सबा · 47/54
अनुवाद उच्चारण — सबा
قُلْ مَا سَأَلْتُكُم مِّنْ أَجْرٍ فَهُوَ لَكُمْ ۖ إِنْ أَجْرِيَ إِلَّا عَلَى اللَّهِ ۖ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ شَهِيدٌ ۝٤٧
Qul maa sa-altukum min ajrin fahuwa lakum in ajriya illaa `alal laahi wa Huwa `alaa kullin shai-in Shaheed
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम (ये भी) कह दो कि (तबलीख़े रिसालत की) मैंने तुमसे कुछ उजरत माँगी हो तो वह तुम्हीं को (मुबारक) हो मेरी उजरत तो बस खुदा पर है और वही (तुम्हारे आमाल अफआल) हर चीज़ से खूब वाक़िफ है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مِنْ أَجْرٍ: बदला, पारिश्रमिक या कोई पारिश्रमिक।
  • فَهُوَ لَكُمْ: वह (बदला) तुम्हारे लिए है, यानी तुम्ही का है।
  • إِنْ أَجْرِيَ: मेरा बदला (प्रतिफल)।
  • شَهِيدٌ: गवाह, हर चीज़ पर निगरानी रखने वाला, सब कुछ जानने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से कह दीजिए कि जो मैंने तुम्हें हिदायत और भलाई का संदेश पहुँचाया है, उसके बदले में मैंने तुमसे कोई मेहनताना या पारिश्रमिक नहीं माँगा। और अगर (फ़रज़न) मैंने कुछ माँगा भी होता, तो वह तुम्हारे लिए ही होता, यानी मैं तुमसे कुछ लेने का इच्छुक नहीं हूँ। मेरा प्रतिफल तो केवल अल्लाह के पास है, वही मुझे इसका बदला देगा। मैं तुमसे किसी सांसारिक लाभ की आशा नहीं रखता। अल्लाह हर चीज़ पर गवाह है, वह मेरे कार्यों और तुम्हारे कार्यों को भली-भाँति देख रहा है। वह जानता है कि मैंने तुम्हें सच्चाई और भलाई का संदेश पहुँचाया है, और वही तुम्हें तुम्हारे कर्मों का पूरा-पूरा बदला देगा। उसकी निगाह से कोई चीज़ छिपी नहीं है, न मेरी नीयत और न तुम्हारे क्रियाकलाप।

दावत और नसीहत (उपदेश):

यह आयत हमें सिखाती है कि दीन की दावत और अच्छे कामों का उद्देश्य कभी सांसारिक लाभ या लोगों से बदला लेना नहीं होना चाहिए। हमारा इनाम अल्लाह के पास सुरक्षित है, जो सब कुछ देखता और जानता है। यही वह विश्वास है जो मुसलमान को निःस्वार्थ भाव से अच्छाई फैलाने की ताकत देता है। जब हम जानते हैं कि अल्लाह हर चीज़ पर गवाह है, तो हमें किसी की प्रशंसा या निंदा की परवाह नहीं करनी चाहिए, बल्कि केवल अल्लाह की रज़ा का ध्यान रखना चाहिए। यही वह पवित्र नीयत है जो हमें सच्चा मुसलमान बनाती है और हमारे कर्मों को अल्लाह की दृष्टि में क़बूलियत दिलाती है। अल्लाह के पास हर अच्छे काम का बदला है, और वह कभी किसी का हक़ नहीं भूलता।



📜 आयत 45-49 — सबा

45وَكَذَّبَ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ وَمَا بَلَغُوا مِعْشَارَ مَا آتَيْنَاهُمْ فَكَذَّبُوا رُسُلِي ۖ فَكَيْفَ كَانَ نَكِيرِ
और जो लोग उनसे पहले गुज़र गए उन्होंने भी (पैग़म्बरों को) झुठलाया था हालॉकि हमने जितना उन लोगों को दिया था ये लोग (अभी) उसके दसवें हिस्सा को (भी) नहीं पहुँचे उस पर उन लोगों न मेरे (पैग़म्बरों को) झुठलाया था तो तुमने देखा कि मेरा (अज़ाब उन पर) कैसा सख्त हुआ
46۞ قُلْ إِنَّمَا أَعِظُكُم بِوَاحِدَةٍ ۖ أَن تَقُومُوا لِلَّهِ مَثْنَىٰ وَفُرَادَىٰ ثُمَّ تَتَفَكَّرُوا ۚ مَا بِصَاحِبِكُم مِّن جِنَّةٍ ۚ إِنْ هُوَ إِلَّا نَذِيرٌ لَّكُم بَيْنَ يَدَيْ عَذَابٍ شَدِيدٍ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं तुमसे नसीहत की बस एक बात कहता हूँ (वह) ये (है) कि तुम लोग बाज़ खुदा के वास्ते एक-एक और दो-दो उठ खड़े हो और अच्छी तरह ग़ौर करो तो (देख लोगे कि) तुम्हारे रफीक़ (मोहम्मद स0) को किसी तरह का जुनून नहीं वह तो बस तुम्हें एक सख्त अज़ाब (क़यामत) के सामने (आने) से डराने वाला है
47قُلْ مَا سَأَلْتُكُم مِّنْ أَجْرٍ فَهُوَ لَكُمْ ۖ إِنْ أَجْرِيَ إِلَّا عَلَى اللَّهِ ۖ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ شَهِيدٌ
(ऐ रसूल) तुम (ये भी) कह दो कि (तबलीख़े रिसालत की) मैंने तुमसे कुछ उजरत माँगी हो तो वह तुम्हीं को (मुबारक) हो मेरी उजरत तो बस खुदा पर है और वही (तुम्हारे आमाल अफआल) हर चीज़ से खूब वाक़िफ है
48قُلْ إِنَّ رَبِّي يَقْذِفُ بِالْحَقِّ عَلَّامُ الْغُيُوبِ
(ऐ रसूल) तुम उनसे कह दो कि मेरा बड़ा गैबवाँ परवरदिगार (मेरे दिल में) दीन हक़ को बराबर ऊपर से उतारता है
49قُلْ جَاءَ الْحَقُّ وَمَا يُبْدِئُ الْبَاطِلُ وَمَا يُعِيدُ
(अब उनसे) कह दो दीने हक़ आ गया और इतना तो भी (समझो की) बातिल (माबूद) शुरू-शुरू कुछ पैदा करता है न (मरने के बाद) दोबारा ज़िन्दा कर सकता है
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अनुवाद — सबा 47

सूरा सबा आयत 47 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम (ये भी) कह दो कि (तबलीख़े रिसालत…

सूरा आयत 47/54 — सबा سبأ (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सबा सुनें, सबा अनुवाद, सबा mp3, सबा pdf. आयत 45–49. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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