अस-सजदा · 26/30
अनुवाद उच्चारण — अस-सजदा
أَوَلَمْ يَهْدِ لَهُمْ كَمْ أَهْلَكْنَا مِن قَبْلِهِم مِّنَ الْقُرُونِ يَمْشُونَ فِي مَسَاكِنِهِمْ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ ۖ أَفَلَا يَسْمَعُونَ ۝٢٦
Awalam yahdi lahum kam ahlaknaa min qablihim minal qurooni yamshoona fee zaalika la aayaatin afalaa yasma`oon
📖 हिंदी अर्थ
क्या उन लोगों को ये मालूम नहीं कि हमने उनसे पहले कितनी उम्मतों को हलाक कर डाला जिन के घरों में ये लोग चल फिर रहें हैं बेशक उसमे (कुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं तो क्या ये लोग सुनते नहीं हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَهْدِ: स्पष्ट हो जाना, समझ में आ जाना
  • الْقُرُونِ: पिछली उम्मतें, बीती हुई क़ौमें
  • يَمْشُونَ فِي مَسَاكِنِهِمْ: वे (क़ुरैश वाले) उनके घरों में चलते-फिरते हैं, यानी उनके खंडहरों से गुज़रते हैं

तफ़सीर:

क्या इन मक्का के काफ़िरों को यह बात स्पष्ट नहीं हुई कि हमने उनसे पहले कितनी ही उम्मतों को हलाक कर दिया? ये लोग अपने दैनिक आवागमन में उन्हीं की बस्तियों से गुज़रते हैं — जैसे आद की क़ौम, समूद की क़ौम और लूत की क़ौम के खंडहर — और अपनी आँखों से उनके वीरान घरों को देखते हैं। यही वे लोग थे जिन्होंने अपने नबियों को झुठलाया और अल्लाह की नाफ़रमानी की, तो अल्लाह ने उन्हें ऐसे हलाक किया कि उनका कोई निशान न बचा।

इन खंडहरों और तबाह हुई बस्तियों में बड़ी निशानियाँ हैं — यह सबूत है कि अल्लाह के रसूल सच्चे थे और उन्होंने जो चेतावनी दी थी वह सच्ची थी। यह इस बात का प्रमाण है कि शिर्क और कुफ़्र का अंजाम विनाश है। ये निशानियाँ सिर्फ़ देखने के लिए नहीं, बल्कि सुनने और सीखने के लिए हैं। क्या ये लोग इन सबक़ों को सुनकर अपनी ज़िंदगी नहीं बदलेंगे? क्या इनके कान उन नसीहतों को सुनने के लिए तैयार नहीं जो अल्लाह की तरफ़ से आई हैं?

अल्लाह तआला ने यह सब कुछ हमारी हिदायत के लिए बयान किया है। जब हम इन आयतों पर ग़ौर करते हैं, तो हमारा ईमान मज़बूत होता है और हमें यक़ीन होता है कि अल्लाह का वादा सच्चा है। यही वह रास्ता है जो हमें जहन्नुम के अज़ाब से बचाकर जन्नत की तरफ़ ले जाता है। अल्लाह की रहमत यह है कि उसने हमें ये निशानियाँ दीं ताकि हम सीधे रास्ते पर चलें और उसकी मग़फिरत के हक़दार बनें। क्या हम उन लोगों की तरह होंगे जिन्होंने आँखें होते हुए भी नहीं देखा और कान होते हुए भी नहीं सुना? या हम उन लोगों में से होंगे जो अल्लाह की आयतों से सबक़ लेते हैं और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ ढालते हैं?

याद रखिए, यह दुनिया किसी के लिए भी हमेशा नहीं रही। जो क़ौमें आज से पहले इस ज़मीन पर राज करती थीं, वे आज नहीं हैं। उनके महल खंडहर बन गए और उनकी ताक़त मिट्टी में मिल गई। यही हाल उन लोगों का होगा जो अल्लाह के रसूलों को झुठलाएँगे। लेकिन अल्लाह ने अपने बंदों के लिए तौबा का दरवाज़ा खुला रखा है — जो कोई भी अपनी ग़लतियों से बाज़ आए और अल्लाह की तरफ़ लौटे, अल्लाह उसे माफ़ कर देगा और उसे सीधा रास्ता दिखाएगा। यही अल्लाह की रहमत है जो हमें उसकी तरफ़ बुलाती है।



📜 आयत 24-28 — अस-सजदा

24وَجَعَلْنَا مِنْهُمْ أَئِمَّةً يَهْدُونَ بِأَمْرِنَا لَمَّا صَبَرُوا ۖ وَكَانُوا بِآيَاتِنَا يُوقِنُونَ
और उन्ही (बनी इसराईल) में से हमने कुछ लोगों को चूंकि उन्होंने (मुसीबतों पर) सब्र किया था पेशवा बनाया जो हमारे हुक्म से (लोगो की) हिदायत करते थे और (इसके अलावा) हमारी आयतो का दिल से यक़ीन रखते थे
25إِنَّ رَبَّكَ هُوَ يَفْصِلُ بَيْنَهُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ فِيمَا كَانُوا فِيهِ يَخْتَلِفُونَ
(ऐ रसूल) हसमें शक़ नहीं कि जिन बातों में लोग (दुनिया में) बाहम झगड़ते रहते हैं क़यामत के दिन तुम्हारा परवरदिगार क़तई फैसला कर देगा
26أَوَلَمْ يَهْدِ لَهُمْ كَمْ أَهْلَكْنَا مِن قَبْلِهِم مِّنَ الْقُرُونِ يَمْشُونَ فِي مَسَاكِنِهِمْ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ ۖ أَفَلَا يَسْمَعُونَ
क्या उन लोगों को ये मालूम नहीं कि हमने उनसे पहले कितनी उम्मतों को हलाक कर डाला जिन के घरों में ये लोग चल फिर रहें हैं बेशक उसमे (कुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं तो क्या ये लोग सुनते नहीं हैं
27أَوَلَمْ يَرَوْا أَنَّا نَسُوقُ الْمَاءَ إِلَى الْأَرْضِ الْجُرُزِ فَنُخْرِجُ بِهِ زَرْعًا تَأْكُلُ مِنْهُ أَنْعَامُهُمْ وَأَنفُسُهُمْ ۖ أَفَلَا يُبْصِرُونَ
क्या इन लोगों ने इस पर भी ग़ौर नहीं किया कि हम चटियल मैदान (इफ़तादा) ज़मीन की तरफ पानी को जारी करते हैं फिर उसके ज़रिए से हम घास पात लगाते हैं जिसे उनके जानवर और ये ख़ुद भी खाते हैं तो क्या ये लोग इतना भी नहीं देखते
28وَيَقُولُونَ مَتَىٰ هَٰذَا الْفَتْحُ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
और ये लोग कहते है कि अगर तुम लोग सच्चे हो (कि क़यामत आएगी) तो (आख़िर) ये फैसला कब होगा
अस-सजदाकुरान सूची
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अनुवाद — अस-सजदा 26

सूरा अस-सजदा आयत 26 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या उन लोगों को ये मालूम नहीं कि हमने उनसे…

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Tuesday, August 18, 2026

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