Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- أَلَمْ أَعْهَدْ إِلَيْكُمْ: क्या मैंने तुम्हें वसीयत नहीं की थी? अर्थात् क्या मैंने तुम्हें आदेश नहीं दिया था?
- أَن لَّا تَعْبُدُوا الشَّيْطَانَ: कि तुम शैतान की इबादत न करो, अर्थात् उसकी आज्ञा का पालन न करो।
- عَدُوٌّ مُّبِينٌ: स्पष्ट शत्रु, जिसकी शत्रुता बिल्कुल ज़ाहिर है।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला क़यामत के दिन अपने बंदों को डाँटते हुए और उन्हें याद दिलाते हुए फ़रमाएगा: "क्या मैंने तुमसे पहले ही वादा नहीं लिया था, ऐ आदम की संतान! कि तुम शैतान की इबादत न करो?" यानी उसकी बात न मानो और उसके कहने पर चलकर गुनाह और कुफ्र के काम न करो। क्योंकि शैतान की इबादत का मतलब उसकी आज्ञा का पालन करना है, और जो कोई अल्लाह की नाफ़रमानी करता है, वह दरअसल शैतान की इबादत करता है।
अल्लाह ने अपने रसूलों के ज़रिए हर ज़माने में इंसानों को यही नसीहत और हिदायत दी कि शैतान से बचो और उसके धोखे में न आओ। फिर अल्लाह फ़रमाता है: "बेशक शैतान तुम्हारा स्पष्ट शत्रु है।" यानी उसकी दुश्मनी कोई छिपी हुई चीज़ नहीं है, बल्कि उसने आदम (अलैहिस्सलाम) के समय से ही अपनी दुश्मनी का इज़हार कर दिया था, जब उसने सजदा करने से इनकार किया और क़सम खाई कि वह बनी आदम को गुमराह करके रहेगा।
अब जब शैतान खुद अपनी दुश्मनी का ऐलान कर चुका है, तो क्या कोई अक्लमंद इंसान अपने इस खुले दुश्मन की बात मानेगा और उसके पीछे चलकर अपने रब की नाफ़रमानी करेगा? यह बिल्कुल अक्ल के खिलाफ है। अल्लाह ने इंसान को अक्ल दी, रसूल भेजे, किताबें उतारीं, और हर तरह से रास्ता साफ़ कर दिया, ताकि इंसान समझ सके कि उसका असली दुश्मन कौन है और उसका असली मित्र कौन है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला अपने बंदों पर कितना मेहरबान है। उसने हमें आगाह कर दिया कि शैतान हमारा दुश्मन है, ताकि हम उसके जाल में न फँसें। अल्लाह ने हमें अकेला नहीं छोड़ा, बल्कि हर ज़माने में रसूल भेजे और किताबें उतारीं, ताकि हम सीधे रास्ते पर चलें। यह अल्लाह की रहमत और मुहब्बत की सबसे बड़ी दलील है कि उसने हमें दुश्मन से बचने का रास्ता बताया और अपनी तरफ बुलाया। आज भी जो कोई क़ुरआन और सुन्नत को पकड़ ले, वह शैतान के हर धोखे से महफूज़ रहेगा। अल्लाह हम सबको शैतान के शर से बचाए और अपनी इबादत पर साबित क़दम रखे। आमीन।
📜 आयत 58-62 — सूरा यासीन
अनुवाद — यासीन 60
सूरा यासीन आयत 60 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ आदम की औलाद क्या मैंने तुम्हारे पास ये हुक्म…सूरा आयत 60/83 — सूरा यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यासीन सुनें, सूरा यासीन अनुवाद, सूरा यासीन mp3, सूरा यासीन pdf. आयत 58–62. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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