَ كَفَرُوا وَكَذَّبُوا بِآيَاتِنَا وَلِقَاءِ الْآخِرَةِ فَأُولَٰئِكَ فِي الْعَذَابِ مُحْضَرُونَ
मगर जिन लोगों के कुफ्र एख्तेयार किया और हमारी आयतों और आखेरत की हुज़ूरी को झुठलाया तो ये लोग अज़ाब में गिरफ्तार किए जाएँगे
17فَسُبْحَانَ اللَّهِ حِينَ تُمْسُونَ وَحِينَ تُصْبِحُونَ
फिर जिस वक्त तुम लोगों की शाम हो और जिस वक्त तुम्हारी सुबह हो ख़ुदा की पाकीज़गी ज़ाहिर करो
18وَلَهُ الْحَمْدُ فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَعَشِيًّا وَحِينَ تُظْهِرُونَ
और सारे आसमान व ज़मीन में तीसरे पहर को और जिस वक्त तुम लोगों की दोपहर हो जाए वही क़ाबिले तारीफ़ है
19يُخْرِجُ الْحَيَّ مِنَ الْمَيِّتِ وَيُخْرِجُ الْمَيِّتَ مِنَ الْحَيِّ وَيُحْيِي الْأَرْضَ بَعْدَ مَوْتِهَا ۚ وَكَذَٰلِكَ تُخْرَجُونَ
वही ज़िन्दा को मुर्दे से निकालता है और वही मुर्दे को जिन्दा से पैदा करता है और ज़मीन को मरने (परती होने) के बाद ज़िन्दा (आबाद) करता है और इसी तरह तुम लोग भी (मरने के बाद निकाले जाओगे)
20وَمِنْ آيَاتِهِ أَنْ خَلَقَكُم مِّن تُرَابٍ ثُمَّ إِذَا أَنتُم بَشَرٌ تَنتَشِرُونَ
और उस (की कुदरत) की निशानियों में ये भी है कि उसने तुमको मिट्टी से पैदा किया फिर यकायक तुम आदमी बनकर (ज़मीन पर) चलने फिरने लगे
अर-रूमकुरान सूची
60आयत
मक्कीअवतरण स्थान
18आयत

अनुवाद — अर-रूम 18

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Thursday, October 1, 2026

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