Wa qaalal lazeena kafaroo hal nadullukum `alaa rajuliny yanabbi `ukum izaa muzziqtum kulla mumazzaqin innakum lafee khalqin jadeed
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
और कुफ्फ़ार (मसख़रेपन से बाहम) कहते हैं कि कहो तो हम तुम्हें ऐसा आदमी (मोहम्मद) बता दें जो तुम से बयान करेगा कि जब तुम (मर कर सड़ ग़ल जाओगे और) बिल्कुल रेज़ा रेज़ा हो जाओगे तो तुम यक़ीनन एक नए जिस्म में आओगे
🌐 Additional reference in اردو
🌐 اردو
اور کافر کہتے ہیں کہ بھلا ہم تمہیں ایسا آدمی بتائیں جو تمہیں خبر دیتا ہے کہ جب تم (مر کر) بالکل پارہ پارہ ہو جاؤ گے تو نئے سرے سے پیدا ہوگے
और कुफ्फ़ार (मसख़रेपन से बाहम) कहते हैं कि कहो तो हम तुम्हें ऐसा आदमी (मोहम्मद) बता दें जो तुम से बयान करेगा कि जब तुम (मर कर सड़ ग़ल जाओगे और) बिल्कुल रेज़ा रेज़ा हो जाओगे तो तुम यक़ीनन एक नए जिस्म में आओगे
📜
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
مُزِّقْتُمْ كُلَّ مُمَزَّقٍ: तुम्हारे शरीर टुकड़े-टुकड़े कर दिए जाएँ, पूरी तरह बिखर जाएँ और मिट्टी में मिल जाएँ।
لَفِي خَلْقٍ جَدِيدٍ: नई पैदाइश (नया सृजन) में होंगे, यानी दोबारा जीवित किए जाओगे।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब नबी करीम ﷺ ने लोगों को मौत के बाद दोबारा ज़िंदा होने और हिसाब-किताब की ख़बर दी, तो काफ़िरों ने इसे बिल्कुल नामुमकिन समझा। वे आपस में एक-दूसरे से मज़ाक़ और तमस्ख़ुर (उपहास) के अंदाज़ में कहने लगे: "क्या हम तुम्हें एक ऐसा आदमी बताएँ जो दावा करता है कि जब तुम मर जाओगे और तुम्हारी हड्डियाँ चूर-चूर होकर मिट्टी में मिल जाएँगी, तो तुम दोबारा नई पैदाइश के रूप में उठाए जाओगे?" यह बात वे अत्यधिक हैरानी और इनकार की वजह से कह रहे थे। उनका यह कहना उनकी नादानी और अक़्ल की कमी को दिखाता है, क्योंकि जिस अल्लाह ने पहली बार पैदा किया, वह दोबारा पैदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर (सक्षम) है।
यह आयत हमें सिखाती है कि क़ियामत का दिन और दोबारा ज़िंदा होना हक़ (सत्य) है। जो लोग इस पर हँसते हैं और मज़ाक़ उड़ाते हैं, वही असल में नुक़्सान में हैं। अल्लाह तआला की क़ुदरत के आगे कुछ भी मुश्किल नहीं है। जिस तरह वह पहली बार पैदा करने पर क़ादिर था, उसी तरह दोबारा ज़िंदा करना उसके लिए और भी आसान है। हमें चाहिए कि इस आयत से सबक़ लें और यक़ीन रखें कि एक दिन हम सब अपने रब के सामने हाज़िर होंगे, और अपने आमाल (कर्मों) का हिसाब देंगे। यही ईमान की निशानी है कि इंसान आख़िरत पर पूरा यक़ीन रखे और अपनी ज़िंदगी को इस तरह गुज़ारे कि उस दिन वह कामयाब हो।
और (ऐ रसूल) जिन लोगों को (हमारी बारगाह से) इल्म अता किया गया है वह जानते हैं कि जो (क़ुरान) तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम पर नाज़िल हुआ है बिल्कुल ठीक है और सज़ावार हम्द (व सना) ग़ालिब (खुदा) की राह दिखाता है
और कुफ्फ़ार (मसख़रेपन से बाहम) कहते हैं कि कहो तो हम तुम्हें ऐसा आदमी (मोहम्मद) बता दें जो तुम से बयान करेगा कि जब तुम (मर कर सड़ ग़ल जाओगे और) बिल्कुल रेज़ा रेज़ा हो जाओगे तो तुम यक़ीनन एक नए जिस्म में आओगे
क्या उस शख्स (मोहम्मद) ने खुदा पर झूठ तूफान बाँधा है या उसे जुनून (हो गया) है (न मोहम्मद झूठा है न उसे जुनून है) बल्कि खुद वह लोग जो आख़ेरत पर ईमान नहीं रखते अज़ाब और पहले दरजे की गुमराही में पड़े हुए हैं
तो क्या उन लोगों ने आसमान और ज़मीन की तरफ भी जो उनके आगे और उनके पीछे (सब तरफ से घेरे) हैं ग़ौर नहीं किया कि अगर हम चाहे तो उन लोगों को ज़मीन में धँसा दें या उन पर आसमान का कोई टुकड़ा ही गिरा दें इसमें शक नहीं कि इसमें हर रूजू करने वाले बन्दे के लिए यक़ीनी बड़ी इबरत है
सूराकुरान वेबसाइट की स्थापना पवित्र किताब और पाक सुन्नत की सेवा, अल्लाह की ओर बुलावा, और कुरान व सुन्नत के मार्ग पर धार्मिक विज्ञान को सुगम बनाने के एक विनम्र प्रयास के रूप में की गई थी। हम अल्लाह की प्रशंसा और उसके अनुग्रह के लिए धन्यवाद करते हैं, और उससे प्रार्थना करते हैं कि वह हमारे कार्यों को स्वीकार करे और उन्हें केवल उसके महान चेहरे के लिए विशुद्ध बनाए।